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अमेरिका को पीछे छोड़ इस मामले में दुनिया का ताकदवर देश बना भारत

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भारत लगातार खुद को और ज्यादा ताकतवर बनाने में लगा हुआ है. इन कोशिशो में भारत ने सैन्य दलों पर बहुत ज्यादा ध्यान है. इन सालो में सबसे ज्यादा हथियारों की खरीदारी की है.

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अंतर्राष्ट्रीय ग्लोबल थिंक टैंक स्टॉकहोल्म इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट ने उन देशो की सूचि प्रसारित की है जिन्होंने दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार अपनी सीनों के लिए ख़रीदे है. भारत इस सूचि में पहला क्रमांक प्राप्त कर चूका है. पिछले १० सालो में भारत में हथियारों की खरीद में २४% वृध्दि हुई है. साल २०१४ से २०१७ के बिच भारत ने १२% के दर से हथियारों का आयात किया है. भारत के बाद इस सूचि में सऊदी अरबिया, ऑस्ट्रेलिया, चीन, अरब अमीरात, अल्जीरिया, इराक, पकिस्तान और इंडोनेशिया का भी नाम शामिल है. २०१३ से २०१७ के दौरान भारत ने रूस से ६२% हथियार ख़रीदे है. वाहू इजराइल से ११% हथियारों का आयत भारत ने किया है. आकड़ो से जाहिर होता है की भारत को सबसे जयादा कठियार बेचने वाला देश है रूस.

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चीन के एशिया में बढ़ रहे प्रभाव को कम करने के लिए, अमेरिका ना भारत को हथियार बेचना शुरू कर दिया है. पिछले १० सालो में अमेरिका से भारत को निर्यात होने वाले हथियारों में बढ़ावा आया है. साल २००८ से साल २०१२ और २०१३ से साल २०१७ के बिच भारत ने अमेरिका से करीब १५ बिलियन डॉलर के हथियारों की डील की हुई है. अमेरिका से हिने वाली हथियारों की खरीदारी में ५५७% का बढ़ावा हुआ है. अमेरिका ने इस निर्यात के साथ ही रूस को पीछे छोड़ दिया है. चीन ने दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार बेचे है. चीन के सबसे ज्यादा हथियार पकिस्तान खरीदता है, और बांग्लादेश उसके बाद. चीन, अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी ने दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार का निर्यात किया है. इन पांच देशो ने दूनिया में ७४% हथियार बेचे है.

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पकिस्तान को चीन से ३५% हथियार मिले है और वही, बांग्लादेश को १९% हथियार चीन मिले है. भारत अपने सैन्य की ६५% जरूरते विदेश से पूरा करता है. इस रिपोर्ट से यह बात साबित हो रही की किस तरह भारत पर लगातार दुश्मन देशो का दबाव बढ़ रहां है. इन देशो में मुख्य रूप से चीन और पकिस्तान ही शामिल है. भारत का इन दोनों देशो से कई सालो से सामे संघर्ष जारी है. भविष्य में युध्द की संभावनाओ को नजर में रखते हुए भारत इन हथियारों की खरीदारी कर रहा है और देश के सैन्य को और भी मजबूत बनाने की कोशिशो में लगा हुआ है. भारत इतनी भारी मात्रा में हथियारों की खारोदारी कर रहा है लेकिन सेनाओ के पास अभी भी हथियारों की कमी बनी हुई है.

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भारतीय सेना को अभी अर्चिलारी, राइफल, लाइट कॉम्बैट हेलीकाप्टर और नाईट फाइटिंग सन्धानो की जरुरत है. दुसरी ओर नौसेना को पनडूबी और रोलिंग हेलीकाप्टर की कमी महसूस हो रही है. और वायुसेना एक पूरी लड़ाकू स्कोडरन की जरुरत है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए कदम उठा रहा है. इसी के अंतर्गत उसने हथियारों के आयात पर इतना खर्च किया है. इसके अलावा जिस महत्वपूर्ण पहलू पर रिपोर्ट में ध्यान खींचा गया है वह है डायवर्सिफिकेशन. यानि भारत ने हाल के समय में हथियारों के आयात के लिए अलग अलग देशों को चुना है, जिसके कारण अमेरिका को काफी फायदा हुआ. फ्रांस ने साल 2011 में भारत के साथ 2.4 अरब डॉलर के हथियार के सौदे पर हस्ताक्षर किए. भारत अपने 51 मिराज-2000 युद्धक विमानों को अपडेट करना चाहता था.

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इसके अलावा अमेरिका ने भी 4.1 अरब डॉलर में भारत को दस C-17 ग्लोबमास्टर III विमान बेचने की डील की. और साल 2011 में तो भारत ने एक तरह की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रूस की जगह फ्रांस के लड़ाकू विमान खरीदे. सैन्‍य खर्च के मामले में भारत विश्‍व में 5वें स्‍थान पर है. पहले स्‍थान पर अमेरिका है. इसके बाद चीन, रूस और सऊदी अरब इस सूचि में शामिल हैं. भारत ने 2018-19 के लिए 2.95 लाख करोड़ रुपये रक्षा बजट के तहत मंजूर किये हैं. साथ ही अन्‍य 1.08 लाख करोड़ रुपये सैन्‍य पेंशन के रूप में भी मंजूर किए गए है. इन सौदों के बाद देश की सैन्य की मजबूती की ओर एक बड़ा कदम बढा है. अब किसी भी देश को भारत के खिलाफ कोई चाल चलने से पहले पुनर्विचार करना होगा.