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अमेरिका ने भारत का स्तर बढ़ाया

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अमेरिका ने ३० जुलाई २०१८ को भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण-१ (एसटीए-१) देश का दर्जा देकर उसके लिए हाई-टेक प्रॉडक्ट्स की बिक्री के लिए निर्यात नियंत्रण में छूट प्रदान की. भारत एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है, जिसे इस सूची में शामिल किया गया है.वर्ष २०१६ में भारत को अमेरिका के ‘प्रमुख रक्षा सहयोगी’ के रूप में मान्यता मिलने के बाद उसे एसटीए-१ का दर्जा हासिल हुआ है.

एक तरफ अमेरिका भारत को सामरिक साझेदार के दर्जों में इजाफा करते हुए बढ़ते भरोसे का इजहार कर रहा, तो दूसरी ओर पाकिस्तान की विश्वसनीयता परबड़ा सवालिया निशान लगा रहा है. भारत एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है, जिसे इस सूची में शामिल किया गया है. २०१६ में भारत को अमेरिका के ‘प्रमुख रक्षा सहयोगी’ के रूप में मान्यता मिलने के बाद उसे एसटीए-१ का दर्जा हासिल हुआ है. वहीं, अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ को पाकिस्तान को राहत पैकेज देने को लेकर आगाह किया.

अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विलबर रॉस ने सोमवार को कहा, ‘हमने भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण एसटीए- १ का दर्जा प्रदान किया है. निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत की स्थिति में यह ‘एक महत्वपूर्ण बदलाव’ है.’ यूएस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित भारत-प्रशांत बिजनस फोरम के पहले आयोजन में रॉस ने कहा कि एसटीए- १ दर्जा भारत-अमेरिका के सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को ‘मान्यता’ देता है.

यह दर्जा वाणिज्य नियंत्रण सूची (सीसीएल) में निर्दिष्ट वस्तुओं के निर्यात, पुन: निर्यात और हस्तांतरण की अनुमति देता है. वर्तमान में इस सूची में ३६ देश हैं जिनमें ज्यादातर नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) में शामिल देश हैं. भारत इसमें शामिल होनेवाला एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है. अन्य एशियाई देशों में जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं. यह दर्जा हासिल होने से भारत अमेरिका से अत्याधुनिक और संवेदनशील प्रौद्योगिकी खरीद पाएगा.

इससे द्वीपक्षीय सुरक्षा व्यापार रिश्ते को विस्तार मिलेगा, जिसके परिणास्वरूप भारत में अमेरिका से होनेवाले निर्यात में वृद्धि होगी. अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विलबर रॉस ने कहा कि एसटीए- १ से भारत को सुरक्षा एवं दूसरी हाई-टेक प्रॉडक्ट्स का और बड़ा सप्लाइ चेन हासिल होगा जिससे विभिन्न अमेरिकी तंत्रों के साथ उसकी गतिवधियां बढ़ेंगी, दोनों देशों के सिस्टम के बीच पारस्परिकता की वृद्धि होगी और लाइसेंसों की स्वीकृति में समय और संसाधनों की बचत होगी.

रॉस ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत के उच्च तकनीक एवं सैन्य साजो-सामान बनानेवाली कंपनियों को पहले से कहीं ज्यादा रेंज के प्रॉडक्ट्स निर्यात कर सकेंगी. भारत को मिला नया दर्जा अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स को लाभ पहुंचाएगा. इस क्रम में अमेरिकी का राष्ट्रीय सुरक्षा को भी कोई आंच नहीं आएगी. उन्होंने कहा, ‘मेरा आकलन है कि इससे भारत को उस प्रकार के प्रॉडक्ट्स की आपूर्ति के लिहाज से अमेरिका को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ होगा.

पिछले सात वर्षों में ९.७ अरब डॉलर के उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हुई है. शायद यह रकम इससे भी बड़ी होगी क्योंकि उन्हें (भारत को) पता था कि (अमेरिका) इन चीजों का निर्यात नहीं करेगा, इसलिए उन्होंने हमें इसका ऑर्डर ही नहीं दिया.’ अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरणा ने कहा कि इससे यह तो जाहिर होता ही है कि दोनों देश एक-दूसरे के साथ रिश्ते में कितना भरोसा रखते हैं, इसके साथ ही एक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा साझेदार के रूप में भारत की क्षमताओं का भी प्रदर्शन होता है.

सरना ने कहा, ‘यह न केवल रिश्ते पर विश्वास का प्रतीक है, बल्कि एक अर्थव्यवस्था और सामरिक साझेदार के रूप में भारत की क्षमता का भी इजहार है क्योंकि अमेरिका ने माना है कि भारत के पास बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था है जिससे भारत को और ज्यादा संवेदनशील सुरक्षा तकनीक और दोहरे इस्तेमाल की प्रौद्योगिकियां हासिल होंगी. वह भी किसी तरह के प्रसार की जोखिम के बिना.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक रिश्तों की स्वीकृति है. भारत को बड़े सुरक्षा साझेदार का दर्जा देना एक तार्किक कदम है.

‘ दूसरी तरफ, अमेरिका की नजर में पाकिस्तान की विश्वसनीयता लगातार निचले स्तर पर आ रही है. इसी क्रम में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) को पाकिस्तान को किसी संभावित राहत पैकेज के प्रति आगाह किया है. मीडिया में इस तरह की खबरें आई हैं कि पाकिस्तान आईएमएफ से १२ अरब डॉलर का भारी भरकम पैकेज चाहता है. पॉम्पियो से इसी बारे में पूछा गया था. इस बीच आईएमएफ ने स्पष्ट किया है कि उसे अभी तक पाकिस्तान से इस तरह का आग्रह नहीं मिला है.