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अमेरिका ने सीरिया पर किये हमले से गुस्से में आया ये देश, दे डाले ये आदेश

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A Syrian man carries his two girls as he walks across the rubble following a barrel bomb attack on the rebel-held neighbourhood of al-Kalasa in the northern Syrian city of Aleppo on September 17, 2015. Once Syria's economic powerhouse, Aleppo has been ravaged by fighting since the rebels seized the east of the city in 2012, confining government forces to the west. AFP PHOTO / KARAM AL-MASRI (Photo credit should read KARAM AL-MASRI/AFP/Getty Images)

सीरिया में रासायनिक हमले के जवाब में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सैन्य को यहाँ हमले करने के आदेश दे दिए है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, दमिश्क और होम्स में १०० से भी ज्यादा मिसाइलें दागी गईं थी. सीरियाई सेना का दावा है कि उसने इनमें से कई को मार गिराया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया पर सैन्य हमले के आदेश दे दिए हैं. इस कार्रवाई में फ्रांस और ब्रिटेन ने उसका साथ दिया है. इस हमले से रूस और इरान गुस्से में आ गए है.

सीरिया में किये गए इन हमलों के बाद सीरिया के सहयोगी देश रूस और ईरान ने बशर अल असद के शासन के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले हमलों के परिणामों की चेतावनी जारी कर दी है. जिसमे अमेरिका में रूस के राजदूत अनातोली एंटोनोव ने एक बयान में कहा है की “हमने चेतावनी दी थी की ऐसी किसी भी कार्यवाही के परिणाम बहुत बुरे होंगे, अब इसके परिणामों की जिम्मेदारी वाशिंगटन,लन्दन और पेरिस की होगी.” रुसी राजदूत अनातोली एंटोनोव ने कहा की “रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सीरिया पर हवाई हमले से रूस और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के बीच टकराव होने की आशंका बढ़ गई है. अगर दोनों देशों के बीच जंग शुरू हुई, तो इसके विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं.”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने एक ट्वीट द्वारा कहा था की रूस, उस राष्ट्र का साथ नहीं दे सकता जो रासायनिक हमले करता हो और आनंद लेता हो. ट्रम्प के इस बयान के बाद रूस के राजदूत ने कहा था की “राष्ट्रपति पुतिन का अपमान अस्वीकार्य है यह बिलकुल अस्वीकार्य है.” ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी अपने एक बयान में कहा है कि “निस्संदेह, संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी, जिन्होंने सीरिया के खिलाफ किसी भी सबूत के बिना यह सैन्य कार्रवाई की है, तो अब इसके परिणामों की जिम्मेदारी भी इन देशों को लेनी होगी.” ईरान सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद और रूस के साथ प्रमुख सहयोगी है, जो की सैन्य सलाहकारों को प्रदान करता है. उन तीनों जगहों को मिसाइलों से निशाना बनाया गया है.

जहाँ रासायनिक हमले हुए थे. देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा “फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू कर दिया गया है.” साथ ही ट्रम्प ने सीरिया की असद सरकार के समर्थक देशों रूस और ईरान से अपनी नीतियों में बदलाव करने को भी कहा है. देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा “फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू कर दिया गया है.” साथ ही ट्रम्प ने सीरिया की असद सरकार के समर्थक देशों रूस और ईरान से अपनी नीतियों में बदलाव करने को भी कहा है. अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी जेम्स मैटिस ने बताया कि अब तक हमें नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. सीरिया पर इन हमलों के बाद पेंटागन ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि सीरिया में तीन जगहों को निशाना बनाया गया.

दमिश्क का साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, ऐसा आरोप है कि यहां केमिकल और बायोलॉजिकल हथियार बनाए जाते हैं. होम्स, यहां रासायनिक हथियार को रखा जाता है. और होम्स के पास का एक ठिकाना, जहां रासायनिक हथियार उपकरण को स्टोर किया जाता है और यह एक अहम कमांड पोस्ट है. सीरिया के सरकारी टेलीविजन पर भी अमेरिका के फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर सीरिया पर हमला करने की खबरें दिखाई जा रही हैं. ब्रिटेन की प्रधान मंत्री टेरिजा मे ने इस हमले में ब्रिटेन के शामिल होने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा है की “बल प्रयोग के अलावा कोई और व्यवहारिक विकल्प नहीं था.” उन्होंने ये भी कहा है की इस मिसाइल हमले का मकसद “सत्ता परिवर्तन” नहीं था. ट्रम्प ने कहा है की यह हमले सीरियाई सरकार के रासायनिक हथियार बनाने के ठिकानो पर किया गए है.

डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया की इन हमलो का मुख्य उद्देश्य रासायनिक हथियारों का इस्येमाल, प्रसार और उत्पादन पर अंकुश लगाने की कोशिश थी. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा की या किसी इंसान नहीं बल्कि एक शैतान के अपराध है. किन्तु सीरिया के सरकार ने ऐसे किसी भी हमले इनकार कर दिया है. उन्होंने पहले इन हमलों को अफवा भी बताया था. ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तुर्की, जॉर्डन, सऊदी अरब, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड्स, इजरायल, स्पेन सभी देश अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं. ये सभी देश सीरियाइ राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ हैं. सीरिया में साल २०१३ में पहली बार रासायनिक हमला किया गया था. सीरियाई सेना ने पूर्वी घोउटा में राकेट से सरीन नर्व एजेंट छोड़ा था.

इसमें १०० से ज्यादा लोग मारे गए थे. सीरियाई सेना ने अप्रैल २०१७ में खान शेखाउन में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया था. इसमें ८० लोग मारे गए थे. इस साल की शुरुआत में भी सीरिया सेना ने विद्रोहियों के खिलाफ गैस का इस्तेमाल किया था. फिर ७ अप्रैल को रासायनिक हमला किया गया.नाटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टाेलेनबर्ग ने कहा “मैं यूएस, यूके और फ्रांस की कार्रवाई का समर्थन करता हूं. इससे सरकार की आनेवाले समय में सीरिया के लोगों पर रासायनिक हमले करने की क्षमता कम हो जाएगी. नाटो ने कहा की वह रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लए खतरा मानता है. यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सामूहिक और प्रभावी प्रतिक्रिया की मांग करता है.” जर्मनी की चांसलर और क्रिस्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन की नेता अंजेला मर्केल ने पहले ही ऐलान कर दिया था की जर्मनी सीरिया के खिलाफ अमेरिकी सैन्य के हमलो में शामिल नहीं होगा.

मर्केल ने मिडिया से कहा है की अगर सैन्य करवाई हुई तो जर्मनी भाग नहीं लेगा और मैं दृढ़तापूर्वक यह साफ़ करना चाहती की सैन्य हस्तक्षेप पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. अंजेला मर्केल ने ये भी कहा है की रासायनिक हथियार का प्रयोग हमेशा ही अस्वीकार्य होगा. सीरिया में पिछले हफ्ते रासायनिक हमले किये गए. इन हमलो में सैंकड़ो लोगों की जाने गयी. यहाँ हुए इन हमलों को लेकर अमेरिका और रूस के बिच बवाल खड़ा हो गया. पहले तो इन हमलों का आरोप अमेरिका पर लगाया जा रहा था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह साफ़ कह दिया की अमेरिका का इन हमलो से कोई तलूक नही है और वह इन हमलों की कड़ी निंदा करता है. साथ ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा की सीरिया में हो रहे इन हमलों के लिए सीरियायी सरकार ही जिम्मेदार है और राष्ट्रपति बशर अल असद को रूस और इरान का समर्थन मिल रहा है.