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अमेरिका ने हटाया भारत का प्रतिबन्ध

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भारत के साथ अमेरिकी रिश्ते पर अमेरिकी संसद में एक और मुहर लग गई है. पिछले कई महीनों से व्यापार में बढ़ती खटास और टू प्लस टू डायलॉग के न होने के बाद जिस तरह से अमेरिका और भारत के रिश्तों में खटास को देखा जा रहा था कल उसे अमेरिकी संसद ने पूरी तरह से निरस्त कर दिया और ७१६अरब डॉलर का रक्षा विधेयक पारित किया है.

इस विधेयक के पास होने से भारत के साथ देश की रक्षा भागीदारी मजबूत करने की बात कही गयी है. ओबामा प्रशासन ने भारत को २०१६ में अमेरिका के अहम रक्षा साझेदार का दर्जा दिया था. अमेरिकी संसद ने राष्ट्रीय रक्षा विधेयक, २०१९ पारित कर सीएएटीएस कानून के तहत भारत के खिलाफ रूस से खरीदे जाने वाले रक्षा उपकरणों पर लगने वाले प्रतिबंध की आशंका को खत्म करने का रास्ता भी साफ कर दिया है.

इस प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून (सीएएटीएसए) के तहत उन देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाये जाते हैं जो रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद-फरोख्त करते हैं. बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस में २०१९ वित्त वर्ष के लिए जॉन एस मैक्केन नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (एनटीएए) (रक्षा विधेयक) कल १० मतों के मुकाबले ८७ मतों से पारित किया.

सदन ने पिछले सप्ताह विधेयक पारित किया था. अब इस विधेयक को कानून बनाने के लिए इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा और उनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट ने संयुक्त कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका को भारत के साथ अपनी अहम रक्षा साझेदारी मजबूत करनी चाहिए. दोनों देशों को ऐसी साझेदारी करनी चाहिए जो हमारी सेनाओं के बीच ‘रणनीतिक, संचालनात्मक और सामरिक समन्वय बढ़ा सके.’

कांग्रेस के दोनों सदनों में पारित एनडीएए-२०१९ के अनुसार अमेरिकी सरकार को मानवीय और आपदा राहत प्रतिक्रिया पर सहयोग तथा समन्वय बेहतर करना, फारस की खाड़ी, हिन्द महासागरीय क्षेत्र और पश्चिम प्रशांत महासागर में भारत के साथ अतिरिक्त संयुक्त अभ्यास करना तथा सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सहयोगात्मक प्रयास बढ़ाने का प्रावधान है.

विधेयक के अनुसार, कांग्रेस का मानना है कि अमेरिका को जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया और अन्य सहयोगियों तथा साझेदारों के साथ मिलकर मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के मूल्य बरकरार रखने की दिशा में काम करना चाहिए तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता कायम करनी चाहिए. इस विधेयक में चीन को दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय नौवहन युद्धाभ्यास रिम ऑफ द पैसिफिक एक्सरसाइज (आरआईएमपीएसी) में भाग लेने से रोकने तथा उसकी कंपनियों को रक्षा तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिए कुछ दूरसंचार उपकरण मुहैया कराने से रोकने का प्रावधान भी है.

 

सीनेटर शेरोड ब्राउन ने विधेयक पारित होने के बाद कहा, ”विमानन, रोबोटिक, नवीन ऊर्जा के वाहनों तथा अन्य क्षेत्रों में जहां अमेरिका ने अपने आप को वैश्विक नेता के तौर पर स्थापित किया उसमें चीन के अलावा कोई भी देश इतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ रहा है.’’

अमेरिकी कांग्रेस के सीनेट ने २०१९ वित्त वर्ष के लिए जॉन एस मैक्केन नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट (एनटीएए) (रक्षा विधेयक) कल १० मतों के मुकाबले ८७ मतों से पारित कर दिया गया. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में यह विधेयक पिछले सप्ताह ही पारित हो चुका है. अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के वास्ते व्हाइट हाउस जाएगा. इस विधेयक में सीएएटीएसए के प्रावधान २३१ को समाप्त करने की बात कही गयी है.

व्हाइट हाउस में राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य रहे जोसुआ व्हाइट ने पीटीआई को बताया कि सीएएटीएसए के नये संशोधित प्रावधानों को कानूनी रूप मिलने के बाद भारत के लिए रूस से एस-४०० मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदना आसान हो जाएगा. हालांकि, उनका कहना है कि कानून की भाषा बेहद कठोर लग रही है, लेकिन रूस से रक्षा खरीद करने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधानों का बेहद नरम कर दिया गया है.