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इजराइल की शरण में आया ये मुस्लिम देश, दे दिया ये बड़ा बयान

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के अमेरिकी पत्रिका द अटलांटिक से की गयी एक मुलाक़ात से इस समय कूटनीतिक दुनिया में भारी हलचल मची हुई है. सुधारवादी छवि वाले सलमान इस समय अपने बीमार पिता के स्थान पर सऊदी रियासत के सर्वेसर्वा बन चुके हैं. उन्होंने द अटलांटिक से बातचीत में कहा है, ‘फिलस्तीन और इजरायल, दोनों देशों का अपनी-अपनी भूमि पर अधिकार है. प्रिंस महम्मद बिन सलमान के इस बयान से हलचल इसलिए शुरू हुई है क्योंकि सऊदी अरब आधिकारिक रूप से इजरायल को मान्यता नहीं देता है. लेकिन उसके पश्चिमी मित्र देश करीब दो दशक से इस इलाके में ‘द्विराष्ट्र’ फॉर्मूले को आगे बढ़ाते रहे हैं.

यहां तक कि इन देशों ने सऊदी अरब की अगुवाई में तैयार ‘अरब पीस इनिशिएटिव’ (अरब क्षेत्र में शांति की पहल) को भी समर्थन दिया है. इसमें शांति समझौते के लिए इजरायल द्वारा फिलस्तीन के कुछ इलाकों को खाली करने का प्रस्ताव शामिल है. हालांकि अब प्रिंस के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि सऊदी अरब फिलस्तीन के साथ-साथ इजरायल के अस्तित्व को स्वीकार करता है. इस बयान के साथ ही प्रिंस महम्मद बिन सलमान ने सऊदियों के करीब सात दशक पुराने इजरायल विरोध को सार्वजनिक रूप से किनारे कर दिया है. १९७९ से इस्लाम के दो कट्टर स्वरूपों – सलाफी और वहाबी को फैला रहे सऊदी अरब के लिए यहूदी विरोध आस्था का मसला रहा है, लेकिन प्रिंस सलमान ने इस आस्था को भी खारिज कर दिया है.

प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा है कि इजरायल को अपने देश में फैसले लेने का पूरा हक है. प्रिंस सलमान का यह वक्तव्य चौंकाने वाला है, क्योंकि पहले उनकी राय इस मामले पर कुछ और थी. सऊदी अरब व इजरायल के बीच राजनयिक संबंध आज भी नहीं हैं, लेकिन दोनों ईरान को साझे दुश्मन के तौर पर देखते हैं और अमेरिका से दोनों देशों के संबंध काफी प्रगाढ़ हैं. इजरायल व फिलीस्तीन के बीच हुए संघर्ष की वजह से सऊदी अरब की राय पहले अलग थी. प्रिंस महम्मद बिन सलमान फिलीस्तीन की संप्रभुता का समर्थन करते हैं. उनसे द अटलांटिक द्वारा सवाल किया गया था कि यरुशलम के लोगों को अपना राष्ट्र चुनने का अधिकार है. तो उनका कहना था कि इजरायल के साथ फिलीस्तीन के लोगों को अधिकार है कि वह अपनी जमीन का चयन अपनी इच्छा से करें.

प्रिंस का कहना था कि हमें मिलकर तय करना होगा कि क्षेत्र में शांति बनी रहे. सऊदी अरब और इजरायल कई सालों से एक दूसरे के करीब आ रहे हैं. इसकी वजह है इनका साझा दुश्मन ईरान. सीरिया को भी ये दोनों देश अपना विरोधी मानते हैं और यहां रूस के साथ ईरान की भूमिका ने भी इन्हें अपने मतभेद भुलाने के लिए मजबूर किया है. यह भी एक वजह है कि सऊदी अरब ने मार्च में एयर इंडिया को इजरायल के तेल अवीव तक की उड़ान के लिए अपना हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है.इस इलाके में मिस्र और जॉर्डन पहले ही इजरायल के सहयोगी बन चुके हैं. इस तरह प्रिंस सलमान के बयान के बाद इजरायल और अमेरिका सहित ये सभी देश एक हो गए है.

अब देखने वाली बात यह होगी कि इसके बाद क्या दूसरे अरब देश भी इजरायल के साथ अपने गोपनीय संबंधों को उजागर करते हैं या नहीं. और क्या तब फिलस्तीन पश्चिम एशिया में अलग-थलग तो नहीं पड़ जाएगा. प्रिंस सलमान का यह इंटरव्यू प्रकाशित होने के दो दिन पहले ही गाजा में फिलस्तीनी प्रदर्शनकारियों पर इजरायली सेना ने कार्रवाई की थी जिसमें कई लोग मारे गए हैं. प्रिंस सलमान ने इस इंटरव्यू में ‘सभी का स्थायित्व सुनिश्चित करने वाले शांति समझौते’ की बात की है, लेकिन इसका क्या स्वरूप होगा, इस विषय पर उन्होंने कुछ नहीं कहा है. वहीं दूसरी तरफ प्रिंस के पिता किंग सलमान का बयान आ चुका है. उन्होंने कहा है कि सऊदी रियासत फिलस्तीनी नागरिकों के एक स्वतंत्र राष्ट्र, जिसकी राजधानी यरुशलम हो के लिए प्रतिबद्ध है.

जैसे सऊदी अरब में महिलाओं को कार चलाने का अधिकार मिलने का मतलब यह नहीं है कि यहां लैंगिक समानता आ गई, वैसे ही प्रिंस सलमान का इजरायलियों के पक्ष में दिए गए बयान का मतलब यह नहीं है कि पश्चिम एशिया का यह विवाद सुलझने के कगार पर पहुंच गया है. प्रिंस का बयान समाधान का सिर्फ एक पहलू है और पूरे समाधान के लिए यहां सभी पक्षों को कई मोर्चों पर काम करने की जरूरत होगी. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के इस बयान को सऊदी अरब और इसराइल की बढ़ती नज़दीकियों की निशानी के तौर पर देखा जा रहा है. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद इस समय कारोबार बढ़ाने और ईरान के असर से निपटने के लिए अमरीका के दौरे पर गए हुए हैं.

ईरान और सऊदी अरब के बीच जिस तरह से तनाव बढ़ रहा है, उस वजह से इसराइल और गल्फ़ कॉर्पोरेशन काउंसिल के बीच साझा हित बढ़े हैं क्योंकि दोनों ही देश ईरान को अपने लिए एक ख़तरे के तौर पर देखते हैं. क्राउन प्रिंस ने कहा है की “इसराइल के साथ हमारे कई साझा हित हैं. अगर शांति रहेगी तो गल्फ़ कॉर्पोरेशन काउंसिल के देशों और इसराइल के बीच आपसी हित बढ़ेंगे.” पिछले महीने ही सऊदी अरब ने अपने आसमान से इसराइल के लिए कमर्शियल फ़्लाइट सर्विस को मंजूरी दी थी. सऊदी अरब की राजशाही के रुख में अबतक का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. सऊदी अरब और इजरायल के बीच अब भी कोई औपचारिक राजनयिक रिश्ते नहीं हैं, लेकिन बीते कुछ सालों में दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे रिश्तों में सुधार हुआ है.