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इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की वृद्धि का बढ़ा दर

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सीमेंट, कोयला और रिफाइनरी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन की वजह से इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के आठ उद्योगों की वृद्धि दर इस माह में ६.७ प्रतिशत पर पहुंच गई. यह पिछले आठ माह में सबसे ऊंची वृद्धि है. आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. एक साल पहले जून में इस क्षेत्र में एक प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी.

बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उर्वरक, इस्पात, प्राकृतिक गैस, बिजली, कच्चा तेल, कोयला, सीमेंट और रिफाइनरी उद्योग शामिल हैं. एक साल पहले जून में इन क्षेत्रों में ४.३ प्रतिशत वृद्धि हुई थी. इन आठ बुनियादी क्षेत्रों में इससे पहले नवंबर २०१७ में ६.९ प्रतिशत की ऊंची वृद्धि दर्ज की गई थी.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बुनियादी क्षेत्र में सीमेंट उद्योग में जून माह के दौरान १३.२ प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई वहीं रिफानरी क्षेत्र में १२ प्रतिशत और कोयला क्षेत्र में ११.५ प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में क्रमश: ३.४ प्रतिशत और २.७ प्रतिशत गिरावट रही. वहीं बिजली क्षेत्र में जून माह में ४ प्रतिशत की वृद्धि रही. एक साल पहले बिजली क्षेत्र में २.२ प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.

इस्पात क्षेत्र की वृद्धि इस दौरान ४.४ प्रतिशत रही जो कि एक साल पहले जून में छह प्रतिशत थी. डेटा बताता है कि उर्वरक क्षेत्र में एक प्रतिशत वृद्धि हुई जो कि एक साल पहले इस उद्योग में नकारात्मक रही थी. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जून की अवधि में बुनियादी ढांचागत क्षेत्र की कुल वृद्धि ५.२ प्रतिशत रही. एक साल पहले इसी अवधि में इस क्षेत्र में २.५ प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. बुनियादी क्षेत्र के इन आठ उद्योगों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में ४०.२७ प्रतिशत भारांश है.

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कड़ी मौद्रिक नीति के चलते २०१८-१९ में भारत की विकास दर के अपने पहले के पूर्वानुमान को थोड़ा कम करने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि भारत की वृद्धि विकास दर भविष्य में काफी मजबूत रहेगी. IMF ने सोमवार को २०१८ में भारत की विकास दर ७.३% रहने और २०१९ में ७.५% रहने का अनुमान जताया जो उसके अप्रैल में जताए गए अनुमान से क्रमश : ०.१% और ०.३% कम है.

आईएमएफ के शोध विभाग के निदेशक और आर्थिक सलाहकार मौरिस ऑब्स्टफेल्ड ने संवाददकहा , ‘भारत की वृद्धि भविष्य में तेज बनी रहेगी. यह अभी यह कम है लेकिन मजबूती से बढ़ रही है.’ ऑब्स्टफेल्ड ने कहा, ‘भारत की वृद्धि दर के अनुमान को कम करने के कारकों में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना और वैश्विक स्तर पर वित्तीय स्थितियों का कठिन होना प्रमुख है.’ तेल की कीमतें बढने से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ेगा क्योंकी भारत ईंधन के मामले में आयात पर अधिक निर्भर है.

इसके अलावा वैश्विक वित्तीय परिस्थियां पहले से अधिक मुश्किल हुई हैं जिससे अगले साल की वृद्धि पर थोड़ा असर पड़ेगा. बता दें कि IMF ने सेामवार को भारत का आर्थिक विकास दर अनुमान चालू वित्त वर्ष में ७.५ फीसदी से घटाकर ७.३ फीसदी कर दिया था. आईएमएफ ने चीन की आर्थिक विकास दर इस साल ६.६ फीसदी और अगले साल ६.४ फीसदी पर स्थिर रखी है.

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के अनुसार, अमेरिका में आर्थिक विकास दर २०१८ में २.९ फीसदी और अगले साल २.७ फीसदी रहने का अनुमान है. वहीं आईएमएफ का मानना है कि व्यापार को लेकर बढ़ते तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जोखिम बना हुआ है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है.

मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश की इकोनॉमी वृद्धि कर रही है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि आपूर्ति बाधित होने और भू-राजनीतिक दबाव से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भारत जैसे आयातकों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन भारत अब भी दुनिया की सबसे तीव्र विकास दर वाली अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर है. आईएमएफ के मुताबिक, ‘भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ २०१७ के ६.७ प्रतिशत से बढ़कर २०१८ में ७.३ प्रतिशत और २०१९ में ७.५ प्रतिशत रहने का अनुमान है. आईएमएफ के अनुमान के हिसाब से भारत अगले साल ग्रोथ के मामले को पीछे छोड़ देगा.