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इस अरब देश में मर्दों के इजाजत के बिना महिलाएं नहीं कर सकती ये काम

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सऊदी अरब हमेशा से ही पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का बिंदु रहा है. यहाँ लोग आते है यहाँ की शान शौकत और आरामदायी जिंदगी का लुब्द उठाने. यहाँ की ऊँची ऊँची इमारतें और चकाचौन्द सड़के अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है. लेकिन इस देश की महिलाओं के लिए कानून सुनकर आप हैरान रह जायेंगे.

सऊदी अरब एक ऐसा देश है जहा की महिलाओं को अभी भी उनके हक़ नहीं मिल पाए है. यहाँ कई काम ऐसे है जो की महिलाये अभी भी घर के मर्दों की अनुमति के बिना नहीं कर सकती है. सऊदी अरब के समाज में महिलाओं की ज़िंदगी पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं. हाल ही में सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाज़त मिलने के बाद पूरी दुनिया में इस कदम की सराहना की गई थी. महिलाओं ने विशेष रूप से इसे एक ऐसा कदम बताया था जिसे कई साल पहले उठाया जाना चाहिए था.  यहां की महिलाओं को ऐसे काम नहीं करने दिए जाते है जो भारत जैसे देश में आज करोड़ों महिलाएं बेधड़क कर रही हैं. ये देश है सऊदी अरब और यहां पर महिलाओं को ऐसे काम नहीं करने जाते हैं जिनके बारे में आप जाकर हैरान हो जाएंगे.

हम बता रहे हैं वो काम जो सऊदी अरब में महिलाएं बिल्‍कुल नहीं कर पाती हैं. सऊदी अरब में ऐसे कानून के खिलाफ अब महिलाओं ने आवाज उठाना भी शुरु कर दिया है. महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी हटाने का कदम क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने उठाया जो कि सऊदी शासक के बेटे हैं. क्राउन प्रिंस मोहम्मद ने सऊदी साम्राज्य के तल पर निर्भर अर्थव्यवस्था को बदलने और सऊदी परिवारों की जिंदगी में बेहतरी लाने के उद्देश्य से इस तरह के कदम उठाए हैं. हालांकि कई कट्टरपंथी संगठनों के गले से यह बात नहीं उतर पा रही है. सऊदी अरब में रहने वाली महिलाओं को कार चलाने का ही अधिकार नहीं हैं. सऊदी अरब में शरीयत कानून लागू है और इस कानून के चलते महिलाओं को कार चलाने क आजादी नहीं है.

साल २०११ में वीमेनटूड्राइव अभियान के तहत इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई गई थी. इस कानून को लेकर सोशल मीडिया साइट पर वीडियो और फोटो के जरिए व्‍यापक अभियान भी शुरु किया गया था. लेकिन इस अभियान को सफलता मिलने में काफी देर लगी. अभी पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने इस कानून को ख़त्म कर महिलाओं को गाडी चलाने की आज़ादी दे दी है. यह बात अलग है कि अभी भी सऊदी की महिलाओं को काफी लंबा रास्ता तय करना है. ऐसे बहुत सारे रोज़मर्रा के काम हैं, फैसले हैं जो अभी भी सऊदी महिलाएं, पुरुष की इजाज़त के बगैर नहीं ले सकती. दरअसल सऊदी में संरक्षण पद्धति के तहत महिलाओं को बांधकर रखा गया है. इसके मुताबिक महिला को किसी एक पुरुष के संरक्षण में रहना जरूरी है. यह संरक्षण, पिता, भाई, पति, कोई भी हो सकता है.

सऊदी अरब में कट्टरता का यह हाल है कि वहां पर महिलाओं को कपड़े और मेकअप करने को लेकर भी कानून लागू किया जा चुका है. वहां महिलाओं को सख्‍त हिदायत दी गई है कि ऐसे कपड़े और मेकअप करें जिसके चलते कम से कम सुदंरता दिखे. उनके कपड़े पहनने को लेकर भी वहां पर नियम जारी हैं. शरिया के मुताबिक ही ड्रेस कोड निर्धारित की जाती है. ज्यादातर औरतें हिजाब और अबाया पहनती हैं. जरूरी नहीं कि चेहरा ढका हुआ हो लेकिन सज संवरकर बाहर निकलना अभी भी सऊदी में पाबंदी है. नैतिकता की दुहाई देने वाले संगठन इस पर आपत्ति जताते दिख जाते हैं. गैर मर्दों से ज्यादा बातचीत के लिए भी महिलाओं को मुसीबत झेलनी पड़ सकती है. ज्यादातर सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं और पुरुषों के बैठने की जगह अलग है.

किसी भी तरह से मेलजोल को लेकर आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है जिसमें पुरुष से कहीं ज्यादा सज़ा महिला के खाते में आ सकती है. कुछ साल पहले सऊदी में बलात्कार से जुड़े एक मामले ने इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान बटोरा क्योंकि पुरुष के साथ महिला को भी सज़ा का पात्र माना गया. वजह – महिला देर रात बाहर क्या कर रही थी. यही हाल सऊदी अरब के अधिकतर स्‍थानों पर पार्क, समुद्र किनाारे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भी महिलाओं पर यह नियम लागू होते हैं. अगर नियम तोड़ते हुए पाया जाता है तो महिलाओं और पुरुष दोनों को सजा दी जाती है. पर महिलाओं की सजा पुरुषों की तुलना में ज्‍यादा खतरनाक होती है. सऊदी की महिलाएं खुले स्विमिंग पूल में तैर नहीं सकती और उनके लिए निजी पूल बनाए जाते हैं.

रॉयटर्स की एडिटर आर्लेंड गेट्ज़ ने अपने एक अनुभव में लिखा था कि एक महंगे रियाध होटल में ठहरने के दौरान मुझे स्विमिंग पूल की तरफ देखने भी नहीं दिया गया क्योंकि वहां पुरुष स्विमसूट में घूम रहे हैं. पब्लिक स्‍वीमिंग पुल में सिर्फ पुरुष ही जा सकते हैं. साल २०१५ में सऊदी अरब ने महिलाओं के बगैर ओलंपिक खेलों की मेजबानी का प्रस्ताव रखा. लंदन २०१२ में सऊदी ने पहली बार दो महिला खिलाड़ियों को भेजा जिसका कड़ा विरोध किया गया. कट्टरपंथी गुटों ने उन महिलाओं को वैश्या तक कह डाला. महिलाएं पुरुष संरक्षक के साथ गई और सिर ढककर हिस्सा लिया. हालांकि २०१७ में सऊदी ने अपने राष्ट्रीय स्टेडियम में महिलाओं के आने पर लगी पाबंदी को हटा दिया. सऊदी अरब में अरब में महिलाओं को कब्रिस्‍तान में जाने और फैशन मैगजीन पढ़ने तक पर प्रतिबंध लगा हुआ है. सऊदी अरब का कट्टर शरीयत कानून वहां पर रहने वाली महिलाओं की आजादी का सबसे बड़ा रोड़ा है.