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इस क्षेत्र में PM मोदी ने पूरी दुनिया में बजाया भारत का डंका, अमेरिका भी रह गया हैरान

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दुनिया में तेजी से बढ़ रही हिन्दुस्तान की धाक पर अमेरिका ने भी अपनी मुहर लगा दी है. बता दे की अमेरिका ने अपने सबसे पुराने और सबसे बड़े सैन्य कमान पैसिफिक का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमान कर दिया है. अमेरिका के लिए भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाने वाला यह सांकेतिक कदम है.

सूत्रों की माने भारत सहित कुल मिला के २६ देश अमेरिका के हवाई द्वीप और दक्षिण कैलिफॉर्निया के पास २७ जून से २ अगस्त तक होने वाले रिम ऑफ पसिफिक (रिमपैक) सैन्य अभ्यास में भाग लेंगे. बता दे की पेंटागन ने दुनिया के सबसे बड़े समुद्री सैन्य अभ्यास की गुरुवार को घोषणा की है. दो साल में एक बार आयोजित होने वाले रिमपैक अभ्यास में इस साल ४७ पोत, पांच पनडुब्बियां, १८ राष्ट्रीय थल सेना, २०० से ज्यादा विमान और २५,००० सैनिक भाग लेंगे यह जानकारी मिली है. अभ्यास की घोषणा से पहले अमेरिका ने रिमपैक-२०१८ के लिए चीन को न्योता नहीं भेजा है. इस कदम को चीन ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. खास बात ये है कि अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच नाम बदलने का कदम उठाया है.

बता दे की गुरुवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा है कि, “हिंद और प्रशांत महासागर में बढ़ते कनेक्टिविटी को देखते हुए हम यूएस पैसिफिक कमान का नाम यूएस इंडो-पैसिफिक कमान रख रहे है. यह हमारा मुख्य लड़ाकू कमान है जिसके तहत करीब आधी दुनिया आती है. इसमें भिन्न-भिन्न आबादी शामिल है. यह हॉलीवुड से बॉलीवुड और ध्रुवीय भालू से लेकर पेंग्विन तक फैला है.” सूत्रों के मुताबिक़ आगे उन्होंने कहा है कि, “प्रशांत अैर हिंद महासागर के साझेदारों के साथ संबंध क्षेत्रीय स्थिरता कायम करने के लिए महत्वपूर्ण है.” खबरों के अनुसार मैटिस हवाई स्थित पैसिफिक कमान मुख्यालय में कमान नेतृत्व परिवर्तन के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे तो वही दूसरी तरफ एडमिरल फिल डेविडसन ने एडमिरल हैरी हैरिस से कमान का दायित्व संभाला यह जानकारी प्राप्त हुई है.

जानकारी के मुताबिक़ हैरिस को दक्षिण कोरिया में अमेरिकी राजदूत बनाया गया है. भारत समेत प्रशांत क्षेत्र में निगरानी के लिए पैसिफिक कमान में ३७५,००० सैन्य और असैन्य कर्मी शामिल है. सूत्रों के मुताबिक़ बता दे की दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूएस पैसिफिक कमान या पैकोम का गठन किया गया था. कमान के नाम में बदलाव भारत के बढ़ते सैन्य महत्व को दर्शाता है. खबरों की माने चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है. जबकि अमेरिका क्षेत्र में चीन पर नियंत्रण लगाने का प्रयास कर रहा है. बता दे की साल २०१६ में अमेरिका और भारत ने मरम्मत और सामान आपूर्ति के लिए एक दूसरे के अड्डों के इस्तेमाल का समझौता कर अपने सैन्य संबंधों को मजबूत किया था. अमेरिका के इस निर्णय से यह बात साफ है अमेरिका अब ये मानने लगा है कि भारत की ताकत को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है.