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इस देश की ये कर्तुद देख, गुस्से में आये पुतिन ने दी ये बड़ी धमकी

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जासूस सर्गेई स्क्रिपल पर केमिकल अटैक के मामले में रूस के खिलाफ ब्रिटेन को अमेरिका समेत दुनिया के १९ देशों का साथ मिल गया है. मंगलवार तक अमेरिका और यूरोप के कई देशो द्वारा रूस के करीब १२० डिप्लोमैट्स को देश छोड़ने के आदेश दिए गए है. रूस ने कार्रवाई करने वाले देशों को बदले की चेतावनी दी है. रूस ने कई देशों से बड़ी संख्या में अपने राजदूतों के निष्कासन को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के देशों की कार्रवाई से खफा रुस अब जवाबी कार्रवाई की रणनीति बनाने में जुट गया है.

आरआईए न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी संसद की उच्च सदन की स्पीकर वेलेंटीना मेटवीयनेंको ने यह जानकारी दी है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्रि पेसकोव ने कहा है कि अमेरिकी सरकार का यह कदम निराशाजनक है. रूस इस स्थिति का विश्लेषण करेगा और जल्द ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन देशों पर जवाबी कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के ६० डिप्लोमैट्स को देश छोड़ने का आदेश दिया है. कनाडा, जर्मनी, पोलैंड, फ्रांस समेत २० देशों ने भी अपने यहां से रूस के ५९ डिप्लोमैट्स से जाने को कह दिया है. ट्रम्प ने सिएटल स्थित रूसी वाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान कर दिया है. अमेरिका के एक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि रूस के सभी ६० डिप्लोमैट्स अमेरिका में डिप्लोमेटिक कवर के तहत जासूसी कर रहे थे.

इनमें करीब १२ से ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में रूस के मिशन पर तैनात थे. ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका में रूस के १०० खुफिया अफसर हैं. निष्कासित किए गए रूसी अधिकारियों को ७ दिन में अमेरिका छोड़ना होगा. लेकिन जिन डिप्लोमैट्स पर कार्रवाई की गई है, उनके नाम घोषित नहीं किये गए है. ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा कह चुकी हैं कि हमारी जांच में सामने आया है कि सेल्सबरी में करीब १३० लोग रूस के खतरनाक नर्व एजेंट की चपेट में हो सकते हैं. हो सकता है कि स्क्रिपल और उनकी बेटी दोबारा कभी ठीक ही ना हो पाएं. न्यूजीलैंड ने कहा कि हम रूसी जासूसों को देश से निकालना चाहते हैं, लेकिन हमें अपने देश में कोई रूसी जासूस मिल ही नहीं रहा है. ब्रिटेन का उपनिवेश रह चुका है न्यूजीलैंड.

न्यूजीलैंड ने स्वीकार किया कि देश में रूसी जासूसों की कमी है, जिसका मतलब हुआ कि वे इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है. रूस के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा है कि यूरोपीय संघ के नेताओं को रूस और वाशिंगटन द्वारा मास्को-लंदन के बीच तनाव को लेकर उकसाने वाले रूस विरोधी अभियान में खींचा जा रहा है. जासूस हमले में रूस की भूमिका के मामले में ईयू के समर्थन का ब्रिटेन ने स्वागत किया है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने शुक्रवार को अन्य यूरोपीय संघ के नेताओं द्वारा पेश किए गए समर्थन का स्वागत किया है. ईयू ने ब्रिटेन के आरोपों पर सहमति जताई है कि पूर्व जासूस पर नर्व एजेंट नामक रसायन से हमले के पीछे रूस का हाथ है. इस निर्णय में राजकीय स्वार्थ भी माना जा रहा है.

अमेरिका और रुस के बीच कई महीनों से तनातनी की स्थिति है. रुस की यूरोपीय देशों को नजरअंदाज करने की कोशिशें औऱ अमेरिका को सीधी चुनौती देने के उसके फैसले के खिलाफ अमेरिका ने ये बड़ा कदम उठाया है. अमेरिका ने रुस पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह कार्रवाई की है. अमेरिका ने आरोप लगाया है कि रुस ब्रिटेन में एक जासूस को जहर देकर मार दिया गया है औऱ उसके राजनयिकों की गतिविधियां संदिग्ध हैं जिसके चलते ये कार्रवाई करने के लिए अमेरिका मजबूर हो गया. पश्चिमी देशों में इनदिनों दूसरे किस्म के शीतयुद्ध का दौर प्रारंभ हो चुका है. इस बीच आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबूल ने भी अपने यहां से दो रूसी राजनयिकों को निकालने की घोषणा की है. ब्रिटेन में हुई इस हत्या के विरोध में तथा ब्रिटेन के साथ अपनी सहभागिता साबित करने के लिए अन्य देशों ने ऐसा कदम उठाया है.

रूसी जासूस सर्गेई स्कि्रपल उम्र ६६ साल और उनकी बेटी यूलिया उम्र ३३ साल पर चार मार्च को जहर से हमला हुआ था. इस घटना के बाद लन्दन और मास्को के रिश्तों में कड़वाहट देखने को मिली है. दोनों पीड़ितों को ब्रिटेन के अस्पताल में इलाज के लिए भारती किया गया है, उनकी हालत काफी गंभीर है. ब्रिटेन ने इस हमले के लिए रूस पर आरोप लगाया है. रूस ने इन आरोपों को सिरे से साफ़ इनकार किया गया है. रूस के पूर्व जासूस सर्गेइ स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया ४ मार्च को दक्षिणी इंग्लैंड में एक शॉपिंग सेंटर के बाहर एक बेंच पर बेहोशी की हालत में मिले. पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई. वहां पता चला कि उन्हें जहर दिया गया है. स्क्रिपल इससे पहले भी विवादों में रहे है.

रूस के सेवानिवृत सैन्य खुफिया अधिकारी स्क्रिपल को ब्रिटेन के लिए जासूसी करने के आरोप में रूस ने साल २००६ में १३ साल की सजा सुनाई गयी थी. हालांकि, बाद में उन्हें माफी मिल गई थी और ब्रिटेन ने उन्हें नागरिकता दे दी थी. वह तब से ब्रिटेन में ही रह रहे हैं. एक ब्रिटिश नागरिक को भी वहां की जमीन पर मारने का प्रयास किया गया है. इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद से माहौल में तनाव पैदा हो गया है. इस सूचना के सार्वजनिक होने के बाद से ही विभिन्न देशों से करीब एक सौ रुसी राजनयिकों को निकाला जा चुका है. इन तमाम राजनयिकों को इस आरोप में निकाला गया है कि वे रुस के जासूस हैं. अब देखना ये होगा की क्रोधित हुआ रूस जवाब में कुआ कार्यवाही करता है.