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इस देश पर लगातार दुसरे दिन हुआ हवाई हमला, सदमे में सारी दुनिया

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सीरिया में अब अशांति ने अपना राज बना लिया है. यहाँ हो रहे हमले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे. इन हमलो में लगातार यहाँ नागरिक शिकार बन रहे है. गुरुवार को यहाँ एक स्कूल पर हवाई हमला किया गया. इस हवाई हमले में १६ बच्चों समेत २० लोगों की जान चली गई है. कफ्र बातिख इलाके में यह हमला किया गया. यहाँ हुए इस हमले में मारे गए सबसे बड़े बच्चे की उम्र मात्र ११ साल की है. ब्रिटेन की निगरानी संस्था सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के प्रमुख रामी अब्देल रहमान ने बताया कि जिहादी समूह हयात तहरीर अल-शाम के चौकी के निकट यह हवाई हमला हुआ है.

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हमला राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना ने किया था या सीरिया सरकार के सहयोगी रूस ने. रामी अब्देल रहमान का कहना है की ‘हमला आतंकी संगठन हयात तहरीर अल-शाम के एक नाके के करीब किया गया था, इस संगठन में अलकायदा समर्थित समूह के पूर्व सदस्य शामिल हैं. यहाँ से करीब स्थित एक स्कूल से बाहर आ रहे बच्चे इस हमले का शिकार बन गए।’ इस हफ्ते दूसरी बार यहाँ के स्कूली बच्चे इन हमलों का शिकार बने है. इसी हफ्ते सीरिया की राजधानी दमिश्क के पूर्वी घोउटा स्थित काशकोल बाजार में भी रॉकेट हमला हुआ था. पूर्वी घओटा पर विद्रोहियों का कब्ज़ा है. इस रॉकेट हमले में एक स्कूल की भूमिगत मंजिल में शरण लेने वाले १५ बच्चों और दो महिलाओं की मौत हो गई थी.

सीरिया के राष्ट्रपति के खिलाफ ७ साल पहले एक शांतिपूर्ण विद्रोह की शुरुवात हुई थी. लेकिन यह अब एक बड़े गृहयुध्द में बदल चूका है. इस संघर्ष में करीब ४ लाख लोगों की अब तक मौर हो चुकी है. राष्ट्रपति बशर अल-असद ने साल 2000 में अपने पिता हाफ़िज़ की मौत के बाद सत्ता संभाली. मार्च 2011 में दक्षिणी शहर डेरा में लोकतंत्र की मांग होनी शुरू हुई. सरकार ने इन विरोधों को कुचलने के लिए घातक बलों का प्रयोग किया. जिसके बाद पूरे देश में राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की मांग होने लगी. हिंसा तेज़ी से फैली और पूरा देश में गृहयुध्द की शुरुवात हुई. यह युद्ध सिर्फ़ राष्ट्रपति असद के समर्थकों और विरोधियों के बीच का मामला नहीं रहा. अधिकतर समूह और देश अपने-अपने एंजेंडे के तहत इसमें शामिल हो गए. जिससे स्थिति काफ़ी पेचीदा हो गई और ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही.

सीरियाई सरकार की ओर से विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े पूर्वी ग़ूता में पिछले पांच दिनों से लगातार बमबारी की घटनाये जा रही है. इस बमबारी की वजह से अभी तक ४०० से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग ४ लाख लोग यहां फंसे हुए हैं. पूर्वी ग़ूता में प्रभावित लोगों के लिए काम कर रही बाहरी सहायता एजेंसियों ने इस इलाके के हालात को बहुत ही भीषण बताया है. सहायता एजेंसी आईसीआरसी की प्रवक्ता जो तीन महीने पहले गूता में सहायता कार्य करने के लिए पहुंची इन्जी ने बीबीसी को बताया है की पूरा इलाका तबाही की कगार पर खड़ा है. उन्होंने कहा, ”पिछली बार जब मैं नवबंर महीने में वहां थी, तब वहां के हालात बेहद खराब थे, अब हालात और ज़्यादा बदतर हो गए हैं, आम नागरिक बेवजह मारे जा रहे हैं, हमें उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश करनी चाहिए.”

समूहों पर आरोप हैं कि वो सीरिया के विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच नफ़रत फैला रहे हैं. वो बहुसंख्यक सुन्नी मुस्लिमों और राष्ट्रपति असद के समर्थक अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों के बीच खाई पैदा कर रहे हैं. इन विभाजनों की वजह से दोनों पक्ष अत्याचार पर उतर आए. उन्होंने जिहादी संगठन इस्लामिक स्टेट और अल-क़ायदा को भी फलने-फूलने की अनुमति दे दी है. लाखो जाने लेने के अलावा इस युद्ध ने 15 लाख लोगों को स्थाई रूप से विकलांग बना कर रख दिया है. इनमें से 86 हज़ार लोगों के हाथ या पैर काटने पड़े हैं. करीब ६१ लाख सीरियाई नागरिक देश के भीतर विस्थापित हो चुके हैं. इसके अलावा ५६ लाख लोगों ने देश के बाहर शरण ले ली हैं. सीरियाई लोगों के पास अब वैद्यकीय सहायता न के बराबर है.

फ़िजिशियन फ़ॉर ह्यूमन राइट्स का कहना है की ३३० मेडिकल ठिकानों पर दिसंबर २०१७ तक ४९२ हमले हो चुके हैं. जिनमें ८४७ वैद्यकर्मी मारे गए हैं. सीरिया के हालात वक़्त के साथ और बिगड़ रहे है. यहाँ के लगों का जीवन बहुत की कठिन बन गया है. हर कदम पर यहाँ मौत का खतरा है. यहाँ की सेना किसी पर भी रहम नहीं कर रही. यहाँ लाई बच्चे अनाथ और बेघर हो गए है तो कई विकलांग बन गए है. सीरिया के लोगों के लिए मदत पहुँचाना भी दुनिया के लिए एक चुनौती बन चुकी है. यहाँ के हालातो का फायदा कुछ एनी देश भी उठा रहे है. इस बिच यह समजना मुश्किल हो रहा है की सीरिया पर हमले कौन करता है और किसका हाथ होता है हर घटना के पीछे.