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इस मुस्लिम देश का ये ख़ुफ़िया प्लान आया सबके सामने, पूरी दुनिया रह गयी सन्न

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इरान अपने दुश्मनों से बचने के लिए कई नई तरीके के टेक्नोलॉजी को अपना रही है.इरान ने अब लम्बी दुरी के मिसाइल का कार्यक्रम शुरू किया है.२०११ में हुए हादसे के कारण लम्बी दुरी वाले मिसाइल तय करनेवाले वैज्ञानिक जमिन्दोह हो गए. कई विश्लेशकों ने तेहरान की नई तकनिकी का विनाश का करार दिया.

उन्होंने इससे निष्कर्ष का अनुमान लगाया की वैज्ञानिक की मृत्यु से पहले ही हसन तेहरानी ने इरान के रेगिस्तान में खुफिया तरीके से मिसाइल कार्यक्रम को शुरू किया और काम भी पूरा कर लिया.शोधकर्ताओं ने सॅटॅलाइट से इसकी फोटो भी प्राप्त की.इस फोटो की अनुमान के मुताबिक़ कहा जाता है की इरान ने एक साईट पर राकेट इंजन और राकेट फ्यूल का भी काम पूरा कर लिया है.यहाँ ज्यादातर इस काम को पूरा करने के लिए रात के वक्त में काम किया गया.संभावना है की यहाँ मध्यम दुरी की मिसाइल बनाई जा सकती है. शोधकर्ताओं ने स्ट्रक्चर और ग्राउंड मेकिंग में भी कई तरीके की एकरूपता नहीं देखि.लेकिन इससे यह बात सामने नहीं आई की इरान लम्बी दुरी वाली मिसाइल पर काम कर रहा है.लेकिन इस के कारण इरान आंतर्राष्ट्रीय डील से बच गया,जो हथियारों के विकास के लिए वजह बन गयी.

शोधकर्ताओं के रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार इरान का परमाणु कार्यक्रम यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के लिए खतरे की घंटी बनी.यह एक कारण है की अमेरिका और इरान के बिच तनाव बढ़ता जा रहा है.इस मामले को पांच विशेषज्ञों ने देखा.उन्होंने भी इस बात पर सहमती दर्शाई की इरान भी खुफिया तरीके से लम्बी दुरी तय करनेवाली मिसाइल पर काम कर रहे है. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्टडीज के मिसाइल एक्सपर्ट मिचेल इलिमन ने जांच किया, तो कुछ अहम बिन्दुओं को भी उसमें चिन्हित किया गया.जिससे वैज्ञानिकों के हलचल पैदा करने के लिए काफी थे. इससे पता भी चला है की तेहरान इसमें कई पांच से दस साल से लगा हुआ है.इरान के यूनाइटेड स्टेट मिशन ने इस बात पर बयान देने से भी मना कर दिया.क्योंकि उनके मुताबिक़ मिलिटरी मामलों पर टिपण्णी नहीं करना चाहती.

कैलिफोर्निया के इंटरनेशनल स्टडीज से सामने आया है की इरान के शाहरूद से २५ मीटर दूर से फैसिलिटी सेंटर है.इस फैसिलिटी सेंटर पर मिसाइल का टेस्टिंग किया जाता है.ये सब बातें तस्वीर के माध्यम से सामने आई.२०१७ के वर्ष में इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ जब इरानियन जर्नलिस्ट असोसिएशन की और से मुह्दाम के आसपास की तस्वीर पेश की गई तब उसमें शाहरुद की भी तस्वीरे थी.शाहरूद एक कस्बे का नाम है की जो उस स्थान से ४० किलोमीटर से दूर है.जहा वर्ष २०१३ में मिसाइल भी लांच किया गया था.प्रारम्भिक अवस्था में कई तरीके की मिलिटरी तकनीक भी शुरू की गयी.। इनडोर, बैलेस्टिक लैब, विन्ड टनल और इनरिचमेंट ऐसे सुविधाओं को धक् कर रखा गया ताकि यह सब अंडरग्राउंड में ही हो जाए.इसके लिए मिसाइल एक अपवाद है,जो एक इंटरकांटिनेंटल बैलेस्टिक मिशान के लिए है.

मिसाइल के इंजन को खड़ा करना और परिक्षण के लिए उसे बाहर निकालना एक खतरनाक काम है.यह काम आमतौर पर खुली जगह पर किया जाता है.इसका परिक्षण करने के बाद इसका निशाना जमीन पर जले हुआ बन जाता है.शोधकर्ताओं को मिले सॅटॅलाइट तस्वीरे मिले. इस तस्वीर में एक क्रियेटर दिखा, जो बाहर था.यह हाल ही स्पेस सेण्टर में साबित हुआ.यहाँ के जमींन में दो गहरे निशान देखे.ऐसी तस्वीरे वर्ष २०१६ और फिर २०१७ जून में दिखे.शोधकर्ताओं की रिपोर्ट के मुताबिक़ शाहरूद में वर्ष २०१७ की टेस्ट में ३७० टन इस्तेमाल किया गया था.इसमें से इंजन का वजन ६२ से ९३ से टन का रहा है.जो की.अभी तक दो बिना किये गए स्टैंड किये गए.शाहरूद में एक मिसाइल परिक्षण का प्रमाण मिला जहा तिन हाउस पिट बरामद किये गए.जो राकेट कंपोनेंट को लाने और रखने में इस्तेमाल किया जाता है.

जो हाउस पिट बरामद किये गए है इसमें से एक पिट ५.५ मीटर व्यास का था, यह इरान की मध्यम दुरी के मिसाइल के लिए जिम्मेदार माना जाता है.शोधकर्ताओं की माने तो इमेज की क्वालिटी बेहतर की जा सकती है.इसके जरिये बिल्डिंग के बिच में और ट्राफिक के चीजों की पहचान की जा सकती है.कैलिफोर्निया के रिसर्चर डेविड के मुताबिक पुराने सॅटॅलाइट में भी ऐसी सुविधा है.कैलिफोर्निया स्थित रिसर्च टीम की अगुवाई करने वाले जेफरी लुईस का कहना है की इरान के इस कार्यक्रम के मामले में हमने ठोकर खाई है.उनके मुताबिक़ इरान आज भी ऐसे संस्करणों का उन्नत तरीके से विकास कर सकता है.इरान इस कार्यक्रम को स्पेस राकेट बताकर छिपा सकता है.सेंट्रल फॉर स्ट्रैटजिक एडं इंटरनेशनल स्टडीज के इरानी मामलों के एक्सपर्ट डिना का कहना है लम्बी दुरी तय करनेवाले इस मिसाइल की दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रतीत नहीं होता है.

उसी वक्त से ऐसा अंदेशा है की इरान कोई मिसाइल तकनिकी पर खुफिया तरह से काम कर रहा है.लेकिन इस दुरान इरानी नेताओं का कहना था की इस तरह का कोई काम नहीं चल रहा.उन्होंने कहा की उनकी और से ऐसे किसी भी तरह की मिसाइल बनाने की योजना नहीं है.कैलिफोर्निया स्थित हथियार शोधकर्तोने ने एक ईरान के स्टेट प्रोग्राम में सैन्य वैज्ञानिक की बखान किया जा रहा था.यह सभी शोधकर्ताओ के लिए एक बड़ा सबक था.वैसे देखा जाए तो इरान के परमाणु कार्यक्रम की पूरी तरह से पुख्ती तौर पर पूरी जानकारी नहीं है.इसीके कारण नार्थ कोरिया को पूरी तरह से संदेह का लाभ मिला.ट्रम्प की परमाणु समझोते से बाहर निकलने के कारण जेद्दाह जैसे हार्डलाइनर मिसाइल के परमाणु पर दबाव दाल सकते है लेकीन अब इरान पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है.