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इस वजह के कारन तीसरे विश्वयुद्ध में इन 10 देशो में से इस देश की होगी जीत

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पहले और दुसरे विश्वयुद्ध के मुकाबले ये बात तो तय है की तीसरा विश्वयुध्द सबसे ज्यादा शक्तिशाली होगा. लेकिन क्या कोई ये बता सकता है की तीसरा विश्वयुध्द कौन जीतेगा?

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पहले और दुसरे विश्वयुध्द ने दुनिया के नक़्शे को बदल दिए. कई देश टूटे, कई देश नए बने, कई लोगो की जाने गयी, लोग बेघर हुए, जमीन बंजर हो गयी. पहले दो विश्वयुध्दो में पुरानी युध्द्कालिन पध्दतियों से युध्द किया गया था. दुसरे विश्वयुध्द के अंत में अमेरिका ने परमाणु बम का प्रयोग कर के युध्द को ख़त्म कर दिया था. लेकिन उसके बाद ७० सालो में दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी है. इन सालो में दुनिया ने तकनिकी और विज्ञानं के क्षेत्र में कई नयी खोज की है. इस तरक्की के साथ ही युध्द की तकनीक और हथियार भी शक्तिशाली बनाये गए. परमाणु बम, लड़ाकू विमान, ताकतवर नौसेना, ड्रोन, हाइड्रोजन बम, आधुनिक मिसाइल, जहरीले रासायनिक बम आदि की भी खोज हुई. तीसरे विश्वयुध्द में इन सब का प्रयोग ही मुख्य रूप से होगा.

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कोई नहीं चाहता की दुनिया फिर से विश्वयुध्द के नतीजो का सामना करे. लेकिन जैसे हालत आज की राजनीती के है, विश्वयुध्द का होना तय है. अगर विश्वयुध्द की शुरुवात होती है, तो कौनसा देश जीतेगा यह सवाल सबसे ज्यादा जिज्ञासा पैदा करता है. कोई भी निश्चित रूप से ये नहीं बता सकता की कौनसा देश इस विश्वयुध्द का अंतिम विजेता होगा. इन बातो का अनुमान लगाया जा सकता है देश की ताकत से. हर देश की अपनी अलग फ़ौज है, तो उसके नौसेना की ताकत, वायुसेना, देश के पास मौजूद विमानों की संख्या, सैनिको की संख्या, मौजूदा टैंक, परमाणु हथियार, देश के कूटनैतिक धोरण आदि बातो को ध्यान में रखते हुए इन बातो का अनुमान लगाया जा सकता है. तो आज हम ऐसे ही देशो के बारे में आपको बता रहे है जिनके तीसरे विश्वयुध्द में विजयी होने संभावनाए है.

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इस सूचि में १०वे स्थान पर आता है तुर्की. तुर्की ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कम बजट के साथ भी बहुत कुछ किया जा सकता है. तुर्की के पास उच्चतम देशो के मुकाबले बहुत ही ताकतवर वायुसेना और नौसेना है. तुर्की के आसपास ईसिस आतंकी संघटन का खतरा बढ़ रहा है, और इसी के साथ यह देश अपने सैन्य को हर पहलु से सुधार रहा है. देश आज परमाणु हथियार बनाने पर भी काम कर रहा है. यह अपनी नौसेना और वायुसेना में भी नयी तकनीको के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है. आज तुर्की के पास लगभग ४,१०,५०० कार्यरत फ़ौज है और १,८५,६३० अरक्षित फ़ौज है. तुर्की के पास कुल ११५ नौसैनिक यूनिट है और १३ सबमरीन है. वायुसेना में १०२० विमान, ४४३ हेलीकाप्टर और साथ की ३७७८ मिलिट्री टैंक शामिल है. इस देश का कुल मिलिट्री का खर्च १८ से २२ मिलियन डॉलर का है. इस सब के साथ तुर्की तीसरे विश्वयुध्द में अहम् भूमिका में होगा.

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९वा देश है जर्मनी. इस देश ने दुसरे विश्वयुध्द की शुरुवात की थी. दुसरे विश्वयुद्ध में यह देश पूरी तरह बर्बाद हो चूका था. लेकिन इसके बावजूद, आज यह फिर से पूरी ताकत के साथ खड़ा हो गया है. इस देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के कारन यह देश फिर से विश्वयुध्द करने के लिए सक्षम है. जर्मनी को रोकना एक ही तरीका है की वह रूस के तेल पर पूरी तरह निर्भर है किन्तु तीसरे विश्वयुद्ध के शुरू होने से पहले जर्मनी इस उलझन को सुलझा देगा. १,७९,०४६ कार्यरत फौजी और १,४५,०० अरक्षित फौजी यह देश रखता है. ८२ नौसैनिक यूनिट और ४ सबमरीन, ६६३ विमान, ३५५ हेलीकाप्टर और ४०६ मिलिरट्री जर्मनी के पास है. लेकिन इस देश के पास कोई भी परमाणु हथियार नहीं है. लेकिन जरुरत पड़ने पर यह देश परमाणु हथियार का निर्माण कर सकता है क्योंकि देश की अर्थ्व्यवस्था काफी मजबूत है.

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८वे क्रमांक पर दक्षिण कोरिया है. कोरिया देश के विभाजन के बाद, उतार कोरिया और दक्षिण कोरिया दो अलग और नए देश बन गए. उत्तर कोरिया लगातार दक्षिण कोरिया को हमला करने की और युध्द की धमकियां देय रहता है. और इसी वजह से दक्षिण कोरिया को मजबूत बनना पड़ा. दक्षिण कोरिया के पास ६,२४,४६५ सक्रीय फ़ौज है, २,९०,००० अरक्षित फ़ौज है. साथ की १६६ नौसैनिक यूनिट और १३ सब्मरिन मौजूद है. देश के पास वायुसेना में १४१२ विमान, ६६८ हेलीकाप्टर है. और २३८१ मिलिट्री टैंक भी है. दक्षिण कोरिया का मिलिट्री का खर्च कुल ३६ अरब डॉलर है, जो दुनिया का १०वा सबसे बड़ा मिलिट्री खर्च है. यह देश हमेशा ही अपना सैन्य तैयार रख सकता है क्योकि उत्तर कोरिया की ओर से कभी भी हमला किया जा सकता है.

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जापान इस सूचि में ७वे स्थान पर है. जापान दुनिया का पहला देश है जिसपर परमाणु हमला हुआ था. इस देश में आज भी उस हमले की यादे ताजा है. अभी भी उस हमले के नतीजो से यहाँ के लोग पूरी तरह उभर नहीं पाए. ये बात सच है की जापान अपनी महनत और लगन से आज एक विक्सित देश बन गया है. दुसरे विश्वयुध्द के बाद यह देश एक शांतिवादी देश बन गया. जापान की सेना दुसरे देशो की तुलना में छोटी है. लेकीन यह सेना बढ़ रही है. जापानी सेना में अधिकतर अधुनिक तकनीको का इस्तेमाल किया जा रहा है. जापान अपनी मिलिट्री बहुत खर्च करता है और उसके कारन उसकी मिलिट्री मजबूत है. जापान के पास २,४७,१७३ सक्रीय फ़ौज है, ५७,९०० अरक्षित फ़ौज है. १३१ नौसेनिक यूनिट और १६ सब्मरिन भी है. १६१३ विमान, ७४२ हेलीकाप्टर है और ६७८ मिलिट्री टैंक है. इसका मिलिट्री खर्च कुल ४६ अरब डॉलर है.

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फ्रांस वैसे तो दुनिया के बाकि देशो की तुलना में एक छोटा देश है. लेकिन बहुत ताकतवर है. और इस सूचि में छटे स्थान पर है. फ्रांस की सेना को बहुत ही उच्चतम तकनीको से प्रशिक्षित किया गया है. साथ ही उसके पास आधुनिक विमान और लड़ाकू टैंक भी मौजूद है जो उसके ताकत बढ़ाते है. फ्रांस के पास एकमात्र परमाणु बम वाला विमान भी शामिल है. जो देश फ्रांस के साथ मिल जाता है, वो अपने हथियारों का निर्माण खुद ही कर सकता है. फ्रांस की सक्रीय फ़ौज है २,०२,७६२. और अरक्षित फ़ौज में १,९५,७७० का समावेश है. ११३ नौसैनिक यूनिट और १० सब्मरिन भी है. वायुसेना में मौजूद है १२६४ विमान और ६०१ हेलीकाप्टर. ६२३ मिलिट्री टैंक भी है और इस देश का कुल मिलिट्री खर्च है ६२.३ बिलियन डॉलर. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है की इस देश के पास ३०० से ज्यादा नुक्लेअर हथियार तैनात है.

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५वे स्थान पर है भारत. वैसे तो भारत एक शांतिपूर्ण देश है कभी भी खुद जंग की शुरुवात नहीं करता है. लेकिन यदि कोई देश भारत पर हमला कर दे तो भारत उसका प्रतिकार पूरी ताकत से कर सकता है. भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ही तेजी से बढ़ रही है, जीस कारन वह भविष्य में बड़ी महाशक्तियो के लिए खतरा बन सकता है. भारत के पास बहुर बड़ी फ़ौज है लेकिन आगे भी बढौतरी की सम्भावना है. भारत के पास अज कुल १३,२५,००० की फ़ौज है और २१,४३,००० अरक्षित फ़ौज है. नौसेना में २०२ नौसु=इनिक यूनिट है और १५ सब्मरिन है. वायुसेना में शामिल १,९०५ विमान है और ५८४ हेलीकाप्टर. साथ ही देश के पास ६४६४ मिलिट्री टैंक भी मौजूद है. देश का मिलिट्री खर्च है कुल ५० अरब डॉलर. भारत के पास ११० से १३० परमाणु हथियार भी है.

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४था देश है यूनाइटेड किंगडम, अर्थात यु के. इस देश के पास फ़ौज और उपकरणों की संख्या कम है. इसकी वजह है उनकी भौगोलिक स्थिति. यह देश एक द्वीप पर स्थित है जिसके कारन किसी भी देश को उनपर हमला करना मुश्किल हो जाता है. इस देश की फ़ौज होने के बावजूद ये किसी भी देश से अपना बचाव करना अच्छे से जानते है. ब्रिटेन के पास १,४६,९८० सक्रीय फ़ौज है. और लगभग १,८०,००० अरक्षित फ़ौज है. नौसेना में शामिल है ६६ नौसैनिक यूनिट और १० सब्मरिन. वायुसेना में ९३६ विमान और ४०२ हेलीकाप्टर है. और ४०७ मिलिट्री टैंक भी है. यूनाइटेड किंगडम का कुल मिलिट्री खर्च है ६० अरब डॉलर. लेकिन ब्रिटेन की सबसे बड़ी ताकत है उसके २१५ परमाणु हथियार. ब्रिटेन उसके आसपास के राष्ट्रों से काफी कम आक्रमक देश है.

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अंतिम विजेता बनाने की सम्भावना होने वाला तीसरा देश है चीन. चीन ने अपने सैन्य के आधुनिकीकरण में सबसे जयादा तरक्की कर ली है. वैश्विक प्रगति के मुकाबले चीन की गति धीमी जरूर हो गयी है लेकिन यह जल्द ही सुधर जाएगी.. चीन के ओआस कुल २३३३,००० सक्रीय फ़ौज है और २३,००,००० अरक्षित फ़ौज है. ६७३ नौसेना यूनिट है और ६७ सबमरीन है. वायुसेना में २८६० विमान और ९८० हेलीकाप्टर शामिल है. साथ ही चीन के पास ९१५० मिलिट्री टैंक है. चीन का मिलिट्री खर्च दुनिया दूसरा सबसे ज्यादा है. उनका कुल मिलिट्री खर्च है २१६ बिलियन डॉलर. चीन के पास २५० से २६० परमाणु हथियार है जिसके साथ वह दुनिया का चूता सबसे ज्यादा परमाणु हथियार वाला देश बन गया है. इस सब के बावजूद चीन आज भी अपने सैन्य और हथियार बढाने में लगा हुआ है.

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दुसरे स्थान पर अत अहै रूस. रूस दुनिया सबसे ज्यादा तेल का नियंत्रण करने वाला देश कहलाता है. रूस आज दुनिया की दूसरी सबसे शक्तिशाली सेना है. रूस आनेवाले सालो में मिलिट्री खर्च में और भी वृध्दि करने वाला है. रूस के पास है सबसे ताकतवार मिलिट्री टैंक, वायुसेना और नौसेना. और सबसे अहम् है रूस के ताकतवर परमाणु हथियार. रूस के पास ७,६०,५५० के करीब सक्रीय फ़ौज है और २४,८५,००० अरक्षिर फ़ौज है. ३५२ नौसैनिक यूनिट है और ५५ सबमरिन है. वायुसेना में ३५०० विमान और ११२० हेलीकाप्टर शामिल है. रूस के पास १५,३९८ मिलिट्री टैंक भी है. रूस का मिलट्री खर्च है ८५ अरब डॉलर जो आगे और भी बढेगा. दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार रूस के पास है. साथ ही उसके पास ७००० से भी ज्यादा नुक्लेअर हथियार है.

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तीसरा विश्वयुद्ध जितने की सबसे ज्यादा सम्भावना रखता है यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका. दुनिया की सबसे बखूबी प्रशिक्षित फ़ौज अमेरिका के पास है. साथ ही उनका रक्षा बजट दुनिया में सबसे जयादा है. अमेरिका के पास कुल १०,४०,००० सक्रीय फ़ौज है और अरक्षित फ़ौज है १०,१०,०००. अमेरिका के पास नौसेना में ४७३ नौसैनिक यूनिट है और सबमरीन है ७२. वायुसेना में १३,८९२ विमान है और ६१९६ हेलीकाप्टर है. अमेरिका के ८८४८ मिलिट्री टैंक है. उसका मिलिट्री खर्च है कुल ६०० अरब डॉलर. अमेरिका का मिलिट्री खर्च दुनिया में सबसे ज्यादा है. अमेरिका के पास ६८०० परमनु हथियार है, जो की दुनिया के दुसरे सबसे ज्यादा परमाणु हथियार है. आज अमेरिका की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है की वे दुनिया के किसी भी देश का सामना आसानी कर सकते है और ये देश हमेशा ही युध्द के क्षेत्र में सक्षम रहा है.