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इस वजह के कारन भारत नहीं बना पाता है, China से सस्ते प्रोडक्ट्स

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चीन ने आज पूरी दुनिया के मार्किट पर कब्ज़ा कर लिया है. दुनिया में शायद ही कुछ देश होंगे जहा चीनी सामान नहीं बिकता है. और यही दशा है भारत में भी.

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भारत के किसी भी शहर या गाव में जाए, तो वहां भारतीय सामान से भी चीनी सामान की ज्यादा भिन्नता देखने मिलती है. लेकिन वही अगर चीनी बाजारों की बात करे, तो वहां भारतीय उत्पादन ना के बराबर बिकते है. चीन भारी मात्रा में भारत में निर्यात करता है. साथ ही वह दुनिया भर में भी निर्यात करता है. चीन पूरी दुनिया का उत्पादनकर्ता बना हुआ है. इसकी मुख्य वजह ये है की चीन के उत्पादों की किमत बाकि देशो की कीमतों से कम है. लेकिन चीन यह कैसे कर पाता है? क्या वजह है की चीन के उत्पादन भारत से इतनी कम किमत में बन जाते है? चीन ऐसी कौनसी तकनीक इस्तेमाल करता है जिससे वह भारत के मुकाबले कम दाम में अपने उत्पादन बाजार में बेच सकता है?

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सबसे पहली वजह यह है की किसी भी अन्य बड़े देश के मुकाबले, चीन में बहुत ही कम पैसो में श्रमिक उपलब्ध हो जाते है. श्रीलंका, व्हिएतनाम जैसे देशो में मजदुर चीन से ३०% तक कम दाम में काम तो करते है, लेकिन उनकी कुशलता चीन के मुकाबले बहुत ही कम है. चीन में बीते कुछ सालो में मजदूरो की तनख्वाह १५% तक बढ़ गयी है. फिर भी के श्रमिको की तनख्वाह तुलना में कम ही है. उत्पादकता विकास में चीन पिछले साल सबसे अव्वल रहा है. साल १९९० से २०१० के काल में उनकी वार्षिक औसत उत्पादकता विकास का दर २.८% था. वही इन सालो में अमेरिका का ०.५% था और जापान की ०.२% थी. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है की चीन को ज्यादातर कच्चा माल अपने ही देश में उपलब्ध हो जाता है.

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इसका सबसे बड़ा उदाहरन है यहाँ बने इलेक्ट्रॉनिक पुरजे. अगली वजह है स्पर्धात्मक कीमत. चीन को किसी भी उत्पादन की नयी तरह खोज नहीं करनी होती है. इसकी दो प्रमुख वजह ये है की चीन अधिकतर वही चीज़े बनता है जो बाजार में पहले से ही बिक रही है, याने पहले से ही बन चुके है. जिसके कारन उसे सिर्फ उत्पादन बनाने का खर्च ही उठाना पड़ता है. दूसरी वजह ये की चीन के पास बौध्दिक सम्पदा का अभाव है. पूरी दुनिया जानती है की चीन अधिकतम चीजों की नक़ल बनाने में जुटा रहता है. चीन की आदत है किसी भी चीज़ की नक़ल बना कर उसे बाज़ार में बेचना. और इसलिए चीन को उत्पादन करते वक़्त कम मुसीबतो का सामना करना पड़ता है और पैसे भी कम लग जाते है.

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ज्यादा से ज्यादा उत्पदन करने के लिए और उसे बेचने के लिए उत्पादनों को सस्ता करना पड़ता है. और उन्हें सस्ता करने के लिए चीजों का भारी मात्रा में उत्पादन जरुरी है. भारी मात्रा में उत्पादन होने की वजह से उसका उत्पादन शुल्क कम हो जाता है. पूरा चीन डंपिंग रणनिति का इस्तेमाल करता है. जिसका मतलब यह है की चीनी व्यापारी अपने उत्पादन दुसरे देशो में निर्यात करते है. और उनका भाव सबसे कम रखते है. जिससे उनकी बिक्री में तेजी आती है. इस डंपिंग का मतलब है मार्किट पर कब्ज़ा करना या मार्किट को तोडना. चीन में बनाये उत्पादनों की कीमत स्थानीय मार्किट से भी कम होती है. इस मार्किट की चीजों की बिक्री कम हो जाती है. चीन को मार्किट को तोडना बहुत अच्छी तरह आता है.

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अब हमे इस बात पर गौर करना जरुरी है की भारत को ऐसे कोंसे बदलाव लाने जरुरी है जिनसे वह चीनी उत्पादनों को बाज़ार में टक्कर दे सके. भारत को कोई परियोजना बनानी होगी जिससे वह इन सब खामियों को पूरा कर सके. देश के बड़े अर्थशास्त्रियों का कहना है की हमे अपने नियमो में कुछ बदलाव करना जरुरी है, जिससे उत्पदंकर्ताओ को आसानी होगी. उत्पादन क्षेत्र और कृषि क्षेत्र में सुधर लाने होंगे. देश के श्रमिको को कुशल बनाना होगा. उसे नयी तकनीकोसे वाकिफ कराना होगा. निर्यात व्यवस्था में सुधर लाने होंगे. और सबसे अहम् काम यह है की हमे उनके उत्पादन खरीदना टालना होगा. जिससे उनकी बिक्री में गिराव आयेगा. इन सब से ही हम चीनी उत्पादनों को अपने बाजार से बहार कर सकते है और भारतीय उप्तापदो को नया मौका दे सकते है.