Home एजुकेशन इस हैरान करने वाली वजह के कारन भारत वापस नहीं लेता POK

इस हैरान करने वाली वजह के कारन भारत वापस नहीं लेता POK

SHARE

 

आज भारत और पकिस्तान के बिच चल रहा कश्मीर सीमा विवाद बहुत बड़ा विषय है सारे देश और दुनिया के लिए भी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है की आखिर भारत ने पकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस क्यों नहीं लिया.

Related image

पाकिस्तान आज तक भारत से कोई भी लड़ाई नहीं जित पाया है. १९६५ और १९७१ की लड़ाई में पाकिस्तान ने अपने आप को भारत के सामने आत्मसमर्पित कर दिया था. और १९४८ और १९९८ की लड़ायी पकिस्तान हार गया था. इससे यह बात साफ़ थी के भारत के पास साफ़ वर्चस्व था. लेकिन फिर भी भारत ने पकिस्तान अधिकृत कश्मीर के इस हिस्से को भारत में वापस नहीं लिया. इसकी कई वजह रही है. इन अनेक वजाहो के कारन भारत ने कभी इस पकिस्तान अधिकृत कश्मिर पर अपना हक़ बताया नहीं और ना ही कश्मीर को वापस लिया नहीं है. कश्मीर के इस हिस्से पर भारत का कभी भी नियंत्रण नहीं था. १९४७ में आज़ादी के बाद कश्मीर उस वक़्त एक आज़ाद देश की तरह था. १९४७ के अंत में पकिस्तान ने कश्मीर पर हमला बोल दिया.

Related image

पाकिस्तान के इस हमले बाद कश्मीर के तत्कालीन राजा हरी सिंह ने कश्मीर का भारत में विलय कर दिया. उनका उद्देश्य था कश्मीर को पाकिस्तान से बचाना. इसपर भारत ने अपनी सेना भेज कर पकिस्तान की फ़ौज को हराया. इस लड़ाई में भारत ने कश्मीर के २/३ हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया. और १/३ हिस्से पर पाकिस्तान का कब्ज़ा हो गया. इस १/३ हिस्से को ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहा जाता है. इस लड़ाई के बाद यह विवाद यु एन में चला गया. यु एन फैसला दिया की जो जहा है वही रहे. जिसका मतलब ये था की यदि भारत के पास २/३ हिस्सा है और पकिस्तान के पास १/३ हिस्सा, तो दोनों इसी में समाधान कर ले और आगे न बढे. यु एन के इस फैसले के बाद भारत ने अपनी सेना को आगे नहीं बढाया.

Related image

भारत कश्मीर पर अपना अधिकार बताता है क्योंकि कश्मीर के राजा हरी सिंह ने उसका विलय भारत में किया था. और पकिस्तान कश्मीर पर अधिकार इसलिए बताता है की वह की अधिकतर जनसँख्या मुसलमान है. दोनों देशो का बटवारा धर्म के मुद्दे पर हुआ था इसलिए देश का मुसलमान हिस्सा पकिस्तान अपनी तरफ कहता है. अगर कश्मीर के नक़्शे को ध्यान में लिया जाये तो भारत के कब्जे में मौजूद इलाके का ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी है और पकिस्तान के पास मौजूद इलाके का ज्यादातर हिस्सा जमीनी है. इसलिए अगर भारत हमला करना चाहे तो काफी मुश्किलें आ जाती है. क्योंकि पहाड़ी इअलको में लडाई करना सभी स्तर पर एक मुश्किल काम है. लेकिन भारत यह कर सकता है. १९४८ में भी भारत ने पकिस्तान से सियाचिन को छिन लिया था.

Related image

यहाँ मौजूद लोगो से पकिस्तान को सहयोग मिलने की वजह से भारत को मुश्किल हो रही है. इन लोगो ने कभी नहीं सोचा है पकिस्तान से बेहतर जिंदगी उन्हें भारत में मिल सकती है. यह सिर्फ धर्म की राजनीती हो रही है. आज़ाद कश्मीर में लड रहे जनरल थिमाया ने १९४८ में पंडित जवाहरलाल नेहरु से बार बार याचना की थी उन्हें ३ हफ्ते का समय दिया जाये और इस ३ हफ्ते के समय में वे कश्मीर के हालातो को अपने काबू में कर लेंगे. लेकिन पंडित नेहरु ने उनकी एक न सुनी. पंडित नेहरु भारत को यु एन में शामिल कराना चाहते थे और इसी जल्दबाजी में भारत का नुकसान हो गया. १९६५, १९७१ और १९८४ में भी पकिस्तान को वापस लिया जा सकता था लेकिन तब तक सारे हालात बदल चुके थे.

Image result for kashmir terrorism

अगर कश्मीर की कुल जनसँख्या को ध्यान में लिया जाये तो यहाँ की करीब सारी जनता मुसलमान है. यह लोग धर्म के नाम पर पकिस्तान का सहयोग कर रहे है.भारत के लिए कश्मीर को वापस लेने से भी ज्यादा मुश्किल था उस इलाके को भारत में शामिल कराना. भारत से नफरत करने वाले लोग और आतंकी संघटन का प्रभाव इस इलाके में बहुत बढ़ चूका था. इसलिए तत्कालीन नेताओ ने यह सोचा की उनके द्वारा कब्ज़ा किये गए कश्मीर के इलाके को भारत में वापस ना लेना ही उचित होगा. और यह फैसला काफी हद तक सही भी साबित हो चूका है. कश्मीर जैसे इलाके में कोई भी इन्फ्रास्ट्रकचर बनाना बहुत ही मुश्किल है. यहाँ पर औद्योगिक बदलाव भी मुमकिन नहीं है. यहां पर कुछ हद तक पर्यटन क्षेत्र के रूप में सजोया जा सकता है.

लेकिन यहाँ कोई उद्योग कर पाना मुमकिन नहीं है. भारत को कश्मीर के इस हिस्से को वापस लेने के लिए भारी मात्र में खर्च करना होगा. यहाँ की ज्यादातर जनसँख्या भारत के खिलाफ है और पाकिस्तान के पक्ष में है जिस कारन इसे काबू में रखने के लिए भारत को बड़ी मात्रा में ताकत लगनी होगी. और पकिस्तान भौगोलिक स्तर पर फायदे में है और इस बात का वह पूरा लाभ उठाएगा. भारत ने पकिस्तान के साथ अपनी सीमा पर बाड़ बना ली है. यदि इस हिस्से को भारत में लाया जाये तो बाड़ की सीमा बढ़नी होगी, जो एक बहुत ही बड़ी लगत का काम होगा. एक और वजह ये है की cpec के अंतर्गत चीन ने पाकिस्तान में भरी मात्रा में निवेश किया है और इसका रास्ता इसी सीमा से गुजरता है.

Related image

यदि भारत पकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत में लेकर बाड़ बनता है तो चीन का यह रास्ता बंद हो जायेगा और इससे चीन के साथ प्रतिकूल हालात निर्माण हो सकते है. .बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी इस इलाके से भारत को नुक्सान बहुत ज्यादा होगा. फायदा होने की सम्भावना बहुत कम है. पकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत में वापस ना ले कर हम बहुत सार संसाधनों की बचत कर रहे है.इस इलाके में आतंकवादियों के प्रशिक्षण कैंप और चौकिय भी बड़ी मात्रा में है. जो इस इलाके के साथ ही भारत में आ जाएँगी. जिससे भारत में आतंकवाद को बुलावा मिल जायेगा. भारत की सीमा अभी अफगानिस्तान से नहीं लगती है, किन्तु अगर यह इलाका भारत में आ जाये तो अफगानिस्तान की यह सीमा भारत से लग जाएगी.

Related image

ऐसे में अफगानिस्तान में फैला आतंवाद भारत तक पहुँच जायेगा. अफगानिस्तान में ईसिस और तालिबान जैसी खतरनाक आतंकवादी संघटनए बड़े पैमाने पर काम कर रही है. आज की घडी में भारत अपनी अर्थव्यवस्था के कुल १०% खर्च कश्मीर पर कर रह है, जहा भारत की कुल जनसँख्या के १% लोग भी वास नहीं करते. और कश्मीर का क्षेत्रफल भारत के कुल क्षेत्रफल के केवल १.५% है. यह आकडे इस बात की गवाही है की भारत को अपनी तरक्की के लिए अपना ध्यान कश्मीर से हटा कर बाकि देश पर देना जरुरी है और बारात ऐसा ही कर रहा है. इन सब वह वजहों से भारत आज कश्मीर के शेष १/३ हिस्से पर कब्ज़ा नहीं कर रहा है और उसपर अपने संधान और ताकत खर्च नहीं करना चाहता. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत में लाने के नतीजो से भारत पूरी तरह वाकिफ है.