Home देश इस हैरान करने वाली वजह के कारन India-Pak में जल्द ही भीड़...

इस हैरान करने वाली वजह के कारन India-Pak में जल्द ही भीड़ सकता है युद्ध

SHARE

 

भारत और पकिस्तान के बिच तनाव अब बढ़ रहा है. इस बढ़ते तनाव की वजह है दोनों देशो में सीमा पर स्थित पानी के इस्तेमाल और हक्क के लिए लड़ाई की संभावना है.

Related image

पकिस्तान और भारत के बिच पिछले ६० सालो से भी ज्यादा तनाव बना हुआ है. इस तनाव की वजह है भारत और पकिस्तान की सीमा. पकिस्तान हमेशा से ही भारत स्थित कश्मीर पर अपना हक़ जमाने की कोशिशो में लगा हुआ है. दोनों देशो के सैन्य सीमा पर सारा समय तैनात है. पाकिस्तानी आतंकवादी भी कश्मीर में घुसपैट कर रहे है. आये दिन कश्मीर में कोई ना कोई हड़बड़ी हो रही है. भारत ने कई बार पकिस्तान को शांति प्रस्ताव भी भेजे है लेकिन पकिस्तान ने कभी भी पर्याप्त सहयोग नहीं किया है. पकिस्तान ने हमेशा ही हिंसा का मार्ग चुना है. आतंकवाद का विस्तार पकिस्तान में बहुत बड़ी मात्रा में हो रहा है. दुनिया के अनेक देशो ने पकिस्तान को चेतावनी डी है की वह आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाये लेकिन इस देश से कोई आशावादी कार्यवाही नही हुई है.

Image result for भारत पाकिस्तान सीमा

देश में बढ़ रहे आतंकवाद को पकिस्तान अब सीमा पर भी इस्तेमाल कर रहा है. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पकिस्तान ने इन आतंकियों को सीमा पर चल रही गतिविधियों में इस्तेमाल किया है. इस सब के चलते दोनों देशो में चल रहे इस विवाद के सुलाजने की संभावनाए कम होती जा रही है. सीमा विवाद के बाद अब एक नयी वजह बन गयी है दोनों देशो में टक्कर के लिए. भारत और पकिस्तान की जनसंख्या लगातार और तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में पानी की बढती मांग ज़ाहिर है. दोनों देशो में बढ़ रहे प्रदुषण के साथ मौजूदा जल स्त्रोत प्रदूषित हो रहे है. पिने योग्य पानी की मात्रा घटती जा रही है. आनेवाले सालो में पानी की समस्या दोनों ही देशो में गंभीर रूप ले सकती है.

Image result for भारत पाकिस्तान सिंधु

दोनों देशों के बीच 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था. इस समजौते के तहत भारत के पास व्यास, रावी और सतलुज और पाकिस्तान के पास सिंधु, चेनाब और झेलम नदी के पानी के इस्तेमाल का अधिकार है. लेकिन इनमे से ज्यादातर नदियां भारत से होकर गुजरती हैं. ऐसे में पाकिस्तान को डर सता रहा है कि भारत कहीं उसके जलस्रोत पर रोक न लगा दे. और इसी डर की वजह से पाक के भारत से भिड़ने के लक्षण है. भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर के विवादित क्षेत्र में हजारों की संख्या में मजदूर दिन रात हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट्स की खुदाई के लिए लगे हुए है. यह वह इलाका है जहां भारतीय उपमहाद्वीप में ताजे पानी के संकट से निपटने के लिए भारत और पाकिस्तान में ज्यादा से ज्यादा जल का रुख अपनी ओर मोड़ने की जैसे प्रतियोगिता जारी है.

Image result for India और Pakistan पानी तनाव

दोनों देश यहां नीलम या किशनगंगा नदी पर बड़े से बड़े पावर प्लांट्स स्थापित करने में जुटे हुए है. लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनों ओर दो प्रॉजेक्ट्स पूरे होने वाले हैं. दोनों ही देश नीलम नदी का अधिकतम पानी चाहते है. इसलिए नीलम नदी पर दोनों देशो के बीच में पानी को हथियाने को लेकर तनाव चल रहा है. भारत व पाकिस्तान दोनों ही विकासशील अर्थव्यवस्था में आते है. ऐसे में बढ़ती आबादी के चलते इन्हें अधिक मात्रा में जल की आवश्यकता है. इसी के लिए भारत व पाकिस्तान ने नीलम नदी के तट पर अपने-अपने प्रोजेक्ट चालू कर रखे है. पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में चिंता जताई थी कि पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति नहीं होने से पाकिस्तान की खाद्य आपूर्ति व दीर्घकालिक विकास के लिए कड़ी मुसीबत उत्पन्न हो सकती है. नीलम नदी का पानी अंतत: सिन्धु नदी से जाकर मिलता है.

Image result for भारत पाकिस्तान सिंधु

सिन्धु एशिया की सबसे लंबी नदी है. और सिन्धु नदी दोनों देशों की संवेदनशील सीमाओं को तय करने का काम भी करती है. बढ़ती जनसंख्या के कारण दोनों देशों में जन संसाधनों में कमी आ रही है और दोनों देश ताजे पानी पर नियंत्रण बनाए रखने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं. किशनगंगा कहलाने वाली नीलम नदी तिब्बत से निकलकर कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान जाती है. पाक के पंजाब प्रांत के साथ ही कुछ अन्य बड़े हिस्से की पानी की जरूरत इसी नदी के पानी से पूरी होती है. अगर इन प्रोजेक्ट्स का काम इसी तरह से चलता रहा तो ये मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच में तनाव की स्थिति उत्पन्न कर सकता है. इसका सबसे ज्यादा डर पाकिस्तान को है. क्योंकि भारत में पानी की बढ़ती जरूरतों की वजह से इस नदी पर बन रहे पकिस्तान के प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं.

Related image

पानी को लेकर यह विवाद दोनों देशों के बीच में आजादी के समय से ही चला आ रहा है. अब सीमा क्षेत्र में चल रहे इन प्रोजेक्ट्स को लेकर दोनों देशों ने ही बड़े ही जोरो-शोरो से काम शुरू कर दिया है. दोनों देशो के बीच में नीलम नदी के पानी को कब्जाने के लिए संघर्ष जारी है, जो की आने वाले दिनों में जंग का रूप ले सकता है. इस विषय को लेकर पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि पानी के संकट के चलते भविष्य में पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा और लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए मुसीबत पैदा हो सकती है. और इसी लिए पकिस्तान ज्यादा से ज्यादा पानी पर अपना हक़ बना लेना चाहता है ताकि आनेवाली समस्या पर रोक लगाया जा सके.

Image result for जवाहरलाल नेहरू अयूब खान

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है की ”नदियों और सीमा जैसी किसी संधि पर पुनर्विचार या उसे ख़त्म करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्षों के बीच परस्पर सहयोग और विश्वास होना चाहिए.” साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि संधि की प्रस्तावना में यह कहा गया है कि यह ‘सद्भावना’ पर आधारित है. उनसे पुचा गया था की कि दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्या सरकार सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार करेगी. उन्होंने कहा है की कूटनीति में सब कुछ बयां नहीं किया जाता और उन्होंने यह नहीं कहा कि यह संधि काम नहीं कर रही है भारत के तत्कालीन. प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान द्वारा सितंबर 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर किये गए थे.