Home विदेश ईरान पर ट्रम्प ने लिया ये बड़ा फैसला, भारत को भुगतना पड़ेगा...

ईरान पर ट्रम्प ने लिया ये बड़ा फैसला, भारत को भुगतना पड़ेगा ये खामियाजा

SHARE

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने परमाणु समझौते को तोड़ने का निर्णय लिया है.अमेरिका के इस निर्णय के कारण अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में भी बदलाव आ गया है.कई देशो के साथ भारत पर भी इसका असर पड़ेगा. ईरान पर लगे सेंक्शन के कारण भी अब भारत और इरान के बिच समझोते पर इसका बदलाव देखने मिलेगा.

अमेरिका और ईरान के बिच हुए परमाणु समझौते को ख़त्म करने की आशंका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जताई थी.२०१५ में हुए समझौते को तोड़ देना का निर्णय अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प का था.लेकिन ईरान परमाणु समझौते को नहीं तोड़ने की चेतावनी दे रहा था.अगर अमेरिका परमाणु समझौता बंद करता है तो ईरान भी तेजी से प्रतिक्रिया देगा.लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना फैसला सुना दिया है.आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने २०१५ में परमाणु समझौते को तोड़ देने का निर्णय ले लिया,जिसकी सारे दुनिया को एक तरफ आशंका थी.ट्रम्प ने वाइट हाउस में हमला बोलते हुए अपना फैसला सुनाया.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा २०१५  में हुई यह डील पिछले सरकार की एक भूल है.क्योंकि ट्रम्प का कहना है की यह आंतंकवाद का समर्थन करती है.साथ ही ट्रम्प ने कहा की अपने सहयोगी देशों से बात कर इरान  के सेंक्शन के बारे में  विचार करेगा.

रिपोर्ट के सुन्त्रो का कहना है की ट्रम्प के इस फैसले से न मध्य पूर्व में इसका असर पडेगा ,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में भी तनाव बढेगा.हलाखी भारत ने ट्रम्प के इस नए फैसले में कुछ नहीं कहा लेकिन ईरान के दिल्ली से जुड़े कुछ सबंधो पर विपरीत परिणाम होगा.ट्रम्प के इस फैसले से ग्लोबल मार्केट में तेजी से बदलाव देखने को मिल सकते है. भारत में ऑइल इम्पोर्ट के मामले में सऊदी अरब और इराक के बाद इरान ही आता है .२०१६ में भारत के लिए इरान ही बड़ा सप्लायर था.इस निर्णय के बाद ईरान में तेल के भाव बढ़ जायेंगे और इसका सीधा असर कई देशों के साथ भारत पर भी बढेगा.इसके साथ तेल के भाव बढ़ने से सारे देशों के साथ महंगाई भी बढ़ जाएगी जिसके साथ इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पडेगा.

ईरान के बढे नए प्रतिबंधो के कारण भी दोनों देशो के व्यापार पर भी असर पड़ेगा.भारत पिछले साल पकिस्तान के साथ शांघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन का मेम्बर बना था.इस साल चीन ने कहा की वे ईरान को भी शामिल करने की योजना बना रहे है.चीन और रूस दोनों देश ये काम कर रहे है.अगर शांघाई ऑर्गनाइजेशन इस प्रपोजल को स्वीकार करता है तो भारत भी इसमें शामिल हो जाएगा जो एंटी अमेरिका के तरह दीखता है.ट्रम्प के  फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है. अगर आसान शब्दों में समझें तो भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा रकम चुकानी होगी. लिहाजा घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल ज्यादा महंगे हो जाएंगे. ऐसे में पेट्रोल-डीजल खरीदने के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.जिससे अर्थव्यवस्था पर बोज बढेगा.

अंतरराष्‍ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आने पर तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ेंगी. जहां डीजल के दाम बढ़ने से मालढुलाई महंगी हो जाएगी. वहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट की लागत भी बढ़ेगी. इससे फल, सब्‍जी और राशन आदि की कीमतों में तेजी आएगी. इसके अलावा हवाई ईंधन एटीएफ (एयर टर्बाइन फ्यूल) महंगा होने से किराया बढ़ सकता है.भारत क्रूड का बड़ा इंपोर्टर देश है और अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है. ऐसे में क्रूड ऑयल महंगा होता है तो इंपोर्ट बिल के रूप में सरकार को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है. ऑयल इंपोर्ट महंगा होने से देश के सरकारी खजाने पर असर होगा.भारत क्रूड का बड़ा इंपोर्टर देश है और अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है. ऐसे में क्रूड ऑयल महंगा होता है तो इंपोर्ट बिल के रूप में सरकार को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है. ऑयल इंपोर्ट महंगा होने से देश के सरकारी खजाने पर असर होगा.

ईरान के साथ ओमान सागर में भारत चाबहार बंदरगाह को खड़ा कर रहा है, जो कम समय में अफगानिस्तान के साथ व्यापार करने और स्ट्रैटजिक पॉलिटिक्स के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है अब अमेरिका अगर ईरान पर सेंक्शन लगाएगा तो चाबहार प्रोजेक्ट पर चल रहा काम धीमा पड़ेगा. पिछले साल भारत ने अपने चाबहार पोर्ट से 1.1 मिलियन टन गेहूं भेजा था, तब उस वक्त अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने अपना उदार रवैया अपनाते हुए कहा था कि हमारा टार्गेट ईरान की सरकार है, वहां के लोग नहीं. टिलरसन के जाने के बाद अब व्हाइट हाउस में पोंपेयो आए हैं, जो ईरान के खिलाफ बहुत ही कठोर निर्णय लेने की पहले से ही बात कह चुके हैं और इसका परिणाम भी दिख गया है. साथ ही यह भी डर है कि अगर चाबहार प्रोजेक्ट इससे प्रभावित हुआ तो रूहानी सरकार चीन और पाकिस्तान को इसमें शामिल कर सकता है, जो भारत बिल्कुल नहीं चाहता.

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया था कि क्रूड ऑयल की कीमतें फाइनेंशियल ईयर 2019 में 12 फीसदी तक बढ़ सकती हैं. अगर ऐसा होता है कि देश की इकोनॉमी पर इसका असर दिखेगा. सर्वे के अनुसार कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोत्तरी से जीडीपी 0.3 फीसदी तक गिर सकती है, वहीं महंगाई दर भी 1.7 फीसदी ऊंची हो सकती है.समझौते पर दस्तख़त करने वाले ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने राष्ट्रपति ट्रंप से इस समझौते से अलग न होने की अपील की थी.इन देशों ने ये संकेत भी दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहे जो भी फ़ैसला करें, वे ईरान के साथ हुए तीन साल पुराने समझौते पर कायम रहेंगे. ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी कह चुके हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौता खत्म किया तो अमरीका को ऐतिहासिक रूप से पछताना होगा.