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एक्शन में आया ये अरब देश महिलाओं को लेकर लिया, ये बड़ा फैसला

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सऊदी महिलाओं को देश में अब तक सबसे अधिक स्वतंत्रता प्रदान की गयी है.यह परिवर्तन सरकार की विजन 2030 के तहत आते हैं, जो महिलाओं को अर्थव्यवस्था में अधिक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही 2030 तक महिला कर्मचारियों की संख्या में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का लक्ष्य है.

सऊदी अरब में आज के तंत्रंज्ञान के दुनिया में भी महिलाओं पर कड़े नियम है.आज भी वहा के महिलाओं को स्वतंत्रता नहीं मिलती .२१ वी सदी में भी महिलाये घर से बाहर निकल नहीं सकती.वहा आज भी  महिलाओं के लिए  रुढ़िवादी और सख्त कानून लगे है.लेकिन पिछले कुछ समय से महिलाओं के कानून में बदलाव नजर आ रहे है.जिससे अब वहा के महिलाओं के लिए चैन की राहत मिली.सऊदी अरब में पिछले कुछ समय से बदलाव देखा जा रहा है,  हर रोज नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं, महिलाओं को अनेकों अधिकार दिए जा रहे हैं, एक समय ऐसा भी था जब अन्य देशों के लोगों द्वारा कहा जाता था की सऊदी अरब में महिलाओं को बस नियम-कानूनों के तहत रहना पड़ता है लेकिन आज की स्थिति बदल चुकी है.

सऊदी अरब ने महिलाओं को कई अधिकारों से रूबरू करवाया, कई ऐसे अधिकार महिलाओं को दिये गए है जिनके वो योग्य हैं और वह दिन दूर नहीं जब लेकर क्षेत्र में सऊदी पुरुषों से ज्यादा महिलाएं होंगी.महिलाओं को अब नौकरी करने का अवसर मिलता है. सऊदी सरकार भी अब कई क्षेत्रों में पुरुषों की जगह महिलाओं को काम दे रही है, क्योंकि सऊदी अरब भी चाहता है की सऊदी महिलाएं आगे आये और सऊदी महिलाओं का भी विश्व भर में नाम हो.पिछले साल सऊदी अरब में महिलाओं के हित में देश में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया,सऊदी अरब फैसला यह था की सऊदी अरब में अरब महिलाएं भी गाड़ी चला सकती हैं, जिसके बाद से देश में महिलाएं ड्राइविंग क्लासेज जाने लग गयी और सऊदी अरब भी महिलाओं के लिए नित प्रतिदिन शौगात देता रहता है.

जून में महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति देने वाले शाही डिक्री के कार्यान्वयन कीतैयारी में मंगलवार को महिलाओं के लिए देश में पहला ऑटो बीमा क्लेम सेंटर खोला गया.अल-मदीना रोड में खोले गए इस ब्रांच का उद्घाटन सलमा इन्सुरेंस के अधिकारीयों द्वारा किया गया.सऊदी गैजेट के अनुसार यह बीमा केंद्र फीमेल स्टाफ द्वारा चलाया जाएगा और इसका लक्ष्य महिलाओं को ड्राइविंग करने के लिए और कार ओनर्स को समर्थन देना है.सलामा उमर अल-अजलानी के सीईओ ने कहा, “हमें कॉल सेंटर, सेल सेंटर, कंप्लें सेंटर में सऊदी महिलाओं को रोजगार देने पर गर्व है.” उन्होंने कहा की “इन केंद्र का उद्देश्य उन नए ग्राहकों का समर्थन करना है जो नए अनुभव से गुज़र रहे हैं.”उन्होंने कहा, “बैंकों और टेलिकॉम कंपनियों में कई सालों से फीमेल स्टाफ था लेकिन यह देश में पहली बार है की इन्सुरेंस कंपनियों में महिलाओं को जगह दी जा रही है.”

सलामा उमर अल-अजलानी के सीईओ ने कहा की “यह इन्सुरेंस सेंटर कई प्रकार के बीमा पैकेज प्रदान करेगा.”सलामा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अम्मर घोरब के अनुसार वर्तमान में इसमें 10 महिला कर्मचारी हैं और अभी इस विभाग में महिलाओं की भर्ती की योजना की जा रही है.सऊदी गैजेट के अनुसार बीमा क्षेत्र में छह साल से काम कर रही मिरवत हलावानी महिला शाखा का नेतृत्व करेंगी. उन्होंने कहा की “कार दुर्घटनाओं के क्लेम और इन्सुरेंस तभी प्रभावी होंगे जब महिलाएं गाड़ी चलाएंगी.”हलवानी ने कहा की “हम कार बीमा और बीमा के प्रकार के महत्व पर जागरूकता बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. हम महिला ग्राहकों को मार्गदर्शन करने के लिए परामर्श और ब्रोशर भी पेश कर रहे हैं.” उन्होंने कहा की “बीमा के लिए महिलाएं फीमेल ब्रांच में जाने में ज्यादा अच्छा महसूस करेंगी”

शॉपिंग मॉल में महिलाओं को पुरूषों के साथ कपडो की खरीददारी करने पर कई प्रतिबंध लगाए हुए है. इसके अलावा अन्य प्रतिबंधों में महिलाएं बिना सेंसर वाली फैशन पत्रिका को भी नहीं पढ़ सकती है.लेकिन अब सऊदी अरब कट्टरपंथी से आधुनिकता की तरफ बढ़ रहा है. इसमें मुख्य योगदान सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का है.अब सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति सुधर रही है. इसका श्रेय सऊदी के वर्तमान क्राउन प्रिंस को जाता है.मई 2017 में महिला कार्यकर्ताओं ने एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जीत हासिल की। किंग सलमान ने आदेश जारी करते हुआ कहा कि महिलाओं को विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने, नौकरी लेने और शल्य चिकित्सा से गुजरना सहित कुछ गतिविधियों के लिए अपने पुरुष संरक्षक से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है. सोशल मीडिया पर भी इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है.

सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर किंग सलमान बिन अब्दुल-अजीज के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद, कारों को चलाने के लिए महिलाओं पर प्रतिबंध उठाने की घोषणा की है, जो जून में प्रभावी होगा. शाही हुक्म ने सऊदी महिलाओं के लिए आरक्षण भी दिया जो वरिष्ठ विद्वानों के परिषद के सदस्यों के बहुमत से सहमत हैं. इस संबंध में फैसले स्पष्ट रूप से स्वीकार्यता दर्शाते हैं, इसमें पिछले कुछ आरक्षण के मुद्दों ने संबंधित विचारों पर आधारित थे न तो पुष्टि की गई और न ही इनकार किया. वरिष्ठ विद्वानों के सदस्यों को महिलाओं द्वारा एड्मिनिसट्रेशन को चलाने के मुद्दे पर कोई बाधा नहीं है, जब तक कि उन विचारों से बचने के लिए पर्याप्त वैध और सुसंगत गारंटी है, भले ही संदिग्ध संभावना के दायरे में हो.पिछले बारह महीनो से अब बदलाव नजर आ रहे है जो महिलाओं के लिए नयी जिन्दगी है.