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एससीओ समिट में PM मोदी ने लिया ये जबरदस्त फैसला, चीन को लगा जोर का झटका

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भारत ने एक बार फिर वन बेल्ट वन रोड परियोजना को लेकर चीन को झटका दिया है. शंघाई सहयोग संगठन के आठ देशों में भारत अकेला ऐसा देश रहा जिसने चीन की महत्वाकांक्षी योजना का विरोध किया. दो दिन के सम्मेलन के बाद जारी घोषणापत्र में मोदी समेत सभी सदस्य देशों के प्रमुखों के हस्ताक्षर तो है लेकिन चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ के समर्थन में केवल पाकिस्तान,कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान, रूस, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान ने ही अपनी सहमति दी है.

बता दे की भारत और चीन के बीच आपसी रिश्ते पिछले कुछ दिनों से नई ऊंचाईयों पर पहुंचे है. इसी का नतीजा है कि ‘शंघाई सहयोग संगठन’ की बैठक के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी की शी जिनपिंग के साथ इस साल दूसरी मुलाकात हुई है. पीएम मोदी और शी जिनपिंग कई द्विपक्षीय मुद्दों पर आपसी सहमति के आधार पर करार किए है. इस समझौते से दोनो देशों के बीच व्यापारिक और सामरिक क्षेत्रों मे काफी महत्वपूर्ण बदलाव आयेगें. दरअसल ‘एससीओ’ एक आर्थिक और सैन्य सहयोग मंच है, जिसमें मध्य एशिया के बड़े देश शामिल है. इस संगठन की जरिए आपसी व्यापार को बढ़ाने के तौर-तरीकों पर विस्तार से चर्चा होती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि बड़ी संपर्क सुविधा परियोजनाओं में सदस्य देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि समावेशिता सुनिश्चित करने वाली सभी पहलों के लिए भारत की ओर से पूरा सहयोग मिलेगा.

जानकारी के मुताबिक़ जहां तक भारत की बात है तो उसे पिछले साल ही एससीओ मे सदस्यता मिली है और इस एससीओ समिट मे भारत और पाकिस्तान पहली बार एक-दूसरे से मिल रहे है. हालांकि पाकिस्तान को लेकर भारत की चिंताए पहले की ही तरह बरकरार है. अब ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’ को लेकर एससीओ समिट मेे कुछ ऐसा हुआ जिसकी कम से कम चीन को उम्मीद नही रही होगी. प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए किसी भी देश की संप्रभुता और अंखडता को ताक पर नही रखा जाना चाहिए. भारत का इशारा साफ है वह नही चाहता कि POK मे चीन OBOR परियोजना के तहत कोई भी निर्माण कार्य करे. ‘वन बेल्ट वन रोड’ चीन की महात्वाकांक्षी परियोजना है जिसके अंतर्गत चीन कई ऐशियाई देशों के साथ मिलकर एक कोरिडोर का निर्माण कर रहा जिससे इन देशों के साथ आपसी व्यापार मे तेजी आएगी.

इस परियोजना का एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) से भी गुजरता है. इसका भारत कड़ा विरोध करता आ रहा है. इस मामले मेे भारत का कहना है कि POK भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहां ऐसा कोई कार्य उसकी इजाजत के बिना नही हो सकता है. चीन ने इस परियोजना की रुपरेखा २०१३ मेे प्रस्तुत किया था. इसके अंतर्गत सेंट्रल एशिया, गल्फ रीजन, दक्षिण पूर्वी एशिया, अफ्रीका और यूरोप को रोड और समुद्री मार्ग से जोड़ना है. शी चिनफिंग पहले ही कह चुके है कि चीन इस प्रॉजेक्ट में १२६ अरब डॉलर का निवेश कर सकता है. इससे ये बात साफ़ होती है की भारत ने ‘वन बेल्ट वन रोड’ के बहाने से चीन को बड़ा ही ज़ोर का झटका दिया है और ये भी साबित हो गया की भारत आज के दिन एक बहोत बड़ा देश बन कर उभर कर आया है.