Home देश कांग्रेस की इस घिनौनी कर्तुद से उनके विधायक ही है, उनसे नाराज

कांग्रेस की इस घिनौनी कर्तुद से उनके विधायक ही है, उनसे नाराज

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कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस ने टूट से बचने के लिए भले ही अपने विधायकों को हैदराबाद भेज दिया है.लेकिन इसके बावजूद भी क्या कांग्रेस का कुनबा कितना एकजुट रह सकता है.उसको लेकर कांग्रेस को बड़ी परेशानी हो रही है.जिस तरह कांग्रेस के विधायक असंतुष्ट है इसके कारण ये संभावना इंकार नहीं कर सकते की आने वाले दिनों में पार्टी में किसी टूट हो सकती है.

निवर्तमान विधानसभा के स्पीकर केबी कोलीवाड ने एक न्यूज़ चैनल से बात करते समय कहा की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से पार्टी के सभी विधायक खुश नहीं हैं.उनका ये कहना है की जीडीएस और कांग्रेस विधायक चुनाव के दौरान एक-दुसरे के खिलाफ लडे थे. ऐसे में नई सरकार बनाने के लिए बना गठबंधन उन्हें रास नहीं आ रहा है. उनका वैसे तो यह दावा है कि सभी विधायक और कार्यकर्ता इस नए गठबंधन के पक्ष में हैं, लेकिन अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि दोनों दलों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. असंतोष सुलग रहा है और बीजेपी तो इसी ताक में है कि बागियों को अपने साथ जोड़कर सरकार बना ली जाए. कांग्रेस में घबराहट ज्यादा है क्योंकि पहले ही उसके कई एमएलए लापता हैं.केबी कोलिवाड ने कहा कि कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों की मीटिंग के दौरान काफी मतभेद सामने आए और पार्टी अपने विधायक दल का नेता भी नहीं चुन पाई.इतना ही नहीं कोलिवाड ने तो कर्नाटक में कांग्रेस को मिली हार का ठीकरा भी पूर्व सीएम सिद्धारमैया के सिर फोड़ दिया.

बकौल कोलिवाड सिद्धारमैया मनमानी करते हैं. उन्होंने पार्टी को नष्ट कर दिया है. वो पार्टी के तानाशाह बन गए हैं. हाईकमान की बात नहीं मानने वाले सिद्धारमैया ही ४० से ज्यादा सीटों पर हार के लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि देश भर में मिली हार से कांग्रेस हाईकमान कमजोर हुआ है, जिसका फायदा सिद्धारमैया ने उठाया है. कोलिवाड ने टूक कहा कि ऐसी भावना रखने वाले वो अकेले नहीं हैं, बहुत से विधायक इस गठजोड़ से खुश नहीं हैं, लेकिन वे हाईकमान की वजह से चुप हैं.इस बीच खबर ये भी है कि जेडीएस से गठबंधन करने की वजह से भी पार्टी के करीब १६ लिंगायत विधायक भी नाराज हैं. जिनमें से कई के बीजेपी से संपर्क किए जाने की खबर सामने आई है. इन विधायकों का कहना है कि उनके समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के सिद्धारमैया के फैसले से उन्हें जीत तो मिल गई, लेकिन वोक्कालिगा आधार वाले जेडीएस से गठबंधन करने से वे नाराज हैं. ऐसे कांग्रेस के लिए अपना कुनबा बचाना किसी चनौती से कम नहीं होगा.