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कांग्रेस को लेकर PM मोदी और शाह आये एक्शन में, बनाया ये नया प्लान

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देश में अभी महागठबंधन दिखाई दे रहा है.इस महागठबंधन में सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद जैसे दल शामिल है.इन सभी दलों को पीछे छोड़ने लिए भाजपा जल्द ही पूरे सूबे में -मिशन ५०- अभियान शुरू करने वाला है.इस अभियान में बीजेपी पार्टी लोकसभा में मिले करीब ४३ सदी मतों को ५० फीसदी तक पहुंचाने के कोशिश में लगे  है.

दिल्ली के आर्कबिशप का विवादास्पद पत्र और देवबंद की ओर से जारी फतवा के खिलाफ संत समाज भाजपा के समर्थन में उतर सकता है.इसके अलावा पार्टी कैराना और नूरपुर में मिली हार को वोट की दृष्टि से बड़ा झटका नहीं मान रही है.पार्टी के अंदर से ये खबर आ रही है की पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद ही सूबे में मत प्रतिशत को ५० फीसदी तक ले जाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया था. अब कैराना-नूरपुर की हार के बाद इस योजना को जल्द से जल्द अमली जामा पहनाने की पहल होगी. पार्टी की रणनीति इसके लिए नया वोट बैंक तैयार करने की है. इसके तहत जाटव- यादव के अलावा मुसलमानों की पिछड़ी जाति समेत कुछ अन्य अत्यंत पिछड़ी जाति में आधार मजबूत करने की है.पार्टी का मानना है कि कैराना-नूरपुर की हार को मीडिया तथ्यों से परे जा कर बड़ी हार के रूप में प्रचारित कर रहा है. गोरखपुर-फूलपुर की तरह ही इन सीटों पर भी भाजपा अपने समर्थकों को विरोधी दलों के समर्थकों की तुलना में बूथ तक नहीं ला पाई.

चार विपक्षी दलों के एकजुट होने के बावजूद मुसलिम बहुल कैराना में जहां पार्टी को ४६.५ फीसदी मत मिले, वहीं नूरपुर में बीते विधानसभा की तुलना में ४ फीसदी अधिक वोट मिले. अगर कैराना में अंतिम समय में एक मुस्लिम उम्मीदवार नहीं हटता तो तस्वीर कुछ और होती. पार्टी कैराना में थोक में जाटों-दलितों का वोट हासिल होने का भी दावा कर रही है.मुसलिम बहुल कैराना, नूरपुर और जोकीहाट में मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं. भाजपा को लगता है कि इस परिणाम के सहारे वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तर्ज पर समानांतर धुव्रीकरण कराने में सफल रहेगी. इस बीच दिल्ली के आर्कबिशप के विवादास्पद पत्र और देवबंद की ओर से जारी फतवा के खिलाफ संत समाज ने मोर्चा खोलने की घोषणा की है. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि चर्च और देवबंद ने चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को हवा दी. इसके जवाब में संत समाज भी हिंदुओं के बीच एकता के लिए मैदान में उतरेगा.