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कर्नाटक में कांग्रेस की सामने आयी ये बड़ी हरकत,कांग्रेस के विधायक हुए नाराज

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कर्नाटक में मंत्री पद को लेकर विधायकों की नाराजगी सामने आने के बाद गुरुवार को कांग्रेस और जेडी (एस) की अहम बैठक होगी. यहां नाराज विधायकों को मनाने के लिए उन्हें सरकारी निगमों और बोर्डों की जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है. इस मीटिंग में कांग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन कमिटी के संयोजक दानिश को अली पांच सदस्यीय पैनल मीटिंग के लिए बुलाया गया है.

सूत्रों के अनुसार, बैठक में गठबंधन सरकार के लिए साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करने पर चर्चा करने के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से विधायकों में चल रही नाराजगी को दूर करने पर चर्चा होने की संभावना है. पांच सदस्यीय पैनल पांच साल तक संयुक्त घोषणापत्र के रूप में योजनाबद्ध दस्तावेज पर काम करने के लिए एक उप-समिति भी गठित कर सकता है.समन्वय समिति की अध्यक्षता पूर्व सीएम सिद्धारमैया कर रहे हैं. इसके सदस्यों में कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और कांग्रेस के जनरल सेक्रटरी और राज्य मामलों के इनचार्ज केसी वेणुगोपाल शामिल हैं. जेडी(एस) के जनरल सेक्रटरी दानिश अली इसके संयोजक है.शीर्ष स्तर पर इस बात को लेकर सहमति मिली है की प्रदेश में गठबंधन सरकार को कुशलतापूर्वक चलने के लिए अधिकतर विधायकों की जिम्मेदारी तय की जाये.

इस बात को लेकर कई दौर की बातचीत हुई है.कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी खुद इस मुद्दे को लेकर लगातार बैठक कर रहे है.हाल ही में सोमवार को भी उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है.इस प्लान पर मंगलवार को भी बंगलुरु में कांग्रेस के सचिवों को भी प्रदेश स्तर के नेताओ व नाराज़ विधायकयों के साथ हुई है.इन बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया है कि नाराज विधायकों को सरकारी निगमों, बोर्डों, आयोगों, सहकारी समितियों, विधायी समितियों की जिम्‍मेदारी दी जाए.इन बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया है कि नाराज विधायकों को सरकारी निगमों, बोर्डों, आयोगों, सहकारी समितियों, विधायी समितियों की जिम्‍मेदारी दी जाए.सूत्रों का कहना है कि संयुक्त घोषणापत्र के अलावा पैनल सरकारी निगमों और बोर्डों को असंतुष्ट विधायकों को सौंपने के बारे में विचार कर सकता है. इनमें से १४ बोर्ड और निगम प्रमुख हैं जिन पर दोनों पार्टियों की नजर है.कांग्रेस चेयरपर्सन की जिम्मेदारी सौंपकर अपने नाराज विधायकों को जल्द से जल्द मनाना चाहती है.इसके अलावा पार्टी के पास दूसरा विकल्प भी है जिसके तहत कांग्रेस के २२ मंत्रालयों में से ६ अभी रिक्त हैं जिन्हें लगातार दवाब बनाने वरिष्ठ नेताओं को बांटा जा सकता है.