Home देश कांग्रेस ने मिशन 2019 की बनाई रणनीति

कांग्रेस ने मिशन 2019 की बनाई रणनीति

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कांग्रेस कार्यसमिति की रविवार को अहम बैठक में भारत की ग्रैंड ओल्ड पार्टी ने २०१९ के चुनावों की रणनीति पर चर्चा की. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने लोकसभा की ३०० सीटों पर जीत की रणनीति बनाई है. इस बैठक में एनडीए के खिलाफ रणनीतिक गठबंधन की बात कही गई लेकिन नेताओं ने शर्त रखी कि इसका नेतृत्व राहुल गांधी को और इसके केंद्र में कांग्रेस होनी चाहिए.

यानि चिदंबरम के अनुसार जिस राज्य में कांग्रेस की भाजपा के साथ सीधी टक्कर है. वहां बिना गठबंधन किये १५० सीटें जीत सकती है और बाकी १५० सीटों पर क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करके जीत हासिल कर सकती है. इस तरह से केंद्र में यूपीए की सरकार २०१९ में बन सकती है. ये वो १२ राज्य हैं जहां कांग्रेस की भाजपा से सीधी टक्कर है – गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, असम, उत्तराखंड, केरल और गोवा. इन सभी राज्यों में लोकसभा कुल १८७ सीटें है.लेकिन अहम सवाल ये कि क्या राहुल गांधी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में इनके सभी सहयोगियों को स्वीकार्य होंगे?

क्या कांग्रेस इतनी मजबूत स्थिति में है कि इन राज्यों की १८७ लोकसभा सीटों में से १५० पर जीत कायम कर पाएगी?कांग्रेस २०१४ के लोकसभा चुनावों में इन राज्यों में मात्र २७ सीटों पर ही जीती थी, तो क्या इस बार राहुल बाबा की लोकप्रियता १५० सीटें जिता पाएगी? २००९ के लोकसभा चुनावों में जब यूपीए की सरकार केंद्र में बनी थी तब इन राज्यों में कांग्रेस को ९४ सीटें मिली थी तो इस बार कहां से १५० का आंकड़ा छू पाएगी?

उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के साथ कांग्रेस का तालमेल हो सकता है, बशर्ते मायावती राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में स्वीकार करें. क्योंकि बसपा पहले ही मायावती को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट कर चुकी है. वैसे भी पिछले लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस को सिर्फ दो सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी. बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी राजद से कांग्रेस का पुराना गठबंधन है. इस बार और छोटे दल इसमें शामिल हो सकते हैं. हालांकि यहां २०१४ के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मात्र २ सीटें ही मिली थीं.

महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी से तालमेल कर सकती है. पिछले चुनाव में इन दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार शरद पवार ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं. २०१४ में कांग्रेस को यहां २ सीटें मिली थीं.इस प्रकार कांग्रेस उपरोक्त राज्यों के अलावा दूसरे राज्यों में भी गठबंधन की अपेक्षा करता है. लेकिन फिर वही सवाल कि क्या इन सहयोगियों के सहारे कांग्रेस इन राज्यों से अपनी झोली में १५० सीटें झपट पाएगी?