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केजरीवाल की इन कर्तुदों को देख कोर्ट ने केजरीवाल पर उठाया ये सख्त कदम

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FILE- In this May 25, 2015 file photo, Delhi state Chief Minister Arvind Kejriwal and leader of Aam Aadmi Party, or Common Man's Party attends a public meeting to mark the partyís 100 days government in the capital, in New Delhi, India. Anti-corruption crusader Arvind Kejriwal's government in the Indian capital has plunged into a crisis as a minister he fired over the weekend accuses him of accepting 20 million rupees ($300,000) in cash as a bribe. There was no immediate comment from Kejriwal on Sunday. But his Aam Admi Party spokesman, Kumar Viswas, rejected the allegation by party lawmaker Kapil Mishra, describing it as an attack by rivals. (AP Photo/Tsering Topgyal, file)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार पर भारी जुरमाना लगा दिया है. राजधानी दिल्ली में सीलिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है. दिल्ली में सीलिंग के मामले पर दिल्ली सरकार द्वारा विस्तृत रिपोर्ट पेश नहीं करने से नाराज़ सुप्रीम कोर्ट ने ५० हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. इस पर कोर्ट ने कहा कि निर्देश समझने में कोई परेशानी है तो हिंदी में समझा देंगे. सीलिंग के मुद्दे पर हो रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह नकारापन नहीं चलेगा और ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार से सीलिंग और प्रदूषण घटाने को लेकर उनकी योजना के बारे में पूछा गया. सरकार इससे संबंधित कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सकी और इस बात से नाराज हो कर ने यह जुरमाना लगा दिया. पूर्व में सुनवाई के दौरान एलजी की ओर से बताया गया था कि दिल्ली में १०० जगहों पर अतिक्रमण है. दिल्ली सरकार ने कोर्ट से वादा किया था कि वो सीलिंग और प्रदूषण घटाने के बारे में सुप्रीम कोर्ट में कम्प्रीहेंसिव एक्शन प्लान देगी. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और कोर्ट सख्ती दिखानी पड़ी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप हर बार हमें जुबानी जमा खर्च वाले बयान देकर चले जाते हैं लेकिन निर्देशों का पालन नहीं करते. कोर्ट ने कहा है की इस दिल्ली सर्कार की ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकार अतिक्रमण को लेकर गंभीर नहीं है. और इसीलिए वो कोर्ट में फोटो, वीडियो वाला एक्शन प्लान और हलफनामा दाखिल नहीं कर रही है. कोर्ट ने कहा कि सरकार सिर्फ झोपड़ियों पर डंडे चलाकर पल्ला झाड़ रही है. वहीं अतिक्रमण करने वाले सरकार के निचले कर्मचारियों से सुलह करके फिर से काबिज हो जाते हैं. आवासीय क्षेत्रों में मिश्रित उपयोग वाली संपत्तियों के आसपास पिछले १२सालों में किये गये अनधिकृत निर्माण के खिलाफ उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति की देखरेख में दिसंबर २०१७ में सीलिंग की कार्रवायी शुरु की गयी थी. केन्द्र सरकार ने साल २००६ में दिल्ली के मास्टर प्लान २०२१ में संशोधन कर राजधानी के विभिन्न इलाकों में २१८३ गलियों और ३५५सड़कों पर आवासीय संपत्तियों के मिश्रित उपयोग की इजाजत दी थी.

सितंबर २००६ में संशोधित मास्टर प्लान को सात फरवरी २००७ को अधिसूचित किया गया था. इस नोटिफिकेशन को जारी करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी. बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के सरकार इन सड़कों पर मिक्सड लैंड यूज का नोटिफिकेशन जारी नहीं कर सकती है. पिछले वर्ष १२ मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए को फटकार लगाई थी. तत्कालीन अध्यक्षता वाली बेंच ने कन्वर्जन चार्ज कम किए जाने पर नाराजगी जताते हुए डीडीए से हलफनामा दाखिल कर ये बताने का निर्देश दिया था कि ये चार्ज कम क्यों किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से कहा था कि हमें पता है कि आप पर दबाव है और आप दबाव में काम कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से पर्यावरण मानकों, फायर सेफ्टी, पार्किंग के साथ-साथ पैदल चलने वाली जगह की जानकारी की भी मांग की थी.