Home देश कोरिया के तानाशाह ने परमाणु बम को लेकर लिया ये हाहाकारी फैसला

कोरिया के तानाशाह ने परमाणु बम को लेकर लिया ये हाहाकारी फैसला

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पिछले कुछ सालो से उत्तर कोरिया के तानाशाह की जैसे दहशत बनी हुई है. और इसकी वजह भी कुछ ऐसी ही रही है. उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के लगातार परमाणु हथियार बनाने और परिक्षण करने की वजह से सारी दुनिया पर जैसे एक डर का साया मंडरा रहा था.

किन्तु अब इस दार से सारी दुनिया आजाद हो गयी है. हाल ही में मिली ख़बरों के अनुसार किम जोंग उन ने अब परमाणु हथियार के परिक्षण पर रोक लगाने के लिए सहमती जताई है. किम जोंग उन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से होनेवाली मुलाकात से पहले यह फैसला लिया है. किम जोंग उन ने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण को रोकने की घोषणा की है. उत्तर कोरिया की मीडिया के अनुसार, परमाणु हथियार और मिसाइलों का परिक्षण शनिवार, २१ अप्रैल से रोक दिया जाएगा. परमाणु हमले की धमकी और बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण के जरिए अमेरिका समेत पूरी दुनिया को डराने वाले किम जोंग उन के तेवर पिछले कुछ वक्त से नरमी देखने को मिल रही है. किम के इस कदम को दुनियाभर से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

उत्तर कोरिया का कहना है कि उसने अपने परमाणु एवं लंबी दूरी वाले मिसाइल परीक्षण कार्यक्रम रोक दिए हैं और वह परमाणु परीक्षण स्थलों को बंद करने पर भी विचार कर रहा है. उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच नए सिरे से परमाणु वार्ता होने की घोषणा के बाद यह ऐलान किया गया है. उत्तर कोरिया की तरफ से की गई इस घोषणा में उसके परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर इच्छुक होने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए गए है. ख़बरों के मुताबिक उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की बैठक के बाद यह फ़ैसला लिया गया है. उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु बल को लेकर आश्वासन जाहिर किया है, जिसके कथित थर्मोन्यूक्लियर वारहेड का जमीन के नीचे और तीन अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का हवा में परीक्षण करने के बाद किम जोंग – उन ने इसके नवंबर में पूरा होने की घोषणा की थी.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के इस क़दम पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है “उत्तर कोरिया सभी परमाणु परीक्षणों और बड़े परीक्षण ठिकानों को बंद करने के लिए तैयार हो गया है. यह उत्तर कोरिया और पूरी दुनिया के लिए एक बहुत अच्छी ख़बर है. ये बड़ी सफलता है. हम आगामी मुलाक़ात को लेकर आशावान हैं.” परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाने के कारण उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाये हुए हैं. पिछले साल नवंबर में उत्तर कोरिया ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण करने का दावा किया था और ये भी कहा था कि ये मिसाइल अमरीका तक मार करने में सक्षम है. इस परीक्षण की संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने कड़ी निंदा की थी और कहा था कि उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुट राय का अपमान किया है.

कहा जा रहा है की किम जोंग उन ने यह फैसला देशहित में लिया है. इस कदम के पीछे देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मुद्दों पर लक्ष्य केंद्रित करने की सोच है. किम जोंग उन के इस फैसले को काफी अहम इसलिए भी माना जा रहा है, क्योंकि यह घोषणा ऐसे वक्त की गई है जब वो कुछ दिन बाद ही दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से एक समिट में मिलने वाले हैं. किम ने सत्तारूढ़ पार्टी की बैठक में कहा की ‘क्योंकि परमाणु हथियारों की पुष्टि हुई है. इसलिए अब हमारे लिए मध्य और लंबी दूरी की मिसाइलों या आइसीबीएम के परमाणु परीक्षण या परीक्षण लॉन्च करने की जरूरत नहीं है.’ उत्तर कोरिया की आधिकारिक केसीएनए समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने वर्कर पार्टी की केंद्रीय समिति की सभा में कहा की ‘उत्तरी परमाणु परीक्षण स्थल ने अपना मिशन पूरा कर लिया है.’

कुछ जानकारों का कहना है कि किम काफी मजबूत स्थिति में है और उसके वार्ता के दौरान अपने परमाणु हथियारों में कटौती करने पर राजी होने की संभावना कम है. दक्षिण कोरिया और अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किम अपनी टूटी अर्थव्यवस्था को कड़े प्रतिबंधों से बचाने का प्रयास कर रहा है. मई के अंत या जून की शुरुआत में किम और ट्रंप की मुलाकात होना संभव है. इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब उत्तर कोरिया का कोई नेता पदस्थ अमरिकी राष्ट्रपति से मिलेगा. इससे यह साफ़ है कि कुछ वक्त से किम जोंग उन दुनिया के दूसरे मुल्कों से रिश्ते सुधारने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं. इसी बिच उन्होंने साल २०११ में सत्ता संभालने के बाद पहली बार विदेश दौरा किया और वो चीन गए.

जहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. इसके बाद उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री रूस के दौरे पर गए थे. उत्तर कोरिया द्वारा किये इस ऐलान ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, लेकिन जापान ने उत्तर कोरिया पर भरोसा करने से इनकार कर दिया है. जापान के रक्षा प्रमुख का कहना है कि वे उत्तर कोरिया की बात से संतुष्ट नहीं है. साथ ही जापान ने इस बात का भी ऐलान कर दिया है कि वह उत्तर कोरिया के इस ऐलान के बाद भी उसपर दबाव बनाना जारी रखेंगे. उत्तर कोरिया ने किम के नेतृत्व के तहत अपने हथियार कार्यक्रमों में तेजी से तकनीकी प्रगति की है, जिसने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अमेरिका, यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया और अन्य लोगों द्वारा तेजी से सख्त प्रतिबंधों के अधीन देखा है.

पिछले साल उत्तर कोरिया ने अपने छठे परमाणु परीक्षण में, अब तक के सबसे शक्तिशाली परीक्षण किए और ये भी कहा था कि ये मिसाइल अमरिका तक मार करने में सक्षम है. परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाने के कारण उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा रखे हैं.इससे पहले, अमरीकी मीडिया ने उच्चस्तरीय सरकारी सूत्रों के माध्यम से ख़बर दी थी कि अमरीकी ख़ुफिया एजेंसी के निदेशक माइक पॉम्पियो ईस्टर के मौक़े पर, ३१ मार्च और १ अप्रैल को उत्तर कोरिया के गुप्त दौरे पर गए थे. पॉम्पियों के दौरे का मक़सद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच सीधी बातचीत का रास्ता साफ़ करना था. इससे पहले ट्रंप ने ख़ुद कोरिया के साथ वार्ता को उच्चस्तरीय बताते हुए कहा था कि किम के साथ आगामी बैठक के लिए पांच संभावित जगहों पर विचार किया जा रहा है. उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच भी पिछले कुछ दिनों में संबंधों में सुधार हुआ है.