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गद्दार निकला ये देश, भारत के खिलाफ बनाया है ये बड़ा ख़ुफ़िया प्लान

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New Delhi: Prime Minister Narendra Modi at the party headquarters to celebrate victory in UP and Uttrakhand Assembly elections, in New Delhi on Sunday. PTI Photo by Manvender Vashist(PTI3_12_2017_000185B)

भारत और चीन के बिच हर दिन सीमा पर लढाई हो रही हैं, चीन अपने गंदे काम करने से बाज नहीं आ रहा हैं, भारत का सबसे बड़ा दुश्मन चीन और पाकिस्तान हैं, चीन हर समय पाकिस्तान का भारत के खिलाप साथ देता नजर आता हैं. चाइना हमेशा से ही भारत के आड़े आने की कोशिश करता रहता हैं, कुछ ही दिन पहले भारत और चाइना के बिच दोक्लम को लेकर विवाद चल रहा था जो की हद से जादा बढ़ गया था, उससे बहार निकलते ही चीन ने फिर एक बार इंडिया के बॉर्डर के अंदर अपने लढाउ विमान बेचकर इस वाद को जिन्दा किया हैं.

चीनी वायु सेना अब फिर एक बार इंडिया के खिलाप खुपिया प्लान बनाया हैं और इसे पूरा करने की कोशिश में हैं. चाइना के इस गन्दी हरकत का इंडिया ने निषेध किया हैं चाइना के खिलाप आवाज उठाई हैं. अब भारत चीन के इस हरकत का जवाब देने के लिए तैयार हैं. जिस तरह से इस क्षेत्र में स्टेल्थ विमान का उपयोग बढ़ रहा है उसके बाद भारतीय वायु सीमा में चीन की ओर से किसी हवाई हमले या घुसपैठ की आशंका को ले कर भारतीय वायु सेना को हमेशा तैयार रहना होगा. इंडियन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामन ने भी सैन्य को किसी भी परिस्थिति में लढने के लिए तैयार रहने की आदेश दे दिए हैं, जिसके लिए आर्मी ऑफिसर रावत ने सभी को सतर्क रहने के फरमान जारी कर दिए हैं.

चीन की पीएलएएएफ एक क्षेत्रीय शक्ति से ऐसी महाशक्ति बनने जा रही है जो रक्षात्मक के साथ ही आक्रामक ऑपरेशनों को भी आसानी से अंजाम दे सकेगी और इस कायापलट के लिहाज से स्टेल्थ तकनीक बहुत अहम भूमिका निभाएगी. चेंगदू एरोस्पेस कॉरपोरेशन की ओर से बनाए गए दो इंजन वाले जे-20 ए एकल सीट वाले ऐसे लड़ाकू विमान है जिसकी दुश्मन टोह नहीं लगा पाता। इसे लंबी दूरी के लड़ाकू मिशन के लिए तैयार किया गया है और यह किसी संघर्ष के शुरुआती दौर में राडार की पकड़ में नहीं आ पाने की अपनी क्षमता की वजह से अग्रिम चौकियों को नुकसान पहुंचाने में काफी अहम भूमिका निभा सकता है। इस काम में लंबी दूरी की इसकी क्षमता और भारी गोला-बारूद ढोने की शक्ति इसकी मददगार साबित होगी. चाइना को हर बार भारत ने कडा मुकाबला दिया हैं जिससे चाइना अछे से वाकित हैं.

सभी बड़े राष्ट्रों के बिच अपने सुरक्षा के प्रति कुछ कायदे कानून बनाये हैं, उसका उल्लंघन मतलब कानून तोडना हैं, चीन हर बार ऐसा कुछ काम कर देता है जिससे दोनों देशों के बिच बने कायदे और कानून पर सवाल उठते हैं, चीन ने ऐसा पहिली बार नहीं किया हैं इससे पहले भी चीन ने अपने सैन्य इंडिया के बॉर्डर में घुसाए थे, जिससे दोनों देशों के सीमा को लेकर प्रश्न उपस्थित हुए थे, चीन हर बार इंडिया में घुसपैठ करता हैं और उसे अपना यानि चीन का एरिया कहलाता हैं. चाइना ने इस बार पूरी हद पार करते हुए हवाई मार्ग से अपने हेलिकॉप्टर से लाइन ऑफ़ कंट्रोल को पार कर फिर एक बार चीनी सेना ने इंडिया में प्रवेश कर भारतीय सैन्य को ललकारा हैं. ये आज ही नहीं इससे पाहिले ४ बार चीनी सेना भारत के साथ कर चुकी हैं इस बार ४ किलोमीटर तक अंदर चीनी सेना ने प्रवेश किया था.

ये घटना १० मार्च २०१८ को होई जब चीन ने अपने काले करतूत को अंजाम दे दिया, उत्तराखंड के बारहोती लद्दाख के ट्रिग हाइट गुद्से और डेपसांग में चीनी सैन्य ने शिरकाव किया. जिसमे चीनी सेना के ३ हेलिकॉप्टर नजर आये जोकि इंडिया के सरहद से करीब ४ किलोमीटर अंदर आये थे, जिसपर केन्द्रीय सुरक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने विरोध दर्शाते हुए चीन को खूब सुनाया हैं, साथ ही निर्मला सीतारमण ने इंडियन फ़ोर्स को किसी भी हालत में मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा हैं, केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने सैन्य अधिकारी रावत से भी बात की हुई हैं, उनसे भी इस बात की जानकारी लेकर इसपर जल्द से जल्द निर्णय लेने की मांग की हैं, साथ ही अपना और सरकार का पूरा सपोर्ट भारतीय जवानों को दिया हैं.

चीन और पाकिस्तान में पाहिले से ही दोस्ताना देखने को मिलता आ रहा हैं, तो वही भारत को अमेरिका समेत रशिया, इजराइल, जर्मनी का फुल सपोर्ट हैं, ये सभी देश आतंकवाद के खिलाप हैं, तो ऐसे में पाकिस्तान और चीन के इस हरकत से सभी देश परेशां हैं. भविष्य में चीन की ओर से किसी हमले या घुसपैठ की स्थिति में भारतीय वायु सेना की रक्षा करने के लिहाज से भारतीय वायु सेना को स्टेल्थ लड़ाकू विमानों की बढ़ती उपलब्धता का ध्यान रखना होगा, इस समय भारतीय वायु सेना अपने बेड़े की गुणवत्ता और संख्या दोनों ही लिहाज से अपनी कमियों को दूर करने की तैयारी में है और खरीद की अपनी मुश्किल प्रक्रिया के सहारे 2032 तक इसे 42 लड़ाकू बेड़ों की क्षमता हासिल कर लेने की उम्मीद है. चीन और पाकिस्तान के साथ एक साथ होने वाले किसी संघर्ष की स्थिति में इतने बड़े की क्षमता इसके लिए जरूरी है.