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चाहकर भी रूस नहीं छोड़ सकता है भारत का साथ, ये है इसकी असली वजह

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हाल ही में भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमिर पुतिन के साथ अनौपचारिक वार्ता हुई है. बता दे की इस वर्ष यह पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति पुतिन की पहली मुलाकात है. हाला कि इस वर्ष की शुरुआत में दोनों नेताओं के बीच फोन पर कई बार वार्ता हो चुकी है.

हाल ही में पीएम मोदी चीन के शहर वुहान से लौटे हैं और यहां पर उन्‍होंने चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इसी तरह की एक अनौपचारिक वार्ता की थी. ऐसे में अमेरिका से करीबी के बीच पीएम मोदी की यह रूस यात्रा कई मायनों में अहम है यह माना जा रहा है. सूत्रों की माने आज भी रूस भारत के करीब है और आने वाले वर्षों में करीब रहेगा यह बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक़ अक्‍टूबर २००० में जब अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री थे तो उन्‍होंने राष्‍ट्रपति पुतिन के साथ भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों पा एक ‘डिक्‍लेयरेशन’ साइन किया था. इस ‘डिक्‍लेयरेशन’ के साथ दोनों देशों के बीच वार्ता का एक नया अध्‍याय शुरू हुआ. रूस, भारत के लिए कई वर्षों से एक मजबूत साझीदार साबित हुआ है.

देखा जाए तो भारत और रूस के बीच आज अर्थव्‍यवस्‍था, राजनीति, मिलिट्री और असैन्‍य परमाणु ऊर्जा के अलावा एंटी-टेररिज्‍म और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी कई तरह से सहयोग बढ़ रहा है. एक तरफ जहां भारत, अमेरिका के करीब हो रहा है तो वहीं रूस, पाकिस्‍तान के साथ संबंध गहरे करने में लगा है. साल २०१६ में रूस और पाकिस्‍तान के बीच पहली मिलिट्री एक्‍सरसाइज तक हुई. यह एक्‍सरसाइज उस समय हुई थी जब भारत में पाकिस्‍तान से आए आतंकियों ने उरी आतंकी हमले को अंजाम दिया था. जानकारी के मुताबिक़ पाकिस्‍तान से अलग चीन भी रूस का सबसे ताकतवर साझीदार है और भारत के पारंपरिक दुश्‍मन पाकिस्‍तान का सबसे करीबी है. रूस और पाकिस्‍तान के बीच बढ़ती करीबियां भारत के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है यह सूत्रों का मानना है.

मिलिट्री पार्टनरशिप के बारे में बात की जाए तो आपको बता दे की आज भारत की सेनाओं के पास जितने भी हथियार हैं उसमें ६० प्रतिशत से ज्‍यादा हथियार मेड इन रशिया है और इसके अलावा भारत ने रूस से पिछले पांच वर्षों में ६२ प्रतिशत हथियार आयात किए हैं. साल २००८ से २०१२ तक यह आंकड़ां ७९ प्रतिशत था. यह आंकड़ें स्‍टॉकहोम पीस रिसर्च इंस्‍टीट्यूट की ओर से जारी किए गए है. भारत के कुछ खास हथियार तो सोवियत और रूस में बने हैं. रूस और भारत के बीच आर्थिक और परमाणु सहयोग का भी रिश्ता है. दिसंबर २०१४ में डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी और रूस के रोस्‍ताम के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण सहयोग के मकसद से डील साइन हुई थी. रूस ने हमेशा से भारत की शांति के लिए परमाणु ऊर्जा की जरूरत को समझा है.

बता दे की दिसंबर २०१४ में दोनों देशों ने द्विपक्षीय रोजगार को साल २०२५ तक ३० बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्‍य तय किया गया है. रूस के फेडरल सर्विस कस्‍टम के मुताबिक साल २०१६ में दोनों देशों के बीच करीब ७. ७१ बिलियन डॉलर तक पहुंचा. हाला कि साल २०१५ के मुकाबले इसमें १.५ प्रतिशत से ज्‍यादा की गिरावट भी दर्ज की गई थी. जानकारी के मुताबिक़ भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष में सहयोग करीब चार दशक पुराना है. साल २०१५ में भारत के पहले सैटेलाइट आर्यभट्ट की लॉन्चिंग की ४० वीं सालगिरह थी. वर्तमान समय में दोनों देश मानवयुक्‍त स्‍पेस फ्लाइट में संभावनाएं तलाशने की दिशा में काम कर रहे हैं. इन सभी बातों से ये तो साफ़ है की भारत और रूस के रिश्ते बहोत ही मजबूत है और बेशक इनमे दरार नहीं आ सकती. दोनों देशों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बात है इसमें कोई आशंका नहीं है.