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चीन के खिलाफ, फ्रांस के साथ मिलकर PM मोदी ने खेला ये बड़ा दाव

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भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के कई देशो से सम्बन्ध मजबूत बनाने के कड़े प्रयास किये है. इन प्रयासों में वे काफी सफल रहे है और अब यही बात चीन के चिंता का विषय बन गयी है.

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भारत ने पश्चिमी तथा एशियाई राष्ट्रों से कई समजौते कर लिए है. इन समजौतो की वजह से भारत अज एक सक्षम राष्ट्र बना हुआ है. भारत की अमेरिका और रूस से दोस्ती इसका बहुत अच्छा उदहारण है. भारत ने अरब देशो से भी कई तरह के समजौते किये है जिनसे भारत अब ओमान के दुक्म पोर्ट का इस्तेमाल कर सकेगा, अरब अमीरात के कच्चे तेल का भारत में भण्डारण होगा और भारत यह तेल आपातकाल में इस्तेमाल भी कर सकेगा. फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रॉन भारत के दौरे पर आए हुए है. इस दरम्यान उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से भेट की. इस भेट में दोनों देशो में कुल १४ समजौतो पर हस्ताक्षर किये गए. इन समजौते की वजह से चीन को अब चिंता में दाल दिया है.

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शनिवार को भारत और फ्रांस के बिच,शिक्षा, क्लीन एनर्जी, और रक्षा के सहयोग बढ़ने जैसे १४ समजौतो पर हस्ताक्षर किये गए. इसमें सबसे अहम् समजौता ये है की अब भारत और फ्रांस की नौदल अब एक दुसरे का सहयोग करेंगे और साथ में युध्द अभ्यास करेंगे. आज से पहले ऐसा कभी नही हुआ था. इस एक फैसले ने चीन को बहुत परेशान कर दिया है. चीन अपनी वन बेल्ट वन रोड पॉलिसी के तहत हिन्द महासगर में अपनी गतिविधिया बढा रहा है. इस वजह से भारत सह दुनिया कुछ अन्य देशो में भी चीन के बढ़ते दबाव को लेकर चिंता है. चीन अपनी इस पॉलिसी के तहत एशिया और अफ्रीका के कुछ देशो में अपनी मिलिट्री बढ़ा रहा है. इससे फ्रांस के साथ ही कई यूरोपीय देशो की चिंता बढ़ रही है.

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हाल ही में चीन ने अफ्रीका के जिबूती देश में अपना नेवल बेस बनाया है. हिन्द महासागर में बसा उरानियन द्वीप फ्रांस के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है. प्रशांत महासागर में लगातार बढ़ रही चीन की गतिविधिया फ्रांस को परेशान कर रही है. भारत के कई क्षेत्र पर चीन पर नजर है. चीन उसपर कब्ज़ा जमाने की कोशिश में है लेकिन पी एम मोदी की कूटनीति ने उसे रोक रखा है. ऐसे में फ्रांस से किये गए समजौतो से हम चीन को टक्कर दे सकेंगे. फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रॉन ने कहा है की फ्रांस के पास ताकतवर समुद्री सेना और नुक्लेअर सुब्मरिन मौजूद है. उन्होंने कहा की फ्रांस इस क्षेत्र की स्सुरक्षा को लेकर बहुत ही सक्रीय है. और यहाँ पर भारत फ्रांस का अहम् सुरक्षा साझीदार है.