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चीन के राष्ट्रपति ने PM मोदी से मांगी ये मदद ,चीन को भी मिला करारा जवाब

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कलाम विवाद के बाद भारत-चीन के रिश्तों में आई खटास अब दूर होने लगी है. चीन ने भारत से ‘वन-चाइना पॉलिसी’ पर समर्थन मांगा है. दोनों देशों के बीच हाल के समय में संबंधों में हुए सुधार के बाद चीन ने यह निवेदन किया है. लेकिन भारत ने चीन को करारा जबाब देते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रॉजैक्ट्स बंद करने को कहा है.

वन-चाइना पॉलिसी में केवल पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को पहचाना जाता है और ताइवान या रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता नहीं दी जाती.दरअसल चीन ने अपनी संप्रभुता को बनाए रखने के लिए भारत से ‘वन चाइना पॉलिसी’ पर समर्थन मांगा है. इसके जवाब मे केन्द्र की मोदी सरकार ने भी चीन को करारा झटका देते हुए ऐसी बात कह दी है कि आप भी कहेगें ‘मौके पे मारा चौका’. भारत ने कहा है कि अगर चीन को समर्थन चाहिए तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर मे उसे प्रोजेक्टस बंद करने होगें. भारत ने कहा है कि चीन उन प्रोजेक्टस से दूर रहे जो भारत की संप्रभुता का मान्यता नही देते.आपको बता दें कि इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर मे चल रहा प्रोजेक्ट ‘सीपीईसी’ भी शामिल है. इस मुद्दे को भारत चीन के साथ उठा चुका है लेकिन भारत की आशंकाओं को दूर करने के लिए चीन ने कुछ नही किया है.

सूत्रों ने बताया पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रॉजैक्ट्स और चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) शामिल है. CPEC को लेकर भारत की आशंकाओं को दूर करने के लिए चीन ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है. इसी वजह से चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का भारत विरोध कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग के बीच ९ जून को होने वाली इस वर्ष की दूसरी मीटिंग से पहले चीन ने भारत को बताया है कि भारत की ओर से वन-चाइना पॉलिसी को स्वीकार करने से दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी.वन-चाइना पॉलिसी की पुष्टि किए बिना भारत और चीन का पहला संयुक्त बयान उस समय जारी हुआ था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के पूर्व प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की दिसंबर २०१० में मेजबानी की थी. चीन की जम्मू और कश्मीर के निवासियों को चीन की यात्रा के लिए पासपोर्ट पर स्टेपल्ड वीजा जारी करने की पॉलिसी के जवाब में भारत ने वन-चाइना पॉलिसी को मानने से इनकार कर दिया था.