Home देश जब रूस खुद आया भारत की मदद के लिए.

जब रूस खुद आया भारत की मदद के लिए.

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१९७१ में भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ था.उस वक्त बांग्लादेश भी पाकिस्तान का एक हिस्सा माना जाता था.उसे पूर्वी पाकिस्तान के रूप में माना जाता था. इस युद्ध में भारत की जित हुई थी और बांग्लादेश को स्वतंत्रता मिली थी.लेकिन उस समय सभी देशों ने भारत पर हमला किया था.

१९७१ में पाकिस्तान ने पहले दो दिन में भारत पर हवाई हमला किया। जिससे भारत का काफी नुक्सान हुआ.लेकिन दो दिन के बाद भारत ने हमला शुरू किया तो पाकिस्तान की हालत ख़राब होने लगी. लेकिन  युद्ध की वजहें क्या थी ? उस वक्त बांग्लादेश एक पाकिस्तान का हिस्सा माना जाता था.इसीलिए बांग्लादेश को पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था.

१९७० के दौरान पाकिस्तान में चुनाव हुए जिसमे पूर्वी पाकिस्तानी आवामी लीग ने बड़ी संख्या मेंसीटे जीती। जिसके कारण उन्हें सरकार बनाने का दावा ठोका।लेकिन पाकिस्तान की पीपल्स पार्टी इससे सहमत नहीं हुई.इसलिए उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया।कहा जाता है की हालात इतने खराब हुए की सेना का प्रयोग करना पड़ा.इन सब मामले में पूर्वी पाकिस्तान की आवामी लीग के शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया।अब यही से पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बिच विवाद शुरू हुए.

पश्चिमी पाकिस्तान की सेना की अत्याचार के कारण पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया।इन दोनों के बिच का असर भारत पर पड़ने लगा क्योंकि पूर्वी पाकिस्तानी और पश्चिमी पाकिस्तान के बिच चल रहे विवाद के कारण इंदिरा गांधी के समय में एक बड़ी संख्या में पूर्वी पाकिस्तान से शरणार्थी भारत में आ चुके थे.जिसके कारण उन्हें भारत के पडोसी होने के कारन सुविधाएं दिए जाती थी.हमेशा की तरह यह पकिस्तान को गवारा नहीं।

भारत पर शरणार्थियों का दबाव बढ़ता जा रहा था.बात यहाँ तक गयी की पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने की धमकियाँ देने शुरू की.इंदिरा गांधी ने आंतरराष्ट्रीय स्तर पर साड़ी कोशिशे की शरणार्तियों को वापस भेजा जा सके लेकिन यह नहीं हो सका.पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने पश्चिमी पाकिस्तान का बड़ा विरोध करना शुरू कर दिया और उन्होंने अपनी एक सेना निकालकर पश्चिमी पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा निकला।

पाकिस्तान ने इसे भारत समर्थितं युद्ध माना। पाक का मानना था की भारत की शाह पर यह सब हो रहा है.इसी की खुन्नस निकालते हुए पाक ने ३ दिसंबर १९७१ को भारत पर हमला कर दिया।इसके बाद इंदिरा गांधी ने भी आंतरराष्ट्रीय दबावों को दरकिनार करते हुए पकिस्तान को सबख सिखाने की घोषणा कर दी.रूस तब सोवियत नाम से जाना जाता था.

तब रूस ने पाकिस्तान को चेतावनी दी की भारत के साथ युद्ध अच्छा नहीं होगा।लेकिन पाकिस्तान को भी कई बड़े देशों का समर्थन होने के कारन पाकिस्तान भी पीछे नहीं हटा.अमेरिका शुरू से ही अमेरिका के समर्थन में था.तब अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने भारत को युद्ध का अंजाम भोगने को कहा.उस वक्त अमेरिका ने चार एयरक्राफ्ट पाकिस्तान के समर्थन में भेजे और जरुरत पड़ने पर और भेजने की इच्छा जताई।

तुर्की और सऊदी भी पाकिस्तान के समर्थन में आये थे.इसके बाद संयुक्त अरब एमिरात और इण्डोनेशिआ ने भी पाकिस्तान की तरफ अपना रास्ता चुना था. अमेरिका की वजह से भारत के तरफ ज्यादा विरोधी बढ़ रहे थे.क्योंकि अमेरिका के कहने पर उसके मित्र देश पाकिस्तान के समर्थन में आ रहे थे.तब अमेरिका ने चीन से कहा की जरुरत पड़ने पर पाकिस्तान की मदद करना।अमेरिका और पाकिस्तान ने इस तरह सभी देशों के साथ मिलकर भारत को अलग थलग कर दिया था.इसके बाद अमेरिका ने अपना एयरक्राफ्ट बे ऑफ़ बंगाल में भेज दिया।

सभी देश मिलकर भारत को घेरने की तैयारी कर रहे थे.भारत थोड़ा हल्का पड़ने लगा था.लेकिन रूस ने भारत को समर्थन दिया और चीन को चेताया की अगर भारत के खिलाफ कदम बढ़ाया तो सीधा रूस के साथ युद्ध होगा।इसके बाद चीन शांत रहा.बाकी तुर्की,जॉर्डन जैसे कई देशों के लिए रूस का आना ही काफी था.रूस ने अपने जहाज परमाणु से लेस करके मैदान में उतर दिए.रूस ने अमेरिका के जहांजो को भारत पहुंचने से पहले ही घेर लिया।इसके बाद बाहरी देशों के समर्थन के बिना पाकिस्तान कुछ नहीं कर सकता था और बांग्लादेश को आजाद कर दिया गया.