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तेल के बढ़ते दामों की असलियत

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आजकल तेल और पेट्रोल,डीज़ल के दाम लगातार ऊंचाई पर जा रहे है.हाल ही में अचानक बढे पेट्रोल के दामों के कारण पेट्रोलियम मंत्री ने विदेशी परिस्थितियों को दोषी ठहराया था.सरकार का कहना है की पेट्रोल डीजल के दामों को कम करना उनके हाथ में नहीं है.लेकिन सरकार का मानना है की वो फिर भी इसके लिए कड़े प्रयास कर रही है.

कुछ सलाहकारों के मुताबिक कहा भी जाता है की पेट्रोल डीजल के दाम और भी बढ़ सकते है.अभी सोमवार को प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल कि बढ़ती दामों का विरोध करने के लिए भारत बंद को बुलाया था. सरकार ने इस मामले में कहा की तेलों की बढ़ती दामों की वजह आंतरराष्ट्रीय बताया है.इसे अगर कम करना हो तो उत्पाद शुल्क में कमी करनी होगी लेकिन यह ऑप्शन सरकार के पक्ष में नहीं है.क्योंकि इससे नुकसान भी झेलना पडेगा।

पेट्रोल डीजल की बढ़ने की कई वजहों से कुछ प्रमुख वजह यहाँ पेश की है.जिससे समझ में आएगा की यह सरकार का दोष नहीं है.इसकी पहली वजह है की आंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपये डॉलर के मुकाबले का लगातार बढ़ना। अब रुपया गिरकर उसकी कीमत ७१.१२ रुपये प्रति डॉलर हुई है.जो अब तक का सबसे निम्न स्तर माना जाता है.

जगभर में भारत अपने कुल तेल आयात करनेवाले देशों में तीसरे नंबर पर है क्यूंकि भारत कुल तेल का ८० फीसदी आयात करता है.डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरने के कारण आयात महंगा होता जा रहा है.इसके कारण पेट्रोल डीजल के रिटेल दाम भी कच्चे तेल की हिसाब से बढ़ रहे है.तेलों की दामों के बढ़ने की दूसरी वजह है की बढ़ती हुई कच्चे तेल की कीमते।

पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है.आप जानते ही है की परमाणु प्रयोगों के कारण अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हुए है.जिसका परिणाम ईरान की निर्यात क्षमता पर हो रहा है.जिसके चलते ईरान के कच्चे तेल के निर्यात में कमीआई है.जगभर में ईरान तेल सबसे बड़ा निर्यातक देश है.इसके साथ भारत का सबसे बड़ा आयातक देश भी ईरान है.

ईरान से तेल खरीदने में भारत दूसरे नंबर पर आता है.भारत से पहले चीन का नाम पहले नंबर पर है.अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए अपने सहयोगियों को ईरान से नवम्बर से तेल लेने को मना किया है.भारत को कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है.इसके कारण दूसरे देशों से कच्चे तेल को लेने के लिए ज्यादा कीमते अदा करनी पड़ती है.इसके साथ तेल की उत्पादन में दुनियाभर में कमी आई है.अगली यानी की तीसरी वजह है की भारत में आर्थिकता का सबसे बड़ा जरिया पेट्रोल है.

ग्राहकों के रेट पर सरकार का ५० फीसदी का टैक्स होता है.इसके कारण  कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक इंडियन आयल जब ३९.२२ रुपये में पेट्रोल बेचता है तो उसमे पेट्रोल के रेट में मुनाफा,राज्य का वैट और केंद्रीय उत्पादक शुल्क लागू होता है.

महाराष्ट्र में मुंबई,थाने और नवी मुंबई के इलाके में सबसे ज्यादा टैक्स लगाती है.चूँकि पेट्रोल डीजल GST के दायरे में नहीं आने के कारन VAT में  कम बाध्यता नहीं आती.राजस्थान ने VAT कम कर रेट में कटौती की है.अब तक यहमुख्य  वजह है की जिसके कारण तल की दामों ने आसमान छू लिया है. कीमते ऊंचाई पर जाने से सरकार का क्या कहना है? असल में सरकार ने उत्पाद शुल्क में कम करने से मना किया है.सरकार कहता है की उत्पाद शुल्क को कम किया नहीं जा सकता।क्योंकि इससे चालु खाता घाटा सीमा से कई ऊपर चला जाएगा।इसके कारण सरकार ऐसे करने से मना कर रही है.आपको चालू खाता घाटा के बारे में बताना चाहेंगे।

देश में हो रहे कुल निर्यात और आयत के बिच के अंतर को चालु खाता घाटा कहा जाता है.आर्यात और निर्यात में वस्तुओं के अलावा सेवाओं का भी समावेश है.देश में होनेवाले वस्तुओं और सेवाओं के आयात और निर्यात के जरिये ,कितनी विदेश मुद्रा आती है और जाती है इसके अंतर को चालु खाता घाटा कहा गया है.

क्यों सरकार के लिए पेट्रोल से मिलनेवाला टैक्स जरुरी है ? फैनआनन्शियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है की पिछले साल में सरकार ने ८ लाख करोड़ रुपये का टैक्स जमा किया था.इसमें एक्साइज ड्यूटी,सर्विस टैक्स और GST  का समावेश था.इस टैक्स में से ३६ फीसदी टैक्स पेट्रोल के जरिये से था.क्या पेट्रोल और डीजल और ऊपर जा सकता है क्या?

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बढ़ती के लिए आंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को दोषी माना है. क्योंकि ओपेक देशो ने मतलब तेल निर्यातक देशों ने पूरी दुनिया को १ जुलाई से १ मिलियन मेट्रिक उत्पादन देने का आश्वासन दिया था.लेकिन आश्वासनों के बाद जुलाई और अगस्त में वैसे आकड़े देखने को नहीं मिले।इसका भारत के पास नहीं है.इन बढ़ती पेट्रोल डीजल के दामों में जल्द सुधार होने की आशंका नहीं है.

भारत के कई राज्यों में चुनाव करीब है.इसके कारण राजस्थान और मध्यप्रदेश देश के अलावा कोई देश VAT काम नहीं करेंगे। सरकार तेलों के दामों में एक्साइज टैक्स काम करने के भूमिका में नहीं है क्योंकि विश्व में तेल की कीमतों में होनेवाली तेजी एक इसके कारण देश का आयात बिल २० अरब तक बढ़ने की संभावना है.कच्चे तेल का दाम अब ८० डॉलर प्रति बैलर पहुंचा है.

यह रेट २०१४ के बाद सबसे ज्यादा है.सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है की सरकार सभी मूवमेंट्स पर नजर रखी हुई है और जल्द ही इस पर कदम उठाये जाएंगे।इस लगातार बढ़्नेवाले पेट्रोल और डीजल के कीमतों पर सरकार की नजर टिकी हुई है और इसको काम करने के लिए सरकार हर एक प्रयास अपनाने की जल्द कोशिश करेगा। सरकार तेल के दामों से भी खुद भी आंतररास्ट्रीय वजहों से चिंतित है.