Home देश नागरिकों को डरा रहे विपक्षी दल

नागरिकों को डरा रहे विपक्षी दल

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असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) के फाइनल ड्राफ्ट पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को राजनीति न करने की नसीहत देते हुए राज्यसभा में कहा कि एनआरसी मामले पर सरकार के किसी भी नेता को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है, यह शर्मनाक है.

उन्होंने कहा की जानकारी लेना सही है कि असम में कितने देशी हैं और कितने विदेशी, इस मामले पर कुछ लोग लगातार दिक्कत पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और भेदभाव पैदा कर रहे हैं. भारी हंगामे के बीच गृहमंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल को भी घेरा और कहा कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया १९८५ में शुरू हुई, जब राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री थे. इसे अपडेट करने का फैसला २००५ में मनमोहन सिंह जी ने लिया था.

उन्होंने फिर दोहराया कि यह फाइनल लिस्ट नहीं है इसलिए एनआरसी पर स्थिति साफ होने का इंतजार करना चाहिए. एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया १५ अगस्त १९८५ को शुरू हुई थी. राजनाथ सिंह ने कहा कि रिपोर्ट पूरी तरह से निष्पक्ष है. जिनके नाम रजिस्टर में नहीं है उनके सामने कई विकल्प आज भी मौजूद हैं.

गृह मंत्री ने इस दौरान विपक्ष को इस मामले में सरकार का हाथ होने की बात साबित करने की बात दोहराई. सिंह इससे पहले यह बातें लोकसभा में भी कह चुके हैं और विपक्ष को चुनौती भी दे चुके हैं. गृह मंत्री ने कहा कि सभी जानते हैं कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है. सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ है. यह ड्राफ्ट सूची है, अंतिम सूची नहीं. कुछ लोग अनावश्यक रूप से भय का माहौल पैदा कर रहे हैं.

जिनका नाम रजिस्टर में दर्ज नहीं है उन्हें अभी कई स्तर पर अपनी नागरिकता साबित करने के विकल्प हैं. ऐसे लोग न्यायाधिकरण में जा सकते हैं. जिनका नाम सूची में नहीं है उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. असम के एनआरसी मुद्दे पर मचेे सियासी घमासान पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि एनआरसी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है.

उन्‍होंने साफ किया कि इस मामले में जो लोग छूट गए हैं, उनके खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्‍होंने कहा कि यह ४० लाख परिवार नहीं हैं, बल्कि ये व्‍यक्तियोंं की संंख्‍या हैै. उन्‍होंने साफ किया कि एनआरसी में कोई भेदभाव ना तो हुआ है और ना ही किया जाएगा. उन्‍होंने यह भी कहा कि जिसे एनआरसी में नाम जुड़वाना है उसे सर्टिफिकेट पेश करना होगा. एनआरसी को लेकर हम शांति और सौहार्द बनाकर रखेंगे. १९७१ से पहले के दस्‍तावेज दिखाने पर एनआरसी में नाम आ जाएगा. मामले में अनावश्‍यक डर फैलाने की कोरिश की गई है.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी की प्रक्रिया १९८५ में असम समझौते के जरिये तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय में शुरू हुई थी. इसको अपडेट करने का निर्णय २००५ में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लिया था. उन्‍होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में पूरी की गई है. उन्‍होंने कहा ‘मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि यह अंतिम मसौदा है, अंतिम सूची नहीं है.

सभी लोगों को अपील कररने का मौका मिलेगा. यह पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया है.’ केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को राज्य सभा में अपने बयान में कहा, ‘ यह फाइनल ड्राफ्ट है न कि फाइनल एनआरसी. २४ मार्च १९७१ के पहले से राज्य में रह रहे व्यक्तियों के नाम इसमें शामिल किया गया है. जिन लोगों के पास लैंड रिकॉर्ड, पासपोर्ट, बीमा पॉलिसी थी उनका नाम भी एनआरसी में शामिल किया गया है. जिनके पास जरूरी दस्तावेज है उनका नाम नहीं छूटेगा.

अन्य राज्यों के नागरिक जो असम में रह रहे हैं वह भी १९७१ के पहले का देश में कहीं का सर्टिफिकेट दिखाने पर एनआरसी में शामिल किए जाने के योग्य माने जाएंगे.’ उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया १९८५ में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी के समय शुरू हुई थी. एनआरसी को अपडेट करने का फैसला २००५ में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के कार्यकाल में किया गया था.