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पाक के चुनाव आयोग ने ही दिया हाफ़िज़ सईद को ये सबसे बड़ा झटका,

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पाकिस्तान में अगले कुछ हफ्तों में होने जा रहे राष्ट्रीय चुनावों से पहले मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को करारा झटका लगा है. चुनाव आयोग ने सईद के संगठन जमात-उद-दावा की राजनीतिक इकाई मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत करने की अर्जी आज खारिज कर दी है.

 पकिस्तान का आतंकवादी हाफिज सईद को अब एक बड़ा झटका लगा है. मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और आतंकवादियों के रहनुमा माने जाने वाले पाकिस्तान के हाफिज सईद को पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने जोर का झटका दिया है. पाकिस्तान में होने जा रहे राष्ट्रीय चुनावों में लड़ने के लिए चुनाव आयोग ने सईद के संगठन जमात- उद- दावा की राजनीतिक इकाई मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत करने की अर्जी आज खारिज कर दी. इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पाकिस्तान चुनाव आयोग से कहा था कि वह एमएमएल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत करने की अर्जी खारिज कर दिए जाने के अपने फैसले की समीक्षा करे. अब्दुल गफ्फार सूमरो की अध्यक्षता वाली आयोग की चार सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में एमएमएल को राजनीतिक पार्टी के तौर पर पंजीकृत करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया.

25 जुलाई को पाकिस्तान में होने वाले आम चुनावों में अपनी दावेदारी पेश करने वाली, मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को पाकिस्तान चुनाव आयोग ने करार झटका दिया है. पाकिस्तान चुनाव आयोग की एक चार सदस्यीय टीम ने मिल्ली मुस्लिम लीग को राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत करने की अर्जी को खारिज कर दिया है. चुनाव आयोग के चार सदस्यीय पैनल ने गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के मद्देनजर रखते हुए यह फैसला सुनाते हुए कहा है कि एमएमएल, लश्कर-ए-तैयबा और आतंकी हाफिज सईद की विचारधारा का पालन करता है, इसलिए इसे प्रमाणिकता नहीं दी जा सकती है. वहीं, गृह मंत्रालय ने कहा है कि एमएमएल देश में प्रतिबंधित जेयूडी की ही एक शाखा है, जिसे मंजूरी नहीं दी जा सकती है.

चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक पार्टी का दर्जा ना दिए जाने के बाद एमएमएल की ओर से भी आधिकारिक बयान आया है. एमएमल का कहना है कि उसका जेयूडी से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं है. इतना ही नहीं पार्टी ने चुनाव आयोग द्वारा अर्जी खारिज किए जाने को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज और उसके नेतृत्व का हाथ बताया है. आम चुनाव के नजदीक आने के साथ ही इस समूह ने एक निष्क्रिय राजनीतिक दल अल्लाहू-अकबर तहरीक (एएटी) के नाम से चुनाव लड़ने का फैसला किया है जो चुनाव आयोग में पंजीकृत है. जेयूडी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने चुनाव आयोग से नामांकन पत्र ले लिए हैं और वे एएटी के मंच से अपने उम्मीदवार खड़े करने वाली थी. आतंकी हाफिज सईद के पिछले रास्ते से सत्ता पाने के सपने को तगड़ा झटका लगा है.

इससे पहले खबर आई थी कि हाफिज सईद की पार्टी एमएमएल ने चुनावों की पूरी तैयार कर ली है. पार्टी ने 200 उम्मीदवारों के नाम का चयन भी कर लिया था. उम्मीदवारों के चयन की जानकारी देते हुए पार्टी के प्रवक्ता अहमद नदीम ने कहा था, ‘एमएमएल अध्यक्ष सैफुल्ला खालिद और एएटी प्रमुख अहमद बरी आगामी चुनावों में एएटी के मंच पर संयुक्त रूप से उम्मीदवार खड़े करने पर सहमत हो गए हैं. सीटों के बंटवारे के समझौते के अनुसार, एमएमएल 200 से अधिक शिक्षित उम्मीदवार खड़े करेगी.’ एमएमएल के वकील ने कहा कि संघीय सरकार किसी भी राजनैतिक दल को मान्यता देने से इनकार नहीं कर सकती है. उन्होंने कहा की “ये कोई नहीं बता सकता कि भविष्य में कोई राजनैतिक दल किसी प्रतिबंधित संगठन से संबद्ध होगा या नहीं.

उन्होंने कहा कि एमएमएल के नेता सैफुल्लाह खालिद का हाफिज सईद या जमात-उद-दावा से कोई लिंक नहीं है. बता दें कि इससे पहले चुनाव आयोग ने आंतरिक मंत्रालय से पार्टी के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. पार्टी ने अपनी अर्जी खारिज होने के लिए सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) को जिम्मेदार बताया है. चुनाव आयोग ने मिली मुस्लिम लीग को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दिए जाने की अर्जी 2017 में भी खारिज की थी लेकिन उसके बाद फैसले के विरोध में पार्टी हाई कोर्ट चली गई थी. उसकी अर्जी पर सुनवाई के बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने मिल्ली मुस्लिम लीग की अर्जी पर चुनाव आयोग से पुनर्विचार के लिए कहा था. पुनर्विचार के बाद ही बुधवार को चुनाव आयोग के एक बार फिर से रजिस्ट्रेशन के लिए दी गई अर्जी खारिज की है। चुनाव आयोग की चार सदस्यीय पीठ ने यह फैसला दिया. पीठ की अध्यक्षता अब्दुल गफ्फार सुमरो ने की.