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पार्टी को बचाने के लिए महबूबा ने की ये चाल, इन सभी लोगों ने दिया इस्तीफा

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जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन टूटने के बाद सियासी गरमा गई है. पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगने के बाद पीडीपी को बिखरने से रोकने के लिए पीडीपी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नया दांव खेला है. बता दे की पार्टी के सभी पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा दे दिया है.

सूत्रों से मिलीं जानकारी के मुताबिक़ बता दे की महबूबा के मामा सरताज मदनी समेत पार्टी के सभी पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा दे दिया है. मदनी ने मेहबूबा के इशारे पर इस्तीफा दिया है यह बताया जा रहा है. पार्टी प्रवक्ता रफी मीर ने इस बात की पुष्टि की है. बता दे की दरअसल भाजपा के समर्थन वापसी से सरकार गिर जाने के बाद पीडीपी में विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. पांच विधायकों व दो एमएलसी ने खुलेआम महबूबा का विरोध किया था.

मदनी ने कहा है कि उन्होंने यह कदम पार्टी के व्यापक हित में उठाया है. इस मुद्दे पर पार्टी के कई विधायक बागी तेवर अपनाए हुए है. पीडीपी के बागी विधायक और पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी व उनके चाचा आबिद अंसारी ने खुले तौर पर महबूबा मुफ्ती पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया था. साथ ही पार्टी अध्यक्ष के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पार्टी अध्यक्ष ने अपने को चारो ओर से रिश्तेदारों व मित्रों से घेर रखा है.

खबरों के अनुसार महबूबा मुफ्ती के भाई तस्सदुक मुफ्ती को भी लेकर विधायकों में आक्रोश है. बागी विधायकों ने आरोप लगाया था कि उसे मुंबई से लाकर विधान परिषद सदस्य बनाया गया और फिर मंत्री पद से नवाजा गया. इसके विपरीत पार्टी में पिछले कई वर्षों से काम करने वालों को दरकिनार रखा गया. बता दे की पीडीपी में काफी हद तक आरोप प्रत्यारोप लगते रहे.

सूत्रों की माने पार्टी में टूट फूट की आशंका के मद्देनजर महबूबा ने पिछले दिनों शहीदी दिवस पर केंद्र पर आरोप लगाया था कि यदि उसने पार्टी तोड़ने की कोशिश की तो १९८७ जैसे हालात पैदा होंगे. जानकारी के मुताबिक़ पूर्व मंत्री व विधायक अब्दुल मजीद पाडर ने तो यहां तक दावा किया था कि जल्द ही रियासत में नई सरकार अस्तित्व में आएगी. इसके लिए ५१ विधायकों का समर्थन है.