Home देश पीएम मोदी का शून्य से प्रधानमंत्री तक का सफर

पीएम मोदी का शून्य से प्रधानमंत्री तक का सफर

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आज कोई यकीं नहीं कर सकता की भारत के बने प्रधानमंत्री पहले कभी चाय बेचने का काम करते थे.यही भारत के लोकतंत्र की खासियत है की यहाँ हर एक को अपना नेतृत्व दिखाने के लिए मौक़ा मिलता है.पीएम मोदी जिन्होंने अपने जीवन का सफर शून्य से शुरू किया और शिखर तक पहुंचे। आज भी मोदी निस्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा में लगे हुए है. पीएम मोदी का शून्य से सफर और उनके बारे में कुछ रोचक बातें यहाँ बताने जा रहे है.

१७ सितम्बर  १९५० में गुजरात के वडनगर के बेहद साधारण परिवार में पीएम मोदी का जन्म हुआ. मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जो आजादी के बाद पैदा हुए.नरेंद्र मोदी अपने भाई बहनों में दूसरे नंबर के संतान है.नरेंद्र मोदी को बचपन में नरिया कहकर बुलाया जाता था.नरेंद्र मोदी के पिता रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे.१९६५ में नरेंद्र मोदी ने भारत पाक युद्ध के दौरान स्टेशन से गुजर रहे सैनिकों को चाय पिलाई।

नरेंद्र मोदी बचपन से ही आम बच्चो से अलग थे.मोदी अपने स्कूल में एक औसत के छात्र थे. १९५८ में दिवाली के दिन कुछ बच्चो ने बाल स्वयंसेवक की शपथ ली थी, उनमे से ८ साल का बच्चा कोई और नहीं हमारे पीएम थे.मोदी को बचपन से एक्टिंग का शौक था.इसीलिए वो नाटकों में भाग लिया करते थे.

१८ साल की उम्र में ही नरेंद्र मोदी की शादी करवाई थी.लेकिन शादी के दो साल बाद ही घर छोड़कर उन्होंने सन्यासी बनने का निर्णय लिया। पीएम मोदी के पत्नी का नाम जशोदाबेन था.मोदी हमेशा शाकाहारी रहते आये है.१९७८ की पत्राचार से मोदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान में ग्रैजुएशन किया और गुजरात यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान की मास्टर डिग्री हासिल की.

नरेंद्र मोदी का राजनितिक जीवन तब शुरू हुआ था जब उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ज्वाइन किया था.युवावस्था में मोदी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ज्वाइन की.इस परिषद् को पूरा समय देने के बाद उन्हें  बीजेपी के प्रतिनिधि के तौर पर चुना गया.स्वामी विवेकानंद हमेशा नरेंद्र मोदी के आदर्श रहे है.मोदी ने बचपन में उनके घर के पास के शर्मिष्ठा तालाब से घड़ियाल का बच्चा पकड़कर लाया था. लेकिन माँ के कहने पर उन्होंने वापस तालाब में छोड़ दिया था.

 

नरेंद्र मोदी के पास ट्रैन और बस में रिज़र्वेशन का जिम्मा रहता था.इतना ही नहीं गुजरात के हेडगेवार भवन में  आनेवाली हर चिट्ठी का खोलने का काम नरेंद्र मोदी ही करते थे.नरेंद्र मोदी के मैनेजमेंट और काम करने के तरीके को देखने को बाद आरएसएस ने उन्हें बड़े जिम्मेदारी देने का फैसला लिया। इसके कारण उनको राष्ट्रीय कार्यालय नागपुर में एक महीने के विशेष ट्रेनिंग कैंप में बुलाया गया.९० के दशक में आडवाणी के अयोध्या रथ यात्रा की बड़ी भूमिका नरेंद्र मोदी ने निभाई।

आरएसएस में नरेंद्र मोदी की स्टाइल सभी प्रचारकों से अलग थी.वे हमेशा दाढ़ी रखते थे और ट्रिम भी करते थे.२००१ में गुजरात में भूकंप के आने से २०००० लोग मारे गए.तब राज्य के राजनितिक सत्ता में बदलाव होना शुरू हुआ। दबाव के कारन तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को अपना पद छोड़ना पड़ा.केशुभाई पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौपी गयी.जिसके बाद नरेंद्र मोदी ने कभी पीछे मुड़के नहीं देखा।

२००२ में इतिहास में कला अध्याय जुड़ गया क्यूंकि गोधरा में एक ट्रैन सवार ५० हिन्दुओं के जलने के बाद पुरे गुजरात में जो दंगे भड़के उसका कलंक मोदी आज तक नहीं धो पाए.दंगों में धूमिल हुई छवि के बावजूद भी विधानसभा चुनाव में मोदी की जीत हुई. मोदी पर इल्जाम लगाया गया था की उन्होंने दंगों को भड़काने का काम किया है.२००५ में इन दंगों के कारण मोदी को अमेरिका ने वीजा देने से इंकार कर दिया।

नरेंद्र मोदी ऐसे परिस्थितियों से कभी विचलित नहीं हुए.नरेंद्र मोदी परंपरागत परिधानों से हटकर मॉडर्न ड्रेस भी आजमा चुके है.प्रधांनमंत्री होने के बाद अमेरिका ने खुद पीएम मोदी को आमंत्रित किया था.नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव् रहते है.ट्विटर और फेसबुक पर उनके लाखों के संख्या में फॉलोवर्स है.नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री रहते हुए भी अपना हर घंटा देशसेवा करने में लगाते है.