Home देश पुतिन की ताकदवर होने की वजहें

पुतिन की ताकदवर होने की वजहें

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ब्लादिमीर पुतिन का चौथी बार रूस के राष्ट्रपति बनने के बाद लाखों रुसी लोगों का मानना है की अगर पुतिन नहीं तो रूस नहीं। पुतिन ने चौथी बार राष्ट्रपति बनकर लोगों का दिल जीता है.फिर रुसी लोगों ने भी दिखाया है की पुतिन की जगह कोई नहीं ले सकता।

ब्लादिमीर पुतिन अपने दौरान १९९९ में प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति बने.उन्होंने राष्ट्रपति के काल में राष्ट्रपति का कार्यकाल बदलकर चार से बढ़कर छह साल तक कर दिया था. इसके बाद २०१२ में रूस के राष्ट्रपति बने.फिर एक बार राष्ट्रपति पद पर चुनने से उनका कार्यकाल २०२४ तक चलेगा।अब उनका चौथा और वर्तमान कार्यकाल होगा जो २०२४ तक रहेगा। एक केजीबी एजेंट से देश के ताकतवर व्यक्ति  बनने तक की महत्वपूर्ण बातें यहाँ बताएँगे। उनकी इस राजनीतिक सफर में कौन सी बातें उनको दुनिया में भी पावरफूल बनाती है.

शुरुवाती दौर में मॉस्को में खामोश रहते थे पुतिन। जब शीत युद्ध का अंत होने जा रहा था तब पुतिन का उठने का दौर शुरू होनेवाला था.१९८९ में पूर्वी जर्मनी में केजीबी एजेंट रहे.पुतिन खुद बताते है की केजीबी के मुख्यालय को भीड़ के घिरने से वो खुद चिल्लाये थे.

भीड़ के घिरने के वक्त पुतिन ने रेड आर्मी टैंक को फ़ोन किया। लेकिन मदद के लिए कोई नहीं आया.पुतिन ने मॉस्को में खुद एक्शन लेकर रिपोर्ट्स जलाने शुरू कर दिए.पुतिन ने एक किताब में खुद लिखा है की मैंने रिपोर्ट्स जलाने शुरू कर दिए. इसके कारण वहा आग भड़क उठी थी .इसके बाद पुतिन सेंट पीट्सबर्ग में लौटने के बाद वहा के रातोरात के नए मेयर एनातोली साबचोक के ख़ास बन गए.

मेयर ने १९९० में पुतिन को राजनीति में पहली नौकरी दी थी.मेयर अपने पुराने स्टूडेंट्स को याद करने के कारण पुतिन भी उन्हें याद थे.बाद में पूर्वी  जर्मनी में पुतिन ऐसा नेटवर्क का हिस्सा बन गए जो खो चुका था.इसी वक्त नए रूस में व्यक्तिगत और राजनितिक तौर पर पुतिन को आगे बढ़ने का मौक़ा दिया था.नए रूस में पुतिन का अनुभव काम आया.

वीडियो:पुतिन जुडो के ब्लैक मेडलिस्ट 

पुतिन ने पुराने दोस्तों का फायदा उठाकर अपना संपर्क बनाना शुरू किया। पुतिन ने नए नियमो से खेलना शुरू किया। पुतिन कई समय तक एनातोली साबचोक के डेप्युटी बने रहे. पुतिन का करियर होना अब शुरू हो गया था.केजीबी एजेंट होने से पुतिन जानते थे की लोगो से कैसा संपर्क बनाना है.पुतिन अपने गुरु के निधन के बाद मॉस्को चले गए. पुतिन ने केजीबी छोडकर एफएसबी ज्वाइन कर ली.

बेरिस येल्तसिन के राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन की उनसे करीबी बढ़ी.पुतिन के क्षमता के कारण वो येल्तसिन के नजदीक आने लगे.अचानक राष्ट्रपति बनने की वजह. येल्तसिन के कार्यकाल में उनकी व्यवस्था अस्थिर चल रही थी.इसके कारण उन्हें इस्तीफा था.उस वक्त पुतिन को व्यावसायिक समूहों का साथ मिल गया.इनके मदद से पुतिन कार्यकारी राष्ट्रपति बन गए.बाद में चुनाव जीतकर राष्ट्रपति पद पर विराजमान हुए.

पुतिन का मीडिया पर नियंत्रण. पुतिन ने सत्ता में आते ही मीडिया को अपने नियंत्रण में किया  था.ऐसा होना विरोधी पार्टियों के लिए बेहद झटका समान था.क्यूंकि किसी को ऐसी उम्मीद नहीं थी की पुतिन ऐसा करेंगे। पुतिन के इस कदम के कारण समझ में आ रहा था की पुतिन आगे जाकर कैसे काम करेंगे।मीडिया पर पुतिन के इस नियंत्रण के कारन पुतिन को दो बड़े फायदे हुए.इसके कारण आलोचना करनेवालों पर पूरा नियंत्रण आया.दूसरी बात मीडिया वही दिखाती जो पुतिन चाहते थे.

सभी रूसियों को वही देखने को मिलता जो पुतिन देखना चाहते है.मीडिया के इस नियंत्रण के कारण कई लोग स्वतंत्र पत्रिकारिता करना चाहते थे लेकिन उन्हें बंद किया गया और कइयों को ऑनलाइन भेजा गया.पुतिन का जुडो में ब्लैक बेल्ट है.मार्शल आर्ट की यह कला उनके खूबियों में दिखती है.