Home देश प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम की संविधान पीठ

प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम की संविधान पीठ

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देश में आरक्षण यह एक गंभीर विषय बन चुका है. अभी मिली खबर के अनुसार बता दे की सुप्रीम कोर्ट अब फिर से ये विचार करेगा कि क्या सरकारी नौकरी में पदोन्नति में एससी/एसटी को आरक्षण दिया जा सकता है या नहीं, भले ही इस संबंध में उनके अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को लेकर डेटा ना हो.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ बता दे की संविधान पीठ सरकारी नौकरियों की पदोन्नति में क्रीमी लेयर के लिए एससी-एसटी आरक्षण के मुद्दे पर अपने १२ साल पुराने फैसले की समीक्षा करेगी. बताया जा रहा है की सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ का गठन हो गया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ मामले की सुनवाई करेगी.

खबरों की माने संविधान पीठ इस बात पर भी विचार करेगी कि इस मुद्दे पर सात जजों की पीठ को पुनर्विचार करने की जरूरत है या नहीं. संविधान पीठ में सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदू मल्होत्रा है. ऐसे में इस मुद्दे पर क्या निर्णय होता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा.

बता दे की हाईकोर्ट के आदेशों का समर्थन करने वालों की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के नागराज फैसले के मुताबिक इसके लिए ये साबित करना होगा कि सेवा में एससी/एसटी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसके लिए डेटा देना होगा. सूत्रों की माने कई राज्य सरकारों ने हाईकोर्ट के प्रमोशन में आरक्षण रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

जानकारी के मुताबिक़ उनकी दलील है कि जब राष्ट्रपति ने नोटिफिकेशन के जरिए एससी/एसटी के पिछड़ेपन को निर्धारित किया है, तो इसके बाद पिछड़ेपन को आगे निर्धारित नहीं किया जा सकता. राज्यों व एससी/एसटी एसोसिएशनों ने दलील दी कि क्रीमी लेयर को बाहर रखने का नियम एससी/एसटी पर लागू नहीं होता और सरकारी नौकरी में प्रमोशन दिया जाना चाहिए क्योंकि ये संवैधानिक जरूरत है यह बताया जा रहा है.