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बीजेपी के आतंरिक सर्वे में सामने आया ये बड़ा खुलासा, राहुल की बढ़ गयी परेशानी

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सपा-बसपा के एक साथ आने के बाद से अखिलेश यादव को उपचुनाव में जीत का फौरी फायदा तो मिला है लेकिन भविष्य की राजनीति देख रहीं मायावती लगातार अपना कद बढ़ाती जा रही हैं. चुनावी बिसात हो या बंगला खाली करने जैसा मामला, वह बहुत सूझबूझ से आगे बढ़ रही हैं.अखिलेश यादव बंगला खाली करने को लेकर सवालों में घिरे हैं. वहीं मायावती ऐसे विवादों से भी बचते हुए बढ़ रही हैं.

फूलपुर और गोरखपुर उप चुनाव में सपा प्रत्याशी का समर्थन कर उसे बसपा ने जिताया. इससे यह संदेश दिया कि वह अपने एक इशारे पर अपना वोट बैंक ट्रांसफर करवा सकती हैं. यह भी एहसास करवाया कि सपा और आरएलडी सहित अन्य दलों को भविष्य में बसपा का साथ जरूरी है. कैराना और नूरपुर में साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान नहीं किया लेकिन प्रत्याशी न उतारकर ‘साइलेंट’ तरीके से सपा और आरएलडी को जितवाया. उधर, कर्नाटक में जेडीएस के साथ चुनाव लड़कर अपने प्रदेश अध्यक्ष को विधायक बनवाया. संयुक्त सरकार में वह अब मंत्री भी हैं. इसी तरह हरियाणा में इनेलो से गठबंधन करके वहां अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहीं. जहां बीजेपी के मुकाबले कोई अन्य बड़ा दल नहीं है, वहां कांग्रेस से गठबंधन की तैयारी है. कुल मिलाकर गैर बीजेपी गठबंधन में वह अहम भूमिका निभाकर राष्ट्रीय राजनीति में जड़ें जमाने की कोशिश में हैं.

इतना ही नहीं सरकारी बंगला खाली करने को लेकर भी मायावती ने अखिलेश की तुलना में ज्यादा समझदारी दिखाई. हालांकि बंगला खाली करने जैसे मामले कानूनी और निजी हैं, लेकिन इनका भी राजनीतिक संदेश जाता है. बीएसपी सुप्रीमो ने ऐसा कर बीजेपी को राजनीति करने का कोई मौका नहीं दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने खुद मीडिया को घर का एक-एक कोना दिखाया. इससे ये साफ कर दिया कि ज्यों का त्यों सरकार को सौंपकर जा रही हैं. लेकिन चाबी सौंपने से लेकर बंगले में हुई कथित तोड़फोड़ को लेकर अखिलेश विवादों में घिर गए.इन सबके इतर मायावती ने कर्नाटक में जेडीएस के साथ चुनाव लड़कर अपना एक विधायक बनवाने में कामयाब हुईं, जो गठबंधन सरकार में मंत्री भी हैं. इसी तरह हरियाणा में इंडियन नैशनल लोकदल से गठबंधन करके वहां अपनी जड़ें जमाने की कोशिश करने में जुटी हैं. जहां बीजेपी के मुकाबले कोई दूसरा दल नहीं है, वहां वो कांग्रेस से गठबंधन की तैयारी है. कुल मिलाकर गैर बीजेपी गठबंधन में वो अहम भूमिका निभाकर राष्ट्रीय राजनीति में जड़ें जमाने की कोशिश में हैं.