Home देश बीजेपी को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश मे सामने आयी ये तैयारीयां

बीजेपी को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश मे सामने आयी ये तैयारीयां

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आगामी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है. इस बातचीत को मीडिया लाइमलाइट से दूर रखा गया है. विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्म्युला क्या हो, इसका आधार बन गया है.

यह फॉर्म्युला प्रभावित इलाकों, पारंपरिक सीटों, बड़ी संसदीय सीटों, दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को पिछले दो चुनावों में मिले वोटों के आधार पर हो सकता है. समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘बसपा की वेस्टर्न यूपी, खासकर गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और आसपास की संसदीय सीटों पर पकड़ मजबूत है. वहीं, एसपी का अपनी पारंपरिक सीटों जैसे इटावा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, कन्नौज, फर्रुखाबाद और एटा में अच्छी पकड़ है.

साथ ही एसपी का पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे फैजाबाद, बस्ती, बलरामपुर, गोंडा, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर और मऊ में भी प्रदर्शन अच्छा रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेतओं की मानें तो, ‘अवध क्षेत्र में एसपी और बीएसपी दोनों ही पार्टियों के लिए जीतना बहुत मुश्किल है. बीएसपी और एसपी का अगर कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ तो कांग्रेस इस क्षेत्र में जीत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है.’

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एसपी मुखिया अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती लगातार एक दूसरे के संपर्क में हैं. दोनों एक दूसरे की इच्छा का सम्मान करने को राजी हैं. दोनों में से कोई भी किसी संसदीय सीट को लेकर अडिग नहीं है. एसपी ने राष्ट्रीय लोक दल, निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी गठबंधन में शामिल करने पर अपनी हामी भर दी है. अभी एसबीएसपी एनडीए का हिस्सा है. एसबीएसपी के गठबंधन में आने के कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर कई बार बीजेपी से अलग होने के संकेत दे चुके हैं.

गठबंधन को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए यह भी फैसला लिया गया है कि इस बार अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, यादव परिवार के दूसरे सदस्य और मायावती खुद भी चुनाव लड़ेंगी. २००४ के बाद से मायावती लोकसभा चुनाव नहीं लड़ी हैं. हालांकि, बसपा और सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के कोई संकेत नहीं दिए हैं लेकिन दोनों ही पार्टियां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को रायबरेली सीट पर समर्थन करने के लिए राजी हैं.