Home देश भाजपा को मिल गए ये नए साथी, पहले करते थे विरोध

भाजपा को मिल गए ये नए साथी, पहले करते थे विरोध

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भारतीय जनता पार्टी को इस बार २०१९ के लोकसभा चुनाव में उत्तर से ज्यादा दक्षिण में अधिक सीट जितने की उम्मीद है . इसके लिए भाजपा कोई बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहती है . तेदेपा नेता चन्द्र बाबु नायडू की पार्टी भाजपा से अलग हो गई है लेकिन उसे टक्कर देने के लिए भाजपा ने नया साथी ढूढ़ लिया है.

लोकसभा में बीते शुक्रवार को भाजपा के खिलाफ पेश किये गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपने भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की जमकर तारीफ कर एक नई बहस छेड़ दी है. इस तारीफ के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है क्या अब तक गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस फ्रंट की वकालत कर रहे चंद्रशेखर राव बीजेपी के साथ गठबंधन कर अगले चुनाव याने २०१९ में होने वाले लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगे.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष ब ज़िंदा नहीं है. जयललिता के मरते ही इस पार्टी में विरोध हुआ और पार्टी पूरी तरह से टूट गई नेता भी कई जगह बिखर गए . उन्हें भाजपा ओने पाले में करने में जुटी है. ये भी भाजपा के लिए फायदा हो सकता हैइनकीआन्ध्र प्रदेश की रायल सीमा में जमकर चलती है .

जून २००४ से वाई एस आर कांग्रेस पार्टी के एक भारतीय राजनीतिज्ञ और आंध्र प्रदेश विधान सभा में विपक्ष के नेता हैं. वह आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, वाईएस के बेटे हैं. उधर, माना जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में टीआरएस और बीजेपी के साथ औपचारिक रूप से कोई गठबंधन नहीं भी बन पाता है तो भी टीआरएस बीजेपी के उम्मीदवारों को जीतने में सशर्त मदद कर सकती है.

इसके बदले में पार्टी अन्य क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों के समर्थन की मांग कर सकती है. वहीं सूबे में टीआरएस की दोस्ती असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम के साथ भी है. हालांकि बीजेपी के साथ जाने पर एआईएम का साथ आना असंभव है. हालांकि एमआईएम भी बीजेपी -टीआरएस के बीच पनप रहे रिश्ते पर नजर बनाए हुए है.