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भारतीय सेना ने फिर एक बार कर दिया ये बड़ा कारनामा, चीन में मचा मातम

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ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट, सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है. जानकारी के मुताबिक़ रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है और यह रूस की पी-८०० ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है यह बताया जाता है.

आपको बता दे की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को लेकर अब एक और बड़ी खबर सामने आ रही है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल ने पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी हिला कर रख दिया है. भारत और रूस द्वारा मिलकर विकसित की गयी इस मिसाइल के वजह से अब दुश्मन भारत की ओर आँख उठाकर देखने से पहले सौ बार सोचेंगे. आपको बता दे की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल अब पहले से भी ज्यादा घातक और विनाशक हो गयी है ऐसा सूत्रों ने बताया है. ब्रह्मोस को जल्द ही भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर क्वाड लॉन्चर (क्वाड्रपल कैनिस्टराइज्ड इनक्लाइंड लॉन्चर) पर तैनात किया जा सकता है ऐसी खबरे आ रही है. खबरों की माने ब्रह्मोस क्वाड लॉन्चर के सभी परीक्षणों पर खरी उतरी है. लार्सन एंड टुब्रो ने क्वाड लॉन्चर को विकसित किया है.

परीक्षणों में खरा उतरने के बाद इस लॉन्चर को अगले १८ महीने के भीतर नौसेना को दिया जा सकेगा ऐसा लार्सन एंड टुब्रो डिफेंस के जयंत पाटिल का कहना है. उन्होंने यह भी बताया की जहां ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को लांच करके दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता बढ़ी है, वहीं अब एक साथ चार ब्रह्मोस को एक साथ एक से अधिक दिशाओं में दागा जा सकता है. इन्हे अब जरूरत के हिसाब से तैयार किए जाने की प्रक्रिया की शुरुवात की गई है. डॉ. सुधीर मिश्रा ने क्वाड लॉन्चर को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के लिए काफी अहम बताया है. वह ब्रह्मोस एरोस्पेस के प्रबंध निदेशक और महानिदेशक डीआरडीओ (ब्रह्मोस) है और उन्हें उन्नत रक्षा वैज्ञानिकों में गिना जाता हैं. लार्सन एंड टुब्रो द्वारा विकसित क्वाड लॉन्चर को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के पड़ाव में एक महत्वपूर्ण कड़ी है ऐसा मिश्रा ने बताया है.

आपको बता दे दरअसल यह मिसाइल लॉन्चर प्रणाली एक साथ चार ब्रह्मोस मिसाइल को इच्छानुसार झुकाव के साथ प्रक्षेपित कर सकता है और इसके जरिए चारों मिसाइल एक ही दिशा में या अलग-अलग दिशाओं में लांच करके दुश्मन के ठिकाने को तबाह किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक़ अभी तक ब्रह्मोस मिसाइल को भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर ट्विन कैनिस्टराइज्ड इंक्लाइंड लॉन्चर के जरिए लांच किए जाने पर निर्भर थी. खबरों की माने लार्सन एंड टुब्रो भी सन् २००० में ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम परियोजना की शुरुआत से ही इसमें शामिल रहा है. आपको बता दे की डॉ. सुधीर मिश्रा इसे देश के मेक इंडिया कार्यक्रम के तहत मील का पत्थर मानते हैं. हाला की भारत और रूस के सहयोग से ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली विकसित हुई है लेकिन इसको तैयार करने में देश के रक्षा उद्योग से जुड़ी २०० से अधिक कंपनियां शामिल होने की खबरे है.

खबरों के मुताबिक़ आपको बता दे की परमाणु हमला करने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल सक्षम माना जाता है. ब्रह्मोस नौसेना और भारतीय सेना में शामिल हो चुकी है. ध्वनि से भी तेज गति से मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल देश की महत्वपूर्ण सामरिक अग्नेया है. आपको बता दे की इस मिसाइल को सुखोई-३० एम के प्रणाली से लांच किए जाने वाला संस्करण भी विकसित किया जा चुका है और इसके परीक्षण का दौर चल रहा है ऐसा सूत्रों का मानना है. जानकारी के मुताबिक़ इस मिसाइल प्रणाली से पलक झपकते ही ३०० किमी दूर तक के दुश्मन के ठिकाने को उध्वस्त किया जा सकता है. यह मिसाइल प्रणाली परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है और भारत, चीन जैसे देश के सामरिक संतुलन को बिगाड़ने की क्षमता रखती है.