Home देश भारत को पकिस्तान की नई सरकार पर है ये बड़ा शक

भारत को पकिस्तान की नई सरकार पर है ये बड़ा शक

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कुछ दशकों में पाकिस्तान में होने वाला यह पहला ऐसा चुनाव है जिसे लेकर भारतीय कूटनीतिक जगत में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं है. इसकी वजह यह है कि इस बार चुनाव को लेकर एक आम राय यह बन चुकी है कि सब कुछ पाकिस्तानी सेना के इशारे पर हो रहा है.

पाक सेना ने पिछले दो वर्षों के दौरान सिलसिलेवार तरीके से देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर यह जता दिया है कि आने वाले दिनों में भी उसका दबदबा यूं ही कायम रहेगा. ऐसे में चुनाव बाद पाकिस्तान में चाहे जिस पार्टी की सरकार बने, इस बात की उम्मीद कम ही है कि वह भारत के साथ रिश्तों पर स्वतंत्र तरीके से फैसला कर सकेगी. इस नाउम्मीदी के बावजूद विदेश मंत्रालय पाकिस्तान में बुधवार को होने वाले चुनाव पर पैनी नजर बनाए हुए है.

विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान में इस बार का चुनाव पिछले चुनाव से इस लिहाज से अलग है कि पाकिस्तानी आर्मी की सारी गतिविधियां साफ तौर पर दिख रही हैं. अगर दूसरे देशों के पर्यवेक्षकों की छोड़ भी दें तो पाकिस्तान के बड़े विशेषज्ञों ने हाल के दिनों में जो लिखा है वह आम चुनाव की वैधता पर ही सवाल उठाते हैं. ऐसा लगता है कि वर्ष २०१३ की चुनाव प्रक्रिया से पाकिस्तान आर्मी सबक ले रही है.

उस वक़्त सेना ने चुनाव प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया था, लेकिन बाद में नवाज शरीफ के विजयी होने के बाद उनकी पाक सेना के साथ सीधी मुठभेड़ हुई थी. इस तरह से पाक सेना लगातार यह संकेत दे रही है कि चुनाव बाद भी सत्ता का असल केंद्र वही रहेगी. यह पूछे जाने पर कि क्या चुनाव बाद भारत के साथ रिश्तों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है, उक्त अधिकारियों का कहना है कि अभी कुछ कहना मुश्किल होगा.

भारत की तरफ से कोई पहल होनी होगी तो वह यहां होने वाले आम चुनाव के बाद ही संभव होगी. पिछली बार भी ऐसा हुआ था. वर्ष २०१४ में सत्ता संभालने के बाद राजग सरकार ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार के साथ रिश्तों को सुधारने की कोशिश की और तकरीबन दो वर्षों तक स्थिति ठीक रही, लेकिन जनवरी, २०१६ में पठानकोट हमले के बाद हालात बिगड़ते चले गए. इस बार भी यह देखना होगा कि पाकिस्तान में कौन प्रधानमंत्री बनता है और भारत को लेकर उसका रुख कैसा रहता है.