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भारत बन चुका है महाशक्ति,चीन के छूटे पसीने और पाकिस्तान आया घुटनों पर

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मोदी सरकार के आने से भारत एक नाइऊंचाई पर पहोच चूका हैं इंडिया एक शक्तिशाली देश बन चूका हैं, जिसका कोई भी देश कुछ बिगाड़ नहीं सकता भारत को देखकर अब चीन और पाकिस्तान के पसीने छुट रहे हैं दोनों देशों की बोलती बंद हो गई हैं.

भारत के सबसे बड़े दुश्मन और कोई नहीं बल्कि चीन और पाकिस्तान हैं जो की आये दिन सीमा पर गोलीबारी करते लडझगड़ते नजर आते हैं लेकिन जब से सत्ता में मोदी की सरकार आई हैं तब से पाकिस्तान और चीन घुटनों पर आया हैं. भारत की सेना भी बड़े ही मजबूती से इन सब का सामना कर रही हैं. साथ ही भारत के सेना पर सारी दुनिया गर्व कर रही हैं २०१७ में भारतीय सेना को वर्ल्ड ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स ने ४ नंबर की सबसे बड़ी ताकदवर सेना कहके घोषित किया हैं. इस लिस्ट में भारत से ऊपर मेहेज ३ देश हैं जो की सैन्य की शक्ति के चलते भारत से आगे हैं, इन देशों का नाम हैं अमेरिका, रशिया और चीन इसे देखकर पता चलता हैं की दुनिया में सबसे बड़ी और ताकदवर सेना अमेरिका की हैं

सैन्य के सबसे ताकदवर के हिसाब से दखा जाये तो सबसे आगे ये ४ देश हैं और टॉप १० में जो देश बचते हैं ओ हैं ब्रिटेन, फ़्रांस, जापान, टर्की और जर्मनी ये सभी टॉप १० में सबसे ताकदवर आर्मी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ये सभी देश भारत से पीछे हैं. सबसे अच्छी बात ये हैं की भारत का सबसे बड़ा दुश्मन कहा जाने वाला पाकिस्तान इस लिस्ट में १३ नंबर पर आता हैं हलाकि चीन इसमे काफी आगे हैं और आपनी सैन्य क्षमता को बड़ा और मजबूत करने में लगा हैं . जल्द ही रूस को पीछे छोड़ने में लगा हैं.  सबसे ताकदवर आर्मी में २ रे स्थान पर जाने की कोशिश में हैं गोल्बल विश्लेशतों के अनुसार सैन्य क्षमताओं के मामले में चीन से भी आगे भारत देश हैं भारत के सेना की कौन्टिंग की जाये तो इंडिया के पास ४२ लाख ७२५० की मात्रा में सैनिक है.

तो वही चाइना के पास इंडिया से कम ३७ लाख १२,५०० के तागाद में सैन्य संख्या हैं. ऐसा होते हुए भी चाइना की सक्रीय सैनिकों की संख्या २२ लाख 60,००० के गरीब हैं तो वाही इंडिया इस मामले में चीन से पीछे हैं इंडिया के १३ लाख ६२,५०० सैनिकों की फौज सक्रीय हैं. भारत के रिजर्व बटालियन पे नजर डाले तो इनकी शक्ति भी २८ लाख ४४,७५० से भी बढ़कर हैं जब की चीन के पास इंडिया से कम १४ लाख ५२,५०० रिजर्व बटालियन हैं. ऐसी बड़ी लिस्ट जब तयार होती हैं तब ५० से भी जादा आलग आलग मानकों पर देखा जाता हैं ऐसा करते वक्त सैन्य के संसाधों को परखा जाता हैं इसके साथ ही कामकाज उद्योग साथ ही भौगोलिक परिस्थिति को भी जाना जाता हैं.  भौगोलिक परिस्थिति जानकर सैन्य की संख्या का परिक्षण किया जाता हैं.