Home देश मिशन 2019 के लिए कांग्रेस की सामने आयी ये हरकत

मिशन 2019 के लिए कांग्रेस की सामने आयी ये हरकत

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मिशन २०१९ की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाई गई है. राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद यह सीडब्ल्यूसी की पहली बैठक है. दिल्ली में हो रही इस बैठक में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी और विधानमंडल के नेता मौजूद हैं.

राहुल गांधी ने कांग्रेसी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी बीते हुए अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच का पुल है.बता दें कि सीडब्ल्यूसी के सदस्यों में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पार्टी के कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा, अशोक गहलोत, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खडग़े, एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी और ओमन चांडी को जगह दी गई है. इसके अलावा असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा, कुमारी शैलजा, मुकुल वासनिक, अविनाश पांडे, केसी वेणुगोपाल, दीपक बाबरिया, ताम्रध्वज साहू, रघुवीर मीणा और गैखनगम भी शामिल हैं.

राहुल ने कांग्रेसियों को देश के पिछड़े हुए लोगों के लिए काम करने को भी कहा. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा संस्थान है जिसमें अनुभव और ऊर्जा शामिल है. राहुल ने कहा ‘पार्टी वोट बेस का विस्तार हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है. हर चुनाव क्षेत्र में हमें उन लोगों से जुड़ना है जिन्होंने हमें वोट नहीं दिया. उनका विश्वास जीतने के लिए हमें रणनीति बनानी होगी.’

सूत्रों के मुताबिक सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी ने विपक्षी गठजोड़ पर जोर देते हुए उनसे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को अलग रखने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए साथ आना जरूरी है. सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा कि समान विचारधारा वाले दल निजी महत्वकांक्षाएं छोड़कर साथ आएं. उन्होंने कहा कि आरएसएस का मुकाबला करने के लिए ऐसा करना जरूरी है. बैठक में प्रजेंटेशन के जरिए चिदंबरम ने बताया कि किस तरह गठबंधन रूप ले सकता है और पार्टी कहां और कैसे चुनाव में बाजी मार सकती है.

चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस १२ राज्यों में मजबूत स्थिति में है और वे वहां १५० सीटें ला सकते हैं. बाकी राज्यों में उन्हें क्षेत्रीय दलों से गठबंधन करना होगा. वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की बात पर सभी नेताओं ने सहमति जताई. हालांकि, पंजाब को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी अलग राय रखी. उन्होंने बताया, ‘मैंने पंजाब में पार्टी की जीत के बारे में पार्टी को बताया है और पंजाब में गठबंधन को लेकर हाईकमान पर निर्णय छोड़ दिया है.