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ये दुनिया का एक एसा देश है, जहाँ पर लोगों का मरना मना है

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कहा जाता है की जीवन मरण भगवान् के हात में होता है. कोई नहीं जानता की किसकी मौत कब तय है. लेकिन दुनिया में एक ऐसी जगह है जहा मरना मना है.

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विश्व में हर किसी की मौत होना तय है. जो भी जीवित है उन सब की मृत्यु होना तो तय है, कोई नहीं जानता की कब और कैसे. लोग अक्सर कहते है की किसी के भी जन्म और मृत्यु के समय का अनुमान लगा पाना नामुमकिन है. हम आपको बता रहे है एक ऐसे शहर के बारे में, जहा इंसानों को मरना मना है. यहाँ लोग मर नहीं सकते. यह शहर स्थित है दुनिया के उत्तरी किनारे पर. लेकिन इसके पीछे वजह भी वैसी ही है. यहाँ की परिस्थितियाँ इस नियम की वजह है. इस शहर का नाम है लॉन्गइयरब्येन. यह शहर पृथ्वी के उत्तरी किनारे पर होने के कारण यहाँ बहुत ज्यादा ठण्ड होती है. यहाँ हमेशा बर्फ ही रहती है. इस देश में ४ महीने से ज्यादा तक सूरज नहीं दिखाई पड़ता.

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यहाँ पर रहने वाले ज्यादातर लोग या तो पर्यटक होते है या फिर शोधकरता. यहाँ के स्थायी निवासी बहुत ही कम है. यहाँ की जनसँख्या करीब २००० ही है. यहाँ ४ महीने से ज्यादा तक रात रहती है. लॉन्गइयरब्येन में हमेशा ही बर्फ होने के कारण यहाँ परिवहन के लिए भी स्नो स्कूटर का ही इस्तेमाल किया जाता है. इस शहर में एक छोटासा कब्रस्तान है. यहाँ पर पिछले ७० सालो से किसी को भी दफनाया नहीं गया है. इसका कारन यह है की यहाँ के बर्फ और ठण्ड की वजह से दफनाई गयु लाश जमीन में घुलती नहीं है और ना ही खराब होती है. वह सालो साल वैसी की वैसी ही रहती है. कुछ सालो पहले वैज्ञानिको ने यहाँ की एक लाश से टिश्यू के नमुने जांच के लिए निकले थे.

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यह इंसान की मौत एक रोग संक्रमण से हुई थी. जांच के बाद पता चला की उसमे अब भी उस रोग संक्रमण के विषाणु जीवित है. इस संशोधन के बाद से यहाँ यह नियम बनाया गया. अब सवाल यह उठता है की यहाँ के सामान्य निवासियो के मौत के बाद उन्हें कहा दफनाया जाता है. यदि इस शहर से कोई भी गंभीर रूप से बीमार होता है हा या उसकी मृत्यु करीब होती है, तो उसे जहाज या विमान से नॉर्वे के किसी अन्य हिस्से में भेज दिया जाता है, जहा उसे दफनाया जा सके. उस इंसान को अपने आखरी समय में वह रखा जाता है और उसकी मृत्यु के बाद उसे वही पर दफना दिया जाता है. लॉन्गइयरब्येन के उत्तरी किनारे पर स्थित होने के कारन वहा का वातावरण ऐसा है.

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अब आपको एक गाव के बारे में बताते है जहा कोई भी गरीब नहीं है. यु तो गाव कहने से सभी को लगता है की वह गरीबी होगी, कुछ गिने चुने ही लोग होंगे जो अमीर हिंगे या उनके पास पर्याप्त सपत्ति होगी. लेकिन अगर कोई आपसे कहे की एक ऐसा गाव है जहा के सभी लोग अमीर है और कोई भी गरीब नहीं है तो कुआ यकीन कर पाएंगे? जी एक ऐसा गाव मौजूद है चीन में. इस गाव के सभी लोगो के पास बड़े घर, गाड़ी और भरपूर नगद भी है. इस गाव का नाम है हुआक्षी है. इस गाव की अमीरी का अंदाजा इसी बात से हो जाता है की साल २०१४ में यहाँ के हर इंसान की औसत आय ८८ लाख रूपए थी. हुआक्षी को दुनिया का सबसे अमीर गाव माना गया है.

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चीन के इस गाव में एक एअरपोर्ट और हेलिपैड भी है. यहाँ के लोगो ने अपनी महनत से ही इतनी कामयाबी पायी है. यहाँ कोई सोना या चांदी की खदान नहीं है. यह गाव साल १९६१ तक बहुत ही गरीब हुआ करता था. एक आदमी वू रेंबाउ ने यहाँ की तरक्की की शुरुवात की थी. उन्होंने कम्युनिटी पार्टी के अध्यक्ष होते हुए यहाँ उद्योगों की शुरुवात की और एक कंपनी से गठन किया. रेंबाउ ने ही यहाँ के लोगो को सामूहिक खेती के लिए प्रेरित किया. १९९० के दशक में यह कंपनी लिमिटेड हुई और यहाँ के हर व्यक्ति को शेयर होल्डर बनाया गया. आज इस कंपनी की ७० से ज्यादा फैक्टरिया है. आज इस कंपनी की इतनी उन्नति हो पाना यहाँ की लोगो की मेहनत का ही नतीजा है.

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इस गाव के हर नागरिक के पास आज ६५-७० लाख से ज्यादा की नगदी जमा है. हर परिवार के पास १०-१० कमरों वाले आलिशान मकान है. यह मकान अन्दर से इतने शानदार है की किसी ५ स्टार होटल से कण नहीं लगते. गाव में एक ३२८ मीटर ऊँचा आलीशान होटल भी है. चीन में इस गाव को सुपर विलेज के नाम से जाना जाता है. साल २०१३ में रेबाउ का देहांत हो गया. वे हमेशा कहते थे की सही समाजवाद वो है जिसमे १०० में से ९८ लोग खुश रहे. काश के दुनिया के हर नेता की सोच इतनी महान होती तो हर व्यक्ति आज तरक्की करता और खुश रह पाता. अज भारत में और दुनियाभर में कई गाव ऐसे है जहा लोगो को २ वक़्त का खाना भी नहीं मिल पाता.