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ये 10 चीजे सिर्फ भारतीय लोग ही कर सकते है, अमेरिकन लोग नहीं

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भारत एक स्वतंत्र देश है, लेकिन उससे भी स्वतंत्र है यहाँ के लोग. जिन्हें हर चीज़ की आज़ादी मिल गयी है. यहाँ के लोग जो भी चाहे कर सकते है.

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अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली और प्रगत देश है. इस देश के लोग बहुत पढ़े लिखे और आधुनिक विचारो वाले है. यह लोग अपने जीवन के निर्णय खुद लेते है, अपने भवितव्य, अपना पेशा भी यह खुद ही चुनते है. लेकिन यह एक दायरे में रहते है. ऐसी कई बाते है जो सिर्फ भारतीय लोग ही कर सकते है और अमेरिकी लोग नहीं कर पाते. भारतीय लोग बिलकुल ही खुशमिजाज होते है. इसलिए वह जो भी चीज़ करते है खुल के करते है, जैसे त्यौहार मानना, जोर से बात करना, मिलना झुला. लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं होता. अमेरिका के लोग दबे दबे से होते. वे जो भी करते है बिलकुल सय्यम से करते है. आज हम ऐसी बाते आपको बताएँगे जो सिर्ज भारतीय लोग ही कर सकते है और अमेरिकी लोग नहीं.

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सबसे पहले तो हम भारतीय सिनेमा घरो में शोर करते है. फिल्म चाहे जैसी भी हो, भारतीय लोग उसका पूरा आनंद उठाते है. भारत में लोग सिनेमा घरो में बहुत शोर मचाते है और सबके साथ फिल्म का उपभोग लेते है. अमेरिका में ऐसा नहीं होता, लोग शांति से पूरी फिल्म देखते है, वे लोग शोर नहीं मचाते जैसा हमारे यहाँ होता है. भारत में फिल्मे भी पारिवारिक, प्रेम कथाए या घरेलु विषय पर ही अधिकतर बनती है, किन्तु वह ऐसा नहीं होता. वह अधिकतर फिल्मे ऐसे विषय पर नहीं बनती. दूसरी बात है अपने परिवार के साथ रहना. यह बात है संस्कारो की. भारतीय संस्कृति में बच्चे अपने माता पिता को सँभालते ही, अपने साथ रखते है. किन्तु विदेश में ऐसा नहीं होता. अमेरिका के लोग विभक्त रहते है.

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भारत में अपने परिवार के साथ ही रहते है. अमेरिका में बच्चे बड़े होने पर अपने माता पिता से अलग रहते है और अपने माता पिटा को भी पगोपनीयता देते है. वे अपना परिवार अलग से बसाते है. इसका यह मतलब नहीं है की वे अपने माता पिता को पसंद नहीं करते, उनकी जीवनशैली हमेश से ऐसी ही रही है. भारतीय माता पिता हमेशा ही अपने बच्चो के साथ रहने के सपने देखते है. उसके बाद आता है शादी का विषय. भारत ने बच्चो की शादी माता पिता ही तय करते है. अमेरिका में बच्चे खुद तय करते है की उन्हें किस्से शादी करनी है. भारत उन चंद देशो में से एक है जहा माता पिता अपने बच्चो के जीवनसाथी चुनते है. अमेरिका के लोग प्रेम विवाह में विश्वास रखते है.

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बात राष्ट्रिय छुटियो की हो भारत पूरी दुनिया में अव्वल है. भारत में कई जाती धर्म लोग एक साथ रहते है जीस वजह से यहाँ अलग अलग त्योहारों की छुट्टिया दी जाती है. लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं है. यहाँ के लोग छुट्टियों मिलने के लिए तरस जाते है. भारत में सभी जाती धर्म के लोग साथ मिलकर हर त्यौहार मनाते है. मरकर एल एल सी द्वारा किये एक अध्ययन के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा सरकार छुट्टियां दी जाती है. खाना खाने की आदतों की तुलना की जाये तो भारतीय लोग अपने हातो से खाना खाते है.किन्तु अमेरिकी लोग हातो से नहीं खाते है. वे लोग काटा, चम्मच, छुरी, नैपकिन का प्रयोग करते है. भारतीय लोग उनके तरीक्से खाना खा सकते है लेकिन वे लोग भारतीय तरीके से खाना नहीं खा पाते.

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अधिभारण भारतीय लोगो की एक और विशेषता है. भारतीय लोग किसी नियम को ना मानने में माहिर है. वे नियम से ज्यादा ही कुछ करेंगे ये तय होता है. वे अपनी तुलना में परिवार की ज्यादा चिंता करते है. यक़ीनन सिर्फ भारतीय पुरुष ही ऐसा कर सकते है. भारतीय अपनी मोटरसाइकिल पर आसानी से ५-६ लोगो को सैर करते है. वैसे तो यह मज़बूरी से ज्यादा कौशल्य की बात कही जा सकती है. भारत के लोग दुसरो को सलाह देने में बिलकुल माहिर होते है. बात जब दुसरो पर आये तो वे बड़ी से बड़ी मुसीबत का हल बता सकते है, सुझाव दे सकते है की किसे क्या और कैसे करना चाहिए. लेकिन यदि बात खुद की हो तो फिर उन्हें कोई उपाय नहीं सुजता. इसका सर्वोत्तम उदहारण है जब भारत की क्रिकेट टीम मैदान में उतरती है.

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हर कोई सुजाव दे रहा होता है की किसे कैसे खेलना चाहिए. और किसने क्या गलत किया. बात अगर खाने की हो तो भारत जैसे खाने के विभिन्न प्रकार आपको किसी और देश में नहीं मिलेंगे. यहाँ का खाना जीस तरह चटपटा और मसालेदार होता है वैसा पश्चिमी देशो में और अमेरिका में नहीं होता. वहा के लोग बहुत ही फीका भोजन लेते है. उनके खाने में तेल और मिथ्ये की मात्रा भी कम ही होती है. भारत में महिला पाककला में निपुण होती है. अमेरिका में ऐसा नहीं है. खतरों से खलेने में भारतीय एकदम माहिर है. भारत के लोग किसी सुरक्षा के बिना ही ज्यादातर काम निपटाते है. ऐसा नहीं की उनके पास साधन पर्याप्त नहीं है. सच तो यह है की उन्हें इन साधनों के बिना ही काम करने में मज़ा आता है. १०वा और आखरी भारतीय काम है भावताल करना. यह काम भारतीय लोग बिलकुल ही कुशलता से करते है. भारतीय महिलाये सब्जी तथा रोज की जरुरत की चीजों में भवताल करने में होशियार होती है. बड़े शहरो अब ये आदत घटती नजर आ रही है लेकिन फिर भी आज भारत में यह बात आम है. अमेरिका में ऐसा बिलकुल ही नहीं है. वह हर चिज का एक निश्चित भाव होता है. और उसमे तोलमोल नहीं होता है.