Home देश राहुल की परीक्षा में मोदी सरकार पास

राहुल की परीक्षा में मोदी सरकार पास

SHARE

विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में ११ घंटों की लंबी बहस चली जिसके बाद मोदी सरकार ने सदन में अपना बहुमत साबित कर दिया  है. वोटिंग के बाद सदन में विपक्ष का लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है. प्रस्ताव के पक्ष में कुल १२६ मत पड़े जबकि विपक्ष में ३२५ मत पड़े.

वोटिंग से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में प्रस्ताव पर चर्चा का अपना जवाब दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास मोदी हटाओ ही एक मात्र मुद्दा है. मोदी के भाषण के दौरान टीडीपी और विपक्षी सांसद नारेबाजी और हंगामा करते रहे. मोदी के भाषण के तुरंत बाद तेलूगु देशम पार्टी के श्रीनिवास केसिनेनी ने उनकी स्पीच की तरफ इशारा करते हुए कहा मुझे लगा मैं बीते देढ़ घंटे से कोई ब्लॉकबस्टर फ़िल्म देख रहा था, इसमें कोई शक़ नहीं कि संसद में मौजूद मेरे साथ दुनिया के सबसे बेहतरीन एक्टर हैं.

श्रीनिवास केसिनेनी को अधिक वक्त ना देते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने वोट के लिए अविश्वास प्रस्ताव आगे बढ़ाने के लिए सभी सदस्यों को अपनी सीट पर जाने के लिए कहा.बदलते हुए वैश्विक परिवेश में हम सभी को साथ मिल कर चलने की आवश्यकता है.

जिन्होंने चर्चा में भाग लिया उनका धन्यवाद. हम सभी के लिए जी जान से काम करने का उद्देश्य ले कर आए हैं. निमंत्रण है कि विपक्ष २०२४ में एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाएं. सरकार ने नया क़ानून बनाया है जिसके बाद बैंक का लोन ना चुकाने वालों के लिए अब बचना मुश्किल होगा. देश के लिए ज़रूरी है ये जानना कि हम २०१४ में जब आए कई लोगों ने कहा कि इकोनॉमी पर श्वेतपत्र लाया जाए.

हमने इसके लिए कोशिश की लेकिन जो जानकारी मिली उससे हम चौंक गए. कहानी २००८ में शुरु होती है जब एक साल बाद चुनाव होने थे. कांग्रेस को लगा कि जितना बैंक खाली किया जा सकता है करना है. बैंकों का अंडरग्राउंड लोन चलता रहा. कांग्रेस जब तक सत्ता में थी बैंकों को लूटने का काम चलता रहा. आज़ादी के ६० सालों में हमारे देशों की बैंकों ने १८ लाख करोड़ रूपये लोन में दिए.

लेकिन २००८ से २०१४ में ये राशि १८ लाख करोड़ से ५२ लाख करोड़ हो गई. और देश एनपीए के जाल में फंस गई. हमने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य देढ़ गुना तक किया लेकिन बीती सरकार ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया.

हमारा काम करने का तरीका काम सुलझाने का है.  वन रैंक वन पेंशन और जीएसटी का विषय सालों तक अटका कर रखा गया था. उस समय के कर्ताधर्ता को मालूम है कि मैंने भारत सरकार को कहा था कि जीएसटी में राज्यों की चिंताओं को देखे बिना इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. मेरे प्रधानमंत्री बनने पर मेरा मुख्यमंत्री के तौर पर अनुभव काम आया और मैंने सभी राज्यों से बात कर जीएसटी को लागू किया.

आंध्र के लोगों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि केंद्र सरकार आंध्र की जनता के कल्याण में पीछे नहीं रहेगी. हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. आपने भारत और पाकिस्तान का विभाजन किया और आज भी हम मुसीबत झेल रहे हैं. आंध्रप्रदेश का भी ऐसा बंटवारा किया कि अब भी संसाधनों का विवाद चल रहा है. हमारी एनडीए सरकार वचनबद्ध है आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के विकास में कोई कमी नहीं आएगी.

यह अच्छा मौका है कि हमें अपनी बात कहने का बात मिल ही रहा है लेकिन देश को यह चेहरा भी देखने का मौका मिला है कि कैसे नकारात्मक राजनीति ने कुछ लोगों को घेर कर रखा हुआ है और उन सब का चेहरा निखर कर बाहर आया है. कई लोगों के मन में यह सवाल आया कि यह प्रस्ताव आया क्यों? विपक्ष के पास बहुमत नहीं है फिर भी यह प्रस्ताव लाया गया. सरकार को गिराने के लिए इतना ही उतावलापन था तो इसे 48 घंटे और टालने की कोशिश क्यों की गई. अगर चर्चा की तैयारी ही नहीं थी तो इसे लाया ही क्यों?