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वसुंधरा राजे ने उठाया ये बड़ा कदम, PM मोदी ने भी किया इस फैसले का स्वागत

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आज भारत में हर दिन कही ना कही महिला एवं छोटी छोटी बच्चियों पर अत्याचार की खबरें सुनने में आती है. यह खबरें दिल और दिमाग को सुन्न करने वाली है. लेकिन राजस्थान की सरकार ने अब इसके खिलाफ एक कठोर कदम उठाया है

भारत एक ऐसा देश है जहा माँ दुर्गा और माँ लक्ष्मी  की पूजा की जाती है. किन्तु यहाँ औरत को सम्मान नहीं मिल रहा. महिला और छोटी बच्चियों पर आत्याचार की घटनाएं अब हर दिन घट रही है. यह बेहद शर्म की बात है. यह बड़ा ही शैतानी कृत्य है. यहाँ तक की १ या २ साल या उससे भी छोटो बच्चियों से गैरवर्तन की घटनाएं बढती जा रही है. ऐसे कुकर्मियों को सजा दिलाने के लिए कानून में सुधार आवश्यक है. और इसी बात को ध्यान में लेते हुए अब राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. राजस्थान में नाबालिको से कोई भी गैरवर्तन करने वाले दोषी को फांसी की सजा दी जाएगी. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जल्द ही राज्य सभा में इस सन्दर्भ का विधेयक पेश करेंगी जिससे ऐसे हैवानों को सीधे फांसी होगी.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कुछ दिन पहले ईस विधायक की मजूरी घोषित की. मध्य प्रदेश के साथ साथ अब राजस्थान भी यह विधेयक पेश करेगा. मध्य प्रदेश के इस फैसले का स्वागत करते हुए राजस्थान के मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा की उनकी सरकार भी मध्य प्रदेश सरकार की तरह ही महिलाओ एवं बच्चियों को एक सुरक्षित वातावरण देना चाहती है और ऐसे गैरवर्तन करने वालो को कठोर शासन भी. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है की उनकी सरकार नाबालिक और बालिकाओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने की तरफ प्रयास करेगी और ऐसे दोषियों को मौत की सजा दी जाएगी. इस क़ानून को बनाने के लिए आई पी सी में खोज की जा रही है. और जल्द ही यह कानून बना कर यह विधायक पेश किया जायेगा.

पिछले साल मध्य प्रदेश में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ऐसा कानून बनाया है जिसके अंतर्गत १२ साल या उससे कम उम्र की बालिकाओ से दुष्कर्म करने वाले अपराधियों को मृत्यु दंड दिया जायेगा. इस विधयक को फिर कैबिनेट में मंजूरी दे दी गयी. एम पी में किसी उम्र की महिला पर हुए सामूहिक बलात्कार में दोषी पाए जाने वाले को भी फांसी की सजा होगी. मध्य प्रदेश और राजस्थान के साथ अब हरियाणा ने भी अपने राज्य में ऐसा कानून बनाने की तैय्यारी दिखाई है. उन्होंने कहा है की आने वाले दिनों में वह भी अपने राज्य में ऐसा कानून बनाने पर विचार विनिमय करेंगे. लेकिन हैरानी की बात यह है की यह कानून सिर्फ भा ज पा शासित राज्यों में बनाये जा रहे है. कांग्रेस शासित किसी भी राज्य में अभी तक इस बात का कोई जिक्र नही हुआ है.