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समिट में PM मोदी अचानक ही मिले जिनपिंग से, ये वजह आयी सामने ,सदमें में पकिस्तान

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भारत और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव चल रहा है. ऐसे में ‘डोकलाम विवाद’ भारत और चीन के बीच काफी वर्षों चले आ रहे जख्मों में से एक है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसी साल २७ अप्रैल को अचानक चीन दौरा किया था और इस दौरे को द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने और डोकलाम जैसे विवाद को खत्म करने के लिए किये गए प्रयासों में से एक था.

कुछ वक्त पहले भारत सरकार ने यह कहा था कि सिक्किम के डोकलाम विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच बीते कुछ हफ्तों से राजनयिक स्तर पर बातचीत चल रही थी. बता दे की दरअसल डोकलाम क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच पिछले काफी समय से तनातनी बनी हुई थी लेकिन इस विवाद के बाद से ही भारत और चीन ने आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए काफी अच्छे प्रयास किया है. जानकारी के मुताबिक़ अप्रैल के महीने पीएम मोदी के ‘वुहान’ शहर की सफल यात्रा के बाद वह एक बार फिर वो ९ जून को शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के लिए चीन के यात्रा पर जाने वाले है. पीएम मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के साथ-साथ एससीओ समिट में भाग ले रहे अन्य राष्ट्राध्यक्षों से भी मुलाकात करेगें जिनमें रूस और पाकिस्तान के राष्ट्रपति भी शामिल है.

जानकारी के लिए बता दें पिछले दिनों चीन ने हाफिज सईद को लेकर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए उसे देश से बाहर करने की सलाह दी थी जबकि अमेरिका पहले से ही हाफिज सईद की पार्टी ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ को प्रतिबंधित कर चुका है. तो ऐसे में भारत के पास ये अच्छा मौका है कि वह पाकिस्तान पर दबाव बना सके और साल २००६ में हुए मुंबई हमलों के मास्टर मांइड हाफिज सईद तथा भारतीय भगोड़े दाऊद के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो. प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आपसी मुलाकात कर दोनों देशों के बीच बढ़ी हुई दूरी को कम करने की कोशिश करेगें साथ ही दोनों देशों को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के बारे में भी वार्ता कर सकते हैं. डोकलाम विवाद के बाद से दोनों देशों की बीच के रिश्ते में काफी ज्यादा तल्खी आ गई थी लेकिन हाल ही में दोनो देशों के राष्ट्राध्यक्षो के बीच हुए कई मुलाकात के बाद रिश्ते काफी सामान्य हुए है.