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सरकार क्यों नहीं करती खूब सारे पैसे प्रिंट

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देश के विकास का मूल्यमापन देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भर होता है. देश की अर्थव्यवस्था तभी मजबूत होती है जब वहा के लोगों में आर्थिक स्थिरता हो.लेकिन दुनिया में कई देश है जहा गरीबी के कारण देश अपने विकास में पीछे छूट गए है.लेकिन देश की गरीबी को हटाने के लिए प्राथमिक रूप से वहा के लोगों को ही आगे बढ़ना होगा।

सबके मन में सवाल आता होगा की सरकार के पास खुद की करेंसी होने के बाद भी खूब सारे नोट नहीं छपती।क्योंकि सर्कार ने अगर नोट छपाये तो देश की गरीबी कम की जा सकेगी।सरकार ने खूब पैसे छापे तो हो सकता है की सब समस्या ख़त्म हो जाए.देश में न कोई गरीब रहेगा, ना कोई बेरोजगार रहेगा। ऐसी कई समस्या है जो पैसों से जुडी हुई है जो मिट सकती है.हर देश के गवर्नमेंट के पास नोट छापने के हर संसाधन उपलब्ध है.

खूब सारे नोट छापने के बाद खूब साड़ी समस्या एक झटके में काम हो जायेगी।लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर सकती।इसका कारन हम आगे जाकर देखेंगे। सरकार के खूब सारे पैसे छापने के बाद देश कभी श्रीमंत नहीं हो सकता।मंदी के वक्त कभी कभी नोटों की छपाई की जा सकती है.लेकिन ऐसा सिर्फ गंभीर स्थिति में किया जा सकता है.

सरकार नोटों का संसाधन होने से अगर ज्यादा छपने लगी तो ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था का नुक्सान हो सकता है.इसके कारण देश में तेजी से महंगाई बढ़ सकती है.अगर इसका एक उदाहरण को देखना हो तो हम ज़िम्बाब्वे की तरफ चलते है.साल  २००२ में ज़िम्बाब्वे की महंगाई ने आसमान छू लिया था.ज़िम्बाब्वे ने इस संकट से निपटने के लिए दो लाख डॉलर के नोट छपने शुरू कर दिए.लेकिन यहाँ मजेकी बात थी की इस की कीमत हमारे यहाँ दो रुपये जितनी ही थी.उसके बाद पांच लाख की डॉलर बाजार में लायी गयी.

इसके बाद फिरसे साढ़ेसात लाख का नोट आया.लेकिन ज़िम्बाब्वे की मूर्खता यहाँ नहीं रुकी तो उन्होंने आगे जाकर दस मिलियन की नोट बाजार में लायी।लेकिन फिरसे मजे की बात रही की उस नोट से ज्यादा यहाँ ५०० की नोट का मूल्य था.

ज़िम्बाब्वे की इस कदम का मतलब निकला की अगर आपके पास ६५ अर्ब डॉलर हो तो उसकी यहाँ कीमत तेरा से चौदा हजार होगी।उस वक्त ज़िम्बाब्वे की पच्चीस मिलियन डॉलर मतलब १ डॉलर थे.अब आप जान गए होंगे की अगर कोई देश मनचाहे नोट छापता है तो उसकी क्या कीमत होती है.असल में जानने की कोशिश करते है की अगर कोई देश मनचाहे नोट छापे और जनता में बाट दे तो कैसे महंगाई बढ़ जाती है.

जब आपकी कमाई बढ़ती है तो आपके खर्चे भी बढ़ते है.जिसके कारण अपने स्टेटस की वजह से जरूरते भी बढ़ते है.अगर आप जरा सोचिये की सरकार ने तय किया है की  खाते में एक करोड़ डाले।आपको सुचना मिलती है की आपके खाते में एक करोड़ जमा किये है.अब आप खुश होंगे।और शॉपिंग के लिए निकल पड़ेंगे।

एक करोड़ आने के बाद जो विचार आपने किया वो सभी के मन में में होगा।अब वस्तुओं की मांग बहेगी।हर एक के पास पैसा होने के कारण हर एक उत्तेजित होगा।इसके कारण वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी।एक झटके में करेंसी का मूल्य घटेगा।मायने आपको एक घर लेना है.जब आपके पास पैसे नहीं थे तब उसकी कीमत तिस लाख थी.बाद में एक करोड़ जमा होने के बाद आप घर ले सकोगे।इसके कारन आप सीधा बिल्डर के पास जा पहुंचेगे।

आप देखेंगे के की सभी लोग भी वहा पहुंचे हुए है.उसी घर को खरीदने के लिए हजारों लोग बाहर खड़े है.बिल्डर यह देख घर की कीमत बढ़ाकर ७५ लाख कर देता है। यही हालत पुरे बाजार में भी होगी।मांग बढ़ती है तो उसका स्वाभाविक प्रभाव कीमत पर पड़ता है.मांग के साथ साथ कीमत भी बढ़ने लगती है.पैसा आएगा तो महंगाई बढ़ेगी और लोगों के पास के से पैसे जल्दी ख़त्म हो जाएंगे।