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हो जाइये सावधान, भारत की ये 49 बैंक जल्दी हो सकती है दिवालिया

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आपको यह जानकार हैरानी होगी की हमारे देश के करीब ४९ बैंक दिवालिया होने की कगार पर है. यह जानकारी आर ती आई की जांच में सामने आ गयी है.

भारतीय बैंक के अब तक के सबसे पी एन बी घोटाले ने पुरे देश को चौंका दिया है लेकिन उससे भी चौंकाने वाली ख़बर यह है की भारत के कई बैंक दिवालिया होने की कगार पर है. काफी समय से एन पी ए से ज़ुंज़ रहे भारतीय बैंक. बैंको लिए गए कर्जो के डूबने कारन यह हो रहा है. पिछले ५ साल में भारतीय बैंक के ३ लाख ६७ हजार ७६५ करोड़ रूपए राईट ऑफ के जरिये डूब चुके है. और इससे भी कई ज्यादा रकम बैड लोन्स श्रेणी में शामिल किया जा सकता है. बैंको पर लगातार ऐसी रकम को डूबता खाते में डालने का दबाव बढ़ रहा है. यह साड़ी जानकारी आर टी आई की तहत की गयी जांच में सामने आई है. इस जानकारी यह साफ़ हो रहा है की बैंक डूबने की राह पर है.

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के मुताबिक साल २०१२ से २०१७ तक पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंको ने अपने आपसी समजौते में कुल ३ लाख ६७ हजार की रकम राईट ऑफ की है. इसमें २७ सरकारी बैंक और २२ प्राइवेट बैंको का समावेश है. सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने आर टी आई के अंतर्गत यह जानकारी पूछी थी. आर बी आई ने कहा है की बैंको की राईट ऑफ रकम बढती जा रही है. साल २०१२-१३ में बैंको की राईट ऑफ रकम ३२१२७ करोड़ थी. जो साल २०१६-१७ में १ लाख ३ हजार २०२ करोड़ तक पहुँच गयी. इन आकड़ो से यह भी स्पष्ट है की सरकारी बैंको ने प्राइवेट बैंको से लगभग ५ गुना ज्यादा रकम राईट ऑफ की है.५ सालो में नीजी बैंको ने ६४ हजार १८७ करोड़ की रकम की है तो वही सरकारी बैंको ने ३ लाख ३ हजार ५७८ करोड़ की रकम राईट ऑफ की.

बैंक को एक निर्धारित लक्ष्य दिया जाता है जिसमे वह क़र्ज़ देते है. सरकारी बैंक इस लक्ष को पूरा करने के लिए बिना सोचे और नियमो को डाव पर लगा कर कर्जा देते है. इन्ही वजह से नीरव मोदी और विजय मल्ल्या के मामले में बैंको का पैसा डूबा है. बैंक को इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अपने कायदे और कानूनों में सुधार कैने की आवश्यकता है. बैंक की ऐसी डूबती स्थिति बहुत हानिकारक साबित होगी. भारत जहा एक तरफ आर्थिक उन्नति कर रहा है, वही दूसरी तरफ बैंको की राईट ऑफ की रकम में बढाव एक चिंताजनक विषय है. भारत को आर्थिक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए बैंको का सुरक्शीत होना जरुरी है. बैंको को भी किसी भी तरह का क़र्ज़ देते समय नियमों का पूरी तरह पालन करना चाहिए.